सच्चे लेखक और कलाकार की कसौटी दोब्रोल्युबोव ने यह मानी है कि वह मानव हृदय तथा जीवन की गहराई में कितनी दूर तक प्रविष्ट होकर ऐसे विचारों को जन्म दे सका है, जो सम्पूर्ण मनुष्यता के लिए प्रेरक हो। ऐसे लेखकों का कृतित्व ही हमे वह समझ प्रदान करता है, जो अब तक हममें न थी, और जिसके स्वामी बन कर हम स्वयं अपने को सम्पन्न अनुभव करने लगे है। ये लेखक मानवीय चेतना के उच्चतर स्तर के प्रतिनिधि होते है, अवर मनुष्यता इन्हें इतिहास पुरुषों के रूप में स्मरण करती है। मानवता के समक्ष जीवन के सर्वांगीण विकास का पथ प्रशस्त करने वाले, मनुष्यता को उसकी अपनी जीवन्त शक्ति का, उसके अपने सहज रूप का बोध कराने वाले, ऐसे ही लेखकों की पंक्ति में दोब्रोल्युबोव ने शेक्सपीयर का स्मरण किया है।
मध्य प्रतिभा वाले लेखकों की स्थिति को भी दोब्रोल्युबोव ने स्वीकार किया है। ऐसे लेखकों के लिए उनका कथन है कि उनके लिये यही बहुत है कि वे 'सहायक भूमिका का निर्वाह' करें। जब वे दुनिया को अपना कुछ मौलिक दे नहीं सकते, जो कुछ महान प्रतिभाओं ने दुनिया को दिया है उसके अनुरूप मनुष्यता आगे बढ़ती रहे, उसे इस स्तर पर भी सक्रिय नहीं कर सकते, तो फिर आवश्यक है कि वे अपनी असलियत को पहचान कर सब ओर हाथपैर फैलाने के बजाय, कुछ खास लक्ष्यों तक अपने को सीमित रखें। जनता को महान प्रतिभाओं के कृतित्व से परिचित कराएँ तथा अपने बारे में जिन बातों को मनुष्य अभी तक नहीं समझ सका है, यथासम्भव समझने की इस प्रक्रिया में उसकी मदद करें।
गद्यांश में लेखक ने किसे सहायक भूमिका का निर्वाह करने की सलाह दी है?
Correct Answer: (b) मध्य प्रतिभावान
Solution:गद्यांश में लेखक ने मध्य प्रतिभावान को सहायक भूमिका का निर्वाह करने की सलाह दी है।