NTA यू.जी.सी. नेट/ जेआरएफ पुनर्परीक्षा,जून 2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

31. सरोजिनी नायडू और मैथिलीशरण गुप्त से लेकर अपने कनिष्ठ कथाकार फणीश्वरनाथ 'रेणु' तक बारह लेखक बंधुओं के संस्मरण को अज्ञेय ने अपने किस संस्मरण में संकलित किया है?

Correct Answer: (c) स्मृति-लेखा
Solution:सरोजिनी नायडू और मैथिलीशरण गुप्त से लेकर अपने कनिष्ठ कथाकार फणीश्वरनाथ 'रेणु' तक बारह लेखक बंधुओं के संस्मरण को अज्ञेय ने अपने स्मृति लेखा (1986ई.) संस्मरण में संकलित किया है।
अरे यायावर रहेगा याद (1953 ई.) तथा 'एक बूँद सहसा उछली' (1960 ई.) अज्ञेय का यात्रा साहित्य है। जबकि चेतना के बिम्ब (1967 ई.) डॉ. नगेन्द्र का रेखाचित्र है।

32. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची-I/(पंक्ति)सूची-II/(निबंध)
A. 'अशोक के फूल' केवल एक फूल की कहानी नहीं, भारतीय संस्कृति का एक अध्याय है।I. मजदूरी और प्रेम
B. आत्म जागरण बनाम राष्ट्र जागरण। गीत की प्रथम कड़ी का भाव प्रवाह दोनों ओर है।II. मेरे राम का मुकुट भीग रहा है
C. है रीत आशिकों की तन मन निसार करना रोना सितम उठाना और उनको प्यार करना।III. संस्कृति और सौंदर्य
D. किस ओर राम मुड़े होंगे बारिश से बचने के लिए? किस ओर? किस ओर? बता दो सखी।IV. उठ जाग मुसाफिर

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) (A)-(III), (B)-(IV), (C)-(I), (D)-(II)
Solution:सूची-I सूची-II के साथ सही सुमेन्लन इस प्रकार है-
पंक्तिनिबंध
‘अशोक के फूल’ केवल एक फूल की कहानी नहीं, भारतीय संस्कृति का एक अध्याय है।संस्कृति और सौन्दर्य
आत्म जागरण बनाम राष्ट्र जागरण। गीत की प्रथम कड़ी का भाव प्रवाह दोनों ओर है।उठ जाग मुसाफिर
है रीत आशिकों की तन मन निसार करना रोना सितम उठाना और उनको प्यार करना।मजदूरी और प्रेम
किस ओर राम मुड़े होंगे बारिश से बचने के लिए? किस ओर? किस ओर? बता दो सखी।मेरे राम का मुकुट भीग रहा है।

33. 'साधारणीकरण' के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन से कथन असत्य हैं?

(A) किसी असाधारण पदार्थ का साधारण रूप में गृहीत होना साधारणीकरण व्यापार कहाता है।
(B) काव्य-नाटक में साधारणीकरण विभावादि के सम्मिश्रित क्रिया-कलाप के समस्त घटना चक्र का होता है।
(C) साधारणीकरण व्यापार द्वारा सहृदय अपने समस्त पूर्वाग्रहों से विमुक्त हो जाता है।
(D) डॉ. नगेन्द्र ने आलम्बनत्व धर्म का साधारणीकरण माना है।
(E) कवि की अनुभूति के साधारणीकरण को आचार्य शुक्ल सहित सभी काव्यशास्त्रियों ने मान्यता प्रदान की है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (D) और (E)
Solution:डॉ. नगेन्द्र ने आलम्बनत्व धर्म का साधारणीकरण माना है।
• कवि की अनुभूति के साधारणीकरण को आचार्य शुक्ल सहित सभी काव्यशास्त्रियों ने मान्यता प्रदान की है।
उपर्युक्त कथन साधारणीकरण के संबंध में असत्य हैं। साधारणीकरण के संबंध में सत्य कथन निम्नलिखित हैं-
1. किसी असाधारण पदार्थ का साधारण रूप में गृहीत होना साधारणीकरण व्यापार कहलाता है।
2. काव्य नाटक में साधारणीकरण विभावादि के सम्मिश्रित क्रिया- कलाप के समस्त घटना चक्र का होता है।
3. साधारणीकरण व्यापार द्वारा सहृदय अपने समस्त पूर्वाग्रहों से विमुक्त हो जाता है।
• साधारणीकरण की अवधारणा सर्वप्रथम भट्टनायक ने प्रस्तुत की।
• साधारणीकरण की अवधारणा सर्वप्रथम भट्टनायक ने प्रस्तुत की।
भट्टनायक काव्य की तीन क्रियाएँ (व्यापार) मानते हैं-
1. अभिधा काव्यार्थ की प्रतीति
2. भावकत्व साधारणीकरण
3. भोजकत्व रस का भोग

34. 'काव्य उस शब्दार्थ को कहते हैं जो दोष रहित हो तथा जिसमें गुण नित्य रूप से और अलंकार अनित्य रूप से विद्यमान हो।' उपर्युक्त काव्य लक्षण किस आचार्य ने दिया है :

Correct Answer: (c) वामन
Solution:'काव्य उस शब्दार्थ को कहते हैं जो दोष रहित हो तथा जिसमें गुण नित्य रूप से और अलंकार अनित्यरूप से विद्यमान हो।'- उपर्युक्त काव्य लक्षण आचार्य वामन ने दिया है।
• संस्कृत में शब्दार्थ के आधार पर काव्य लक्षण और आचार्य

35. दोष रहित अरु गुन सहित, कछुक अल्प अलंकार सबद अरथ सो कवित है, ताको करो विचार।" काव्य लक्षण किस आचार्य का है?

Correct Answer: (d) कुलपति मिश्र
Solution:मध्यकालीन हिंदी कवियों ने निम्नलिखित काव्य लक्षण लिखें-
आचार्यकाव्य लक्षण
भामहशब्दार्थौ सहितौ काव्यम्।
वामनकाव्य शब्दोऽयंगुणालंकार संस्कृतयोः
मम्मटतद्दोषौ शब्दार्थौ सगुणावलंकृती पुनः क्वापि
रूद्रटननु शब्दार्थौ काव्यम्।

36. निम्नलिखित में कौन-सा निबंध विवेकी राय का नहीं है?

Correct Answer: (c) गाँव का मन
Solution:गाँवों की दुनिया (1957ई.), गँवई गंध गुलाब तथा नया गाँव नाम (1984 ई.) विवेकी राय के निबन्ध संग्रह हैं जबकि 'गाँव का मन' (1985ई.) विद्यानिवास मिश्र का निबन्ध है न कि विवेकीराय का।
विद्यानिवास मिश्र के अन्य प्रमुख निबंध - छितवन की छाह, हल्दी दूब, कदम की फूली डाल, तुम चंदन हम पानी, मेरे राम का मुकुट भीग रहा है, कौन तू फूलवा बीन निहारी, भ्रमरानंद के पत्र, अंगद की नियति, देश धर्म और साहित्य, शिरीष की याद आई आदि।

37. यह मंगलाचरण किस नाटक का है?

'जम सतजुग-थापन करन, नासन म्लेच्छ आचार ।
कठिन धार तरवार कर, कृष्ण कल्कि अवतार '

Correct Answer: (a) भारतदुर्दशा
Solution:"जम सतजुग थापन करन, नासन म्लेच्छ आचार । कठिन धार तरवार कर, कृष्ण कल्कि अवतार ।।"
उपर्युक्त मंगलाचरण भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत 'भारत दुर्दशा' (1880 ई.) नाटक का है।
'भारत दुर्दशा' नाटक राष्ट्रीय चेतना का पहला हिंदी नाटक है जो वीर, श्रृंगार और करूण रस पर आधारित है। इस नाटक में कुल छः (6) अंक हैं।
भारत दुर्दशा नाटक के प्रमुख पात्र - योगी, भारत भाग्य, भारत, भारत दुर्दैव, निर्लज्जता, सत्यानाश, फौजदार, रोग, आलस्य, अन्धकार, और डिसलॉयलटी।
भारतेन्दु के प्रमुख नाटक- वैदिकी हिंसा हिंसा न भवती (1873ई.), सत्यहरिश्चन्द्र (1875ई.), विषस्य विषमौषधम (1876ई.), नील देवी (1881ई.), अन्धेर नगरी (1881ई.), प्रेम जोगिनी (1874ई.) आदि।
अंधायुग (1955ई.) धर्मवीर भारती का, सिंदूर की होली (1934 ई.) लक्ष्मीनारायण मिश्र का तथा एक और द्रोणाचार्य (1977ई.) शंकर शेष की नाट्य कृतियाँ हैं।

38. अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध के संबंध में निम्नलिखित सत्य कथन है:

(A) रसिकेश उपनाम से ब्रजभाषा की रचना की थी
(B) ठेठ हिन्दी का ठाठ नामक उपन्यास की रचना की थी
(C) अनद्य नामक गीतिनाट्य की रचना की थी
(D) मिलन नामक प्रबन्ध काव्य की रचना की थी
(E) रुक्मिनी परिचय नाटक की 1894 में रचना की थी
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल (A), (B), (E)
Solution:अयोध्य सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' के संबंध में सत्य कथन निम्नलिखित हैं-
1. रसिकेश उपनाम से ब्रजभाषा की रचना की थी।
2. ठेठ हिंदी का ठाठ नामक उपन्यास की रचना की थी।
3. रूक्मिनी परिचय नाटक की 1894 में रचना की थी।
• अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' को डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त ने आधुनिक काल का सूरदास कहा है।
• हरिऔध कृत 'प्रियप्रवास' को खड़ी बोली हिंदी का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। 'प्रियप्रवास' का सर्वप्रथम नाम 'ब्रजांगना विलाप' था। यह संपूर्ण काव्य संस्कृत के वर्णवृत्तों पर आधारित है।
• हरिऔध द्वारा ब्रजभाषा में रचित 'रसकलश' (1931 ई.) एक रीति ग्रंथ है।

39. 'आषाढ़ का एक दिन' नाटक में कौन सा कथन मल्लिका के द्वारा नहीं कहा गया है?

(A) इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय है।
(B) हमारा सौभाग्य होगा कि आप कुछ दिन इस प्रदेश में रह जाएँ
(C) मैंने सुना है। विश्वास नहीं होता, परन्तु होता भी है।
(D) नही; यह सत्य नहीं हो सकता। मेरा हृदय इसे स्वीकार नहीं करता।
(E) थक गया था। अब भी थका हूँ परन्तु वर्षा ने थकान कम कर दी है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल (A), (C), (E)
Solution:मोहन राकेश कृत 'आषाढ़ का एक दिन' नाटक में निम्नलिखित कथन मल्लिका द्वारा नहीं कहा गया है-
• इस सौन्दर्य के सामने जीवन की सब सुविधाएँ हेय है। प्रियंगु मंजरी
• मैंने सुना है। विश्वास नहीं होता, परन्तु होता भी है। - मातुल
• थक गया था। अब भी थका हूँ परन्तु वर्षा ने थकान कम कर दी है। - कालिदास
मल्लिका के कथन -
1.हमारा सौभाग्य होगा कि आप कुछ दिन इस प्रदेश में रह जाएँ।
2. नहीं; यह सत्य नहीं हो सकता। मेरा हृदय इसे स्वीकार नहीं करता।
3. थके हो, बैठ जाओ। आँखों से लगता है, तुम अब भी स्वस्थ नहीं हो।
4. उज्जयिनी के व्यवसायी कभी-कभी इस मार्ग से होकर भी जाते हैं।
• मोहन राकेश द्वारा रचित 'आषाढ़ का एक दिन' (1958ई.) महाकवि कालिदास के निजी जीवन पर केन्द्रित है, जो 100ई. पू. से 500ई. के अनुमानित काल में व्यतीत हुआ।
• इस नाटक का शीर्षक कालिदास की कृति मेघदूतम् की शुरुआती पंक्तियों से लिया गया है। मोहन राकेश की प्रमुख कृतियाँ - आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे, पैर तले की जमीन (अधूरा) सिपाही की माँ, प्यालियाँ टूटती हैं। रात बीतने तक, छतरियाँ, शायद आदि।

40. अज्ञेय ने किस कहानीकार के व्यक्तित्व को नैसर्गिक नहीं, अर्जित व्यक्तित्व का उदाहरण माना है?

Correct Answer: (b) जैनेंद्र
Solution:अज्ञेय ने कहानीकार 'जैनेद्र' के व्यक्तित्व को नैसर्गिक नहीं, अर्जित व्यक्तित्व का उदाहरण माना है।
• जैनेन्द्र के महत्वपूर्ण कहानी संग्रह- फाँसी (1929ई.), वातायन (1931ई.), दो चिड़िया (1934 ई.), एक रात (1935ई.), नीलम देश की राजकन्या (1938 ई.), ध्रुवयात्रा (1944ई.), पाजेब (1948 ई.)।
• भीष्म साहनी के महत्वपूर्ण कहानी संग्रह-  भाग्य रेखा (1953 ई.), पहला पाठ (1957ई.), भटकती राख (1966 ई.), पटरियाँ (1973ई.), वाड्चू (1978 ई.), शोभायात्रा (1981 ई.), निशाचर (1983 ई.), पाली (1989ई.), डायन (1998 ई.)।
• शेखर जोशी की प्रमुख कृतियाँ-  कोसी का घटवार (1958ई.), साथ के लोग (1978ई.) हलवाहा (1981 ई.), मेरा पहाड़ (1989 ई.), नौरंगी बीमार है (1990ई.) आदि ।