NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून-2024 (हिन्दी) Shift-II

Total Questions: 100

81. प्रेमचन्द्र की पत्नी शिवरानी देवी ने 'प्रेमचन्द घर में' नाम से उनकी जीवनी लिखी है। इसका प्रकाशन वर्ष निम्नलिखित में से क्या है?

Correct Answer: (c) 1944.
Solution:प्रेमचन्द की पत्नी शिवरानी देवी ने 'प्रेमचन्द घर में नाम से उनकी जीवन लिखी, जिसका प्रकाशन सन् 1944 ई. में हुआ। जबकि अमृतराय ने 'कलम का सिपाही' और मदनगोपाल ने कलम का मजदूर' नाम से प्रेमचन्द की जीवनी लिखी। शिवरानी देवी भी एक साहित्यकार थीं। जो मुंशी जी के साहित्य रूपी बरगद की छाया में छिपी हुई लता रह गईं। मुंशी प्रेमचंद के बारे में सैकड़ों शोध प्रबंध और दर्जनों संस्मरण लिखे गये हैं। लेकिन वे एक व्यक्ति के रूप में कैसे थे इस बात का विवरण हमें शिवरानी देवी के संस्मरण 'प्रेमचंद घर में बखूबी मिलता है।

82. 'स्कंदगुप्त' के 'आमुख' के अनुसार निम्न में से कौन सा कथन असत्य है?

A. 467 ई. में स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य का अंत हुआ।
B. मातृगुप्त किशोरावस्था में कुमारगुप्त की सभा में थे।
C. महाराजा चन्द्रगुप्त के समय में सिंहल के राजा मेघवर्ण ने उपहार भेजकर बोधगया में विहार बनाने की प्रार्थना की थी।
D. दिड्नाग का गुरु वसुबन्धु अयोध्या के विक्रमादित्य का सुहृद था।
E. कालिदास स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य के सहचर थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (b) केवल C
Solution:दिये गये प्रश्न में स्कंदगुप्त के आमुख के अनुसार निम्न में से असत्य कथन है-
"महाराजा चन्द्रगुप्त के समय में सिंहल के राजा मेघवर्ण ने उपहार भेजकर बोधगया में विहार बनाने की प्रार्थना की थी।" जबकि अन्य सभी कथन सत्य हैं।
स्कन्दगुप्त जयशंकर प्रसाद द्वारा सन् 1928 ई. में रचित नाटक है। इस नाटक में कुमारगुप्त के विलासी साम्राज्य की उस स्थिति का चित्रण हुआ है जहाँ आन्तरिक कलह, संघर्ष और विदेशी आक्रमण के फलस्वरूप उसके भावी क्षय के लक्षण प्रकट होने लगे थे। जयशंकर प्रसाद एक ऐतिहासिक नाटककार के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनका प्रथम नाटक सन् 1910 ई. में प्रकाशित 'सज्जन' को माना गया है।
जयशंकर प्रसाद के प्रमुख नाटक - सज्जन (1910), करुणालय (1912), प्रायश्चित (1913), राजश्री (1915), विशाख (1921), अजातशत्रु (1922), कामना (1927), स्कन्दगुप्त (1928), चन्द्रगुप्त (1931), ध्रुवस्वामिनी (1933)।

83. 'मैं तो चाहता हूं सबको अपने-अपने अधिकार सौंपकर अपने अधिकारों को शून्य में बदल दूं।

उपरोक्त कथन किस नाटक से लिया गया है?

Correct Answer: (c) महाभोज
Solution:"मैं तो चाहता हूँ सबको अपने-अपने अधिकार सौंपकर अपने अधिकारों को शून्य में बदल दूँ।” उपर्युक्त कथन 'महाभोज' नाटक का है। यह मन्नू भण्डारी का नाटक है। इसका प्रकाशन वर्ष 1982 ई. है। यह इनके ही उपन्यास महाभोज का नाट्य रूपान्तर है। इनका एक अन्य नाटक 'बिना दीवारों के घर' है। इसका प्रकाशन वर्ष 1965 ई. है। 'एक और द्रोणाचार्य' शंकरशेष का नाटक 'आधे अधूरे' मोहन राकेश का नाटक तथा 'अंजो दीदी' उपेन्द्रनाथ अश्क का नाटक है।

84. राजभाषा संबंधी संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में कौन सा/से कथन असत्य है/हैं?

A. अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी है।
B. अनुच्छेद 350 में भाषागत अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित रखा गया है।
C. अनुच्छेद 348 के अनुसार जब तक संसद विधि द्वारा अन्य उपबंध न करें तब तक न्यायालयों में सभी कार्य द्विभाषा होंगे।
D. अनुच्छेद 345 के अनुसार राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा एक या अधिक प्रादेशिक भाषाओं तथा हिंदी को सरकारी प्रयोजनों में स्वीकार कर सकेगा।
E. अनुच्छेद 351 के अनुसार हिंदी भाषा के विकास के लिए हिंदी में अन्य भारतीय भाषाओं के शब्दों को जोड़ा जाए।
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (a) केवल C, D
Solution:दिये गये प्रश्न में राजभाषा संवैधानिक व्यवस्था के संदर्भ में असत्य कथन है- "अनुच्छेद 348 के अनुसार जब तक संसद विधि द्वारा अन्य उपबन्ध न करें तब तक न्यायालयों में सभी कार्य द्विभाषी होंगे। तथा अनुच्छेद 345 के अनुसार राज्य विधानमण्डल विधि द्वारा एक या अधिक प्रादेशिक भाषाओं तथा हिन्दी को सरकारी प्रयोजनों में स्वीकार कर सकेगा।" जब कि सत्य कथन इस प्रकार है- "अनुच्छेद 348 में जब तक संसद विधि द्वारा उपबन्ध न करे, तब तक उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों में सभी कार्यवाहियाँ अंग्रेजी भाषा में होंगी।"
अनुच्छेद 345 - किसी राज्य का विधान मण्डल, विधि द्वारा उस राज्य में इस्तेमाल होने वाली भाषाओं में से किसी एक या अधिक भाषाओं को या हिन्दी को उस राज्य के सभी या किन्हीं शासकीय प्रयोजनों के लिए अंगीकार कर सकता है। जब तक ऐसा नहीं किया जाता, अंग्रेजी का प्रयोग उसी प्रकार किया जाता रहेगा जिस प्रकार उससे ठीक पहले किया जा रहा था।

85. 'कृपाकंद' के रचयिता हैं-

Correct Answer: (b) घनानंद
Solution::'कृपाकंद' के रचयिता 'घनानंद' हैं।
घनानंद रीतिमुक्त धारा के प्रमुख कवि हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने घनानंद के विषय में लिखा है- “ये साक्षात् रसमूर्ति और ब्रजभाषा के प्रधान स्तम्भों में हैं।"
घनानंद - सुजान सार, इश्कलता, विरहलीला, वियोगबेलि, कोकसार, रसकेलिवल्ली, यमुनायश।
बोधा - विरहवारीश, इश्कनामा।
आलम - आलमकेलि, माधवानलकामकंदला, सुदामा चरित, स्याम सनेही।
ठाकुर - ठाकुर ठसक, ठाकुर शतक ।

86. दिए गए विकल्पों में से असत्य कथन का चयन कीजिए :

A. पूर्वी हिंदी का विकास मागधी से हुआ है।
B. लंका में पालि को ही अर्धमागधी कहा जाता है।
C. अर्धमागधी कोसल के आसपास विकसित हुई है।
D. राजस्थानी भाषा का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से कहा जाता है।
E. तीसरी सदी के लगभग विकृत शब्दों को अपभ्रष्ट या अपभ्रंश कहा जाता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (a) A, C
Solution:दिये गये विकल्पों में से असत्य कथन है- "पूर्वी हिन्दी का विकास मागधी से हुआ है।" जबकि इसका सत्य रूप होगा- "पूर्वी हिन्दी का विकास अर्धमागधी अपभ्रंश से हुआ है।" तथा 'अर्धमागधी' कोसल के आस-पास विकसित हुई है" यह कथन असत्य है इसका सत्य रूप होगा अर्धमागधी अपभ्रंश से पूर्वी हिन्दी तथा पूर्वी हिन्दी के अन्तर्गत तीन बोलियाँ अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी का विकास हुआ है। अवधी बोली को कोसली नाम से भी जाना जाता है। दिये गये अन्य सभी विकल्प सत्य हैं।

87. 'तमस' उपन्यास में आई घटनाओं को पहले से बाद के क्रम में लगाइए

(A) शिष्टमंडल का रिचर्ड से मिलन और कर्फ्यू लगाने की अपील करना। बंगले से बाहर आते ही एक दूसरे से बोलना बन्द कर देना।
(B) रिचर्ड द्वारा बुद्ध की मूर्ति की चमक का वर्णन लीजा के सामने करना और लीजा द्वारा आदमियों के पत्थरों और खंडहरों में रस लेने के विषय पर आश्चर्य व्यक्त करना।
(C) थिगलियों में लिपटे कंकड़, गुथे आटे का पुतला और उसमें खोंसी हुई लकड़ियों की खपच्ची पर नत्थू का पैर पड़ना और उसका खीझ उठना ।
(D) लीजा द्वारा रिचर्ड से झगड़ा रुकवाने के लिए कहना पर रिचर्ड का यह उत्तर देना कि यह लोग मेरे खिलाफ लड़ें, उससे बेहतर है कि यह आपस में लड़ें।
(E) करीम खान द्वारा हाकिम की दूरन्देशी का जिक्र करते हुए मूसा और खिज़र की कहानी सुनाना।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) C, B, A, E, D
Solution:'तमस' उपन्यास में आई घटनाओं का पहले से बाद का क्रम निम्नलिखित है-
(1) थिगलियों में लिपटे कंकड़, गुथे आटे का पुतला और उसमें खोंसी हुई लकड़ियों की खपच्ची पर नत्थू का पैर पड़ना और उसका खीझ उठना ।
(2) रिचर्ड द्वारा बुद्ध की मूर्ति की चमक का वर्णन लीजा के सामने करना और लीजा द्वारा आदमियों के पत्थरों और खंडहरों में रस लेने के विषय पर आश्चर्य व्यक्त करना।
(3) शिष्टमंडल का रिचर्ड से मिलना और कर्फ्यू लगाने की अपील करना। बंगले से बाहर आते ही एक-दूसरे से बोलना बन्द कर देना।
(4) करीमखान द्वारा हाकिम की दूरन्देशी का जिक्र करते हुए मूसा और खिजर की कहानी सुनाना।
(5) लीजा द्वारा रिचर्ड का झगड़ा रुकवाने के लिए कहना पर रिचर्ड का यह उत्तर देना कि यह लोग मेरे खिलाफ लड़ें, उससे बेहतर है कि यह आपस में लड़ें।
'तमस' भीष्म साहनी द्वारा 1973 ई. में रचित उपन्यास है। इस उपन्यास में भारत विभाजन की साम्प्रदायिक विभीषिका का महाकाव्यात्मक अंकन हुआ है।
भीष्म साहनी के अन्य उपन्यास - झरोखा (1967), कड़ियाँ (1970), वसंती (1980), मय्यादास की माड़ी (1988), कुंतो (1993), नीलू नीलिमा नीलोफर (2000) ।

88. "गद्य की भाषा पर द्विवेदी जी के इस शुभ प्रभाव का स्मरण जब तक भाषा के लिए शुद्धता आवश्यक समझी जाएगी तब तक बना रहेगा।"

उपरोक्त पंक्ति किस आलोचक ने महावीर प्रसाद द्विवेदी के लिए लिखी है?

Correct Answer: (b) आचार्य रामचंद्र शुक्ल
Solution:“गद्य की भाषा पर द्विवेदी जी के इस शुभ प्रभाव का स्मरण जब तक भाषा के लिए शुद्धता आवश्यक समझी जाएगी तब तक बना रहेगा।" उपरोक्त पंक्ति आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने महावीर प्रसाद द्विवेदी के संबंध में लिखी हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने लिखा- "हम पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी को पद्य रचना की एक प्रणाली के प्रवर्तक के रूप में पाते हैं।” महावीर प्रसाद द्विवेदी ने गद्य और पद्य दोनों के लिए खड़ी बोली में सामान्य बोलचाल की भाषा को प्राथमिकता देने की वकालत की।"
महावीर प्रसाद द्विवेदी - काव्य मंजूषा, सुमन, देवी स्तुति शतक, कान्यकुब्जावलीव्रतम्।
नन्ददुलारे वाजपेयी की प्रमुख कृतियाँ - हिन्दी साहित्य बीसवीं शताब्दी (1942), आधुनिक साहित्य (1950), नयी कविता (1973), सुमित्रानंदन पंत (1976), रस सिद्धान्त (1977), साहित्य का आधुनिक युग (1978) इत्यादि ।
नामवर सिंह - छायावाद, इतिहास और आलोचना, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परम्परा की खोज, आलोचक के मुख से, इत्यादि ।

89. 'जयशंकर प्रसाद के निम्नलिखित काव्य ग्रंथों को प्रकाशन वर्ष के अनुसार पहले से बाद के क्रम में लगाइए :

A. आँसू
B. लहर
C. झरना
D. चित्राधार
E. महाराणा का महत्व
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (e) (*)
Solution:जयशंकर प्रसाद के उपर्युक्त काव्य ग्रंथों का प्रकाशन वर्ष के अनुसार पहले से बाद का क्रम निम्नलिखित है-
रचना-प्रकाशन वर्ष
महाराणा का महत्व-1914 ई.
चित्राधार-1918 ई.
झरना-1918 ई.
आँसू-1925 ई.
लहर-1933 ई.

नोट- दिये गये प्रश्न में आयोग ने प्रश्न को मूल्यांकन से बाहर कर दिया है। क्योंकि इसके प्रश्न के दिये गये सभी विकल्प असंगत हैं।

90. निम्नलिखित रचनाओं का के उनकी विधाओं के साथ सुमेलित सही युग्म कौन सा/से हैं?

A. प्रेमचंद घर में आत्मकथा
B. एक कहानी यह भी जीवनी
C. भोलाराम का जीव व्यंग्य
D. माटी की मूरतें संस्मरण
E. अरे यायावर रहेगा याद-कविता
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल C, D
Solution:उपर्युक्त रचनाओं का उनकी विधाओं के साथ सुमेलित संगत युग्म इस प्रकार है-
रचनारचनाकारविधा
प्रेमचंद घर मेंशिवरानी देवीजीवनी
एक कहानी यह भीमन्नू भण्डारीआत्मकथा
भोलाराम का जीवहरिशंकर परसाईव्यंग्य
माटी की मूरतेंरामवृक्ष बेनीपुरीसंस्मरण
अरे यायावर रहेगा यादअज्ञेययात्रा वृतांत