NTA यू.जी.सी. नेट/ जेआरएफ पुनर्परीक्षा,जून 2024 (हिन्दी)

Total Questions: 100

81. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची-I (कथन)सूची-II (पात्र)
A.मुझे आश्चर्य होता है कि भट्ट किस प्रकार सम्मोहन का शिकार हो गयाI.निपुणिका
B.तुमने मुझे क्षमा कर दिया है न, भट्ट! तुम महान हो, मैं तुच्छ हूँ, तुमने अवश्य क्षमा कर दिया होगाII.महामाया
C.महाराज आप इस जम्बूद्वीप के सर्व प्रधान चक्रवर्ती राजा हैं।III.भट्टिनी
D.कह देना, भद्र कि देवपुत्र तुवर मिलिन्द की कन्या आपको प्रणाम कहती है।IV.सुगतभद्र

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) (A)-(II), (B)-(I), (C)-(IV), (D)-(III)
Solution:सूची-I तथा सूची-II का सही मिलान निम्न है।
सूची-I (कथन)सूची-II (पात्र)
मुझे आश्चर्य होता है कि भट्ट किस प्रकार सम्मोहन का शिकार हो गयामहामाया
तुमने मुझे क्षमा कर दिया है न, भट्ट! तुम महान हो, मैं तुच्छ हूँ, तुमने अवश्य क्षमा कर दिया होगानिपुणिका
महाराज आप इस जम्बूद्वीप के सर्व प्रधान चक्रवर्ती राजा हैं।सुगतभद्र
कह देना, भद्र कि देवपुत्र तुवर मिलिन्द की कन्या आपको प्रणाम कहती है।भट्टिनी

बाणभट्ट की आत्मकथा (1946 ई.) उपन्यास के लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी है। इस उपन्यास में प्रेम का उदात्तीकरण एवं हर्ष कालीन सामाजिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का चित्रण किया गया है। इनके द्वारा लिखित अन्य उपन्यास हैं- चारुचन्द्र लेख, पुनर्नवा तथा अनामदास का पोथा इत्यादि

82. 'रस्मोरिवाज भाखा का दुनिया से उठ गया' यह कथन किसका है?

Correct Answer: (c) सदासुख लाल 'नियाज'
Solution:'रस्मोरिवाज भाखा का दुनिया से उठ गया' यह कथन सदासुख लाल 'नियाज' का है। मुंशी सदासुखलाल नियाज ने खड़ी बोली में 'सुखसागर' की रचना 'विष्णु पुराण' के आधार पर किया गया है। खड़ी बोली गद्य को एक साथ बढ़ाने वाले चार महानुभाव हुए हैं- 1. मुंशी सदासुख लाल नियाज, 2.सैयद इंशा अल्ला खां 3. लल्लूलाल तथा 4. सदल मिश्र मुंशी सदासुखलाल तथा इंशाअल्ला खां इन दोनों का संबंध फोर्ट विलियम कॉलेज से नहीं था।

83. 'पेरि प्सुस एक असाधारण लेख है।' लॉजाइनस के संबंध में यह किस विद्वान का अभिमत है:

Correct Answer: (d) विमसैट एवं क्लींथ बुक्स
Solution:पेरिहुप्सुस एक असाधारण लेख है। लॉजाइनस के संबंध में यह अभिमत विमसैट एवं क्लींथ ब्रुक्स का है। पेरि प्युस' नामक ग्रंथ की रचना लोजांइनस ने किया था। इस ग्रंथ का प्रथम बार प्रकाशन सन् 1954 ई. में इतावली विद्वान रोबेतेल्लो ने करवाया था। यह मूलतः भाषा शास्त्र का ग्रंथ है। पेरि प्सुस में सर्वत्र उत्तम पुरुष का प्रयोग किया गया है। लोजांइनस ने कहा है- "उदात्त महान आत्मा की प्रतिध्वनि है।

84. 'राग दरबारी' उपन्यास से उद्धृत इन पंक्तियों को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

(A) बवासीर के चार आदम-कद अक्षर चिल्लाकर कह रहे थे कि यहाँ पेचिश का युग समाप्त हो रहा है।
(B) कभी-कभी जीतनेवाला भी इन्सानियत का प्रयोग करता था। वह कहता, 'क्या इसी का नाम इन्सानियत है?
(C) कहा तो, घास खोद रहा हूँ। इसी को अंग्रेजी में रिसर्च कहते हैं।
(D) रंगनाथ ने कहा, "वे दफ्तरवाले बड़े शरारती हैं। कैसी कैसी गलतियाँ निकालते हैं।"
(E) पिताजी गीता की बात कर रहे हैं, रुप्पन बाबू ने सोचा, अब देखें यह दारोगा बचकर कहाँ जाता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) (C), (A), (D), (B), (E)
Solution:रागदरबारी उपन्यास में उद्धृत पंक्तियों का पहले से बाद का व्यवस्थित क्रम निम्न है -
1. कहा तो, घास खोद रहा हूँ। इसी को अंग्रेजी में रिसर्च कहते हैं।
2. बवासीर के चार आदम कद अक्षर चिल्लाकर कह रहे थे कि यहाँ पेचिस का युग समाप्त हो गया है।
3. रंगनाथ ने कहा, वे दफ्तर वाले बडे शरारती है। कैसी कैसी गलतियां निकालते हैं।
4. कभी-कभी जीतने वाला इन्सानियत का प्रयोग करता था। वह कहता, 'क्या इसी का नाम इन्सानियत है?
5. पिता जी गीता की बात कर रहे हैं। रूपत्न बाबू ने सोचा, अब देखें यह दरोगा बचकर कहाँ जाता है।
रागदरबारी (1968) उपन्यास के लेखक श्रीलाल शुक्ल हैं। इनके द्वारा रचित अन्य उपन्यास ग्रंथ हैं- सूनी घाटी का सूरज, अज्ञातवास, आदमी का जहर, सीमाएं टूटती हैं, मकान, पहला पड़ाव, विश्रामपुर का संत, यह घर मेरा नहीं, अंगद का पांव इत्यादि ।

85. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए :

सूची-I (पुस्तक)सूची-II (रचनाकार)
A.सैद्धान्तिक भाषा विज्ञानI.पी. डी. गुणे
B.तुलनात्मक भाषा विज्ञानII.गोलोक बिहारी धल
C.ध्वनि विज्ञानIII.नोअम चोम्स्की
D.वाक्यविन्यास का सैद्धान्तिक पक्षIV.जोन लियोन्स

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) (A)-(IV), (B)-(I), (C)-(II), (D)-(III)
Solution:सूची - I तथा सूची -II का सही मिलान निम्न है-
सूची-I (पुस्तक)सूची-II (रचनाकार)
सैद्धान्तिक भाषा विज्ञानजोन लियोन्स
तुलनात्मक भाषा विज्ञानपी. डी. गुणे
ध्वनि विज्ञानगोलोक बिहारी धल
वाक्य विन्यास का सैद्धान्तिक पक्षनोअम चोमस्की

86. अर्थालंकार के संदर्भ में निम्नलिखित में से असत्य कथन/कथनों की पहचान कीजिए :

(A) जहाँ उपमेय का कार्य उपमान से कराया जाये, वहाँ परिणाम अंलकार होता है।
(B) जहाँ एक व्यक्ति अथवा वस्तु का गुण या तात्पर्यभेद से अनेक रूपों या प्रकारों में कथन किया जाय, वहाँ उल्लेख अलंकार होता है।
(C) काव्यलिंग अलंकार में किसी वास्तविक बात को छिपाकर और उसका निषेध कर कोई सत्य या असत्य बात कही जाती है।
(D) जहाँ अप्रस्तुत का कथन करके प्रस्तुत का बोध कराया जाये, वहाँ अन्योक्ति अंलकार होता है।
(E) जहाँ उपमेय और उपमान सम्बन्धी दो वाक्यों की धर्म-भिन्नता पर भी बिम्ब प्रतिबिम्ब से समानता हो, वहाँ, उदाहरण अलंकार माना जाता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल (C) और (E)
Solution:काव्यलिंग अलंकार में किसी वास्तविक बात को छिपाकर और उसका निषेधकर कोई सत्य या असत्य बात कही जाती है। यह कथन अर्थालंकार के संबंध में असंगत है। जहाँ उपमेय और उपमान संबन्धी दो वाक्यों की धर्म-भिन्नता पर भी बिम्ब प्रतिबिम्ब से समानता हो, वहाँ उदाहरण अलंकार माना जाता है। यह कथन भी अर्थालंकार के सन्दर्भ में असत्य हैं। अर्थालंकार के संदर्भ में सत्य कथन
1. जहाँ उपमेय का कार्य उपमान से कराया जाये, वहाँ परिणाम अलंकार होता है।
2. जहाँ एक व्यक्ति अथवा वस्तु का गुण या तात्पर्य भेद से अनेक| रूपों या प्रकारों में कथन किया जाय, वहाँ उल्लेख अलंकार होता है।
3. जहाँ अप्रस्तुत का कथन करके प्रस्तुत का बोध कराया जाये, वहाँ अन्योक्ति अलंकार होता है।
4. अर्थालंकार में किसी शब्द-विशेष के कारण चमत्कार नहीं रहता, वरन् उनके स्थान पर यदि समानार्थी दूसरा शब्द रख दिया जाय, तो भी अंलकार बना रहेगा, क्योंकि यह चमत्कार अर्थगत होता है।

87. अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' कृत 'प्रियप्रवास का प्रकाशन वर्ष है :

Correct Answer: (d) 1914
Solution:अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' कृत प्रियप्रवास का प्रकाशन वर्ष 1914 ई. है। 'प्रियप्रवास' को खड़ी बोली हिंदी का प्रथम महाकाव्य माना जाता है। प्रियप्रवास का सर्वप्रथम नाम ब्रजांगना विलाप था। यह सम्पूर्ण काव्य संस्कृत के वर्ण वृत्तों पर आधारित है। हरिऔध ने तीन प्रबंध काव्य लिखें- प्रिय प्रवास (1914 ई. - 17 सर्ग), पारिजात (1937 ई. 15 सर्ग), वैदेही वनवास (1940 ई. 18 सर्ग)। हरिऔध कृत ब्रजभाषा में रचित 'रसकलश' (1931 ई.) एक रीतिग्रंथ है।
हरिऔध को कवि सम्राट कहा जाता है तथा प्रियप्रवास पर इन्हे मंगला प्रसाद पारितोषिक प्रदान किया गया था।

88. 'धुवस्वामिनी' नाटक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन असत्यः

(A) यह प्रसाद की अंतिम और श्रेष्ठ नाट्य कृति है।
(B) इस नाटक में अनेक स्थलों पर अर्धवाक्यों की योजना है जो नाटक में सौंदर्य और गहरे अर्थ की सृष्टि करती है।
(C) इसका कथानक गुप्तकाल से संबद्ध और शोध द्वारा इतिहास सम्मत है।
(D) रंगमंच की दृष्टि से यह नाटक चार अंको का है।
(E) ध्रुवस्वामिनी की भाषा में वीरांगना की ओजस्विता नहीं है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल (D) और (E)
Solution:रंगमंच की दृष्टि से यह नाटक चार अंको का है तथा ध्रुवस्वामिनी की भाषा में वीरांगना की ओजस्विता नहीं है। यह दोनों कथन ध्रुवस्वामिनी नाटक के संबंध में असत्य हैं।
जयशंकर प्रसाद कृत ध्रुवस्वामिनी नाटक के संबंध में सत्य कथन -
1.यह प्रसाद की अंतिम और श्रेष्ठ नाट्य कृति है।
2. इस नाटक में अनेक स्थलों पर अर्धवाक्यों की योजना है जो नाटक में सौन्दर्य और गहरे अर्थ की सृष्टि करती है।
3.  इसका कथानक गुप्तकाल से संबद्ध और शोध द्वारा इतिहास सम्मत है।
ध्रुवस्वामिनी नाटक 1933 ई. में प्रकाशित हुआ। नाटक विशाख के 'देवी चन्द्रगुप्त' के आधार पर लिखा गया है। ध्रुवस्वामिनी नाटक से समस्या नाटक का प्रर्वतन माना जाता है। इसमें अनमेल विवाह, तलाक एवं पुर्नविवाह की समस्या को उठाया गया है ।
जयशंकर प्रसाद के अन्य नाटक- सज्जन (1910ई.) कल्याणी | परिणय (1912ई.), करुणालय (1912 ई.), राज्यश्री (1915 ई.), विशाख (1921ई.), अजातशत्रु (1922ई.), जनमेजय का नागयज्ञ (1926 ई.), कामना (1927ई.), स्कन्दगुप्त (1928ई.), एक घूँट (1930ई.), चन्द्रगुप्त (1931ई.) आदि हैं।

89. देवनागरी लिपि सुधार के संबंध में घटित घटनाओं को पहले से बाद के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

(A) बालगंगाधर तिलक द्वारा 190 टाइपों का फाँट तैयार किया गया।
(B) उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'लिपि सुधार परिषद' का गठन किया गया।
(C) हिन्दी साहित्य सम्मेलन के इन्दौर अधिवेशन में नागरी लिपि सुधार समिति का गठन किया गया।
(D) आचार्य नरेन्द्र देव की अध्यक्षता में नागरी लिपि सुधार समिति का निर्माण।
(E) नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा नागरी लिपि में सुधार हेतु समिति का गठन।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) (A), (C), (E), (D), (B)
Solution:देवनागरी लिपि सुधार के संबंध में घटित घटनाओं का पहले से बाद का क्रम इस प्रकार है-
1. सर्वप्रथम बालगंगाधर तिलक ने सन् 1904 ई. में अपने पत्र केसरी के लिए 1926 टाइपों की छटाई करके 190 टाइपों का एक फाँट (जिसे तिलक फाँट भी कहते हैं) बनाकर देवनागरी लिपि सुधार का आरम्भ किया।
2. हिंदी साहित्य सम्मेलन के इन्दौर के 24वें अधिवेशन में सन् 1935 ई. में महात्मा गाँधी के सभापतित्व में नागरी लिपि सुधार समिति का गठन किया गया ।
3. नागरी प्रचारिणी सभा ने सन् 1945 ई. में नागरी लिपि सुधार हेतु एक समिति का गठन किया
4. उत्तर प्रदेश सरकार ने 31 जुलाई, 1947ई. में आचार्य नरेद्र देव की अध्यक्षता में नागरी लिपि सुधार समिति का निर्माण किया।
5. उत्तर प्रदेश सरकार ने 28-29 नवम्बर सन् 1953 ई. में नागरी लिपि सुधार सम्बन्धी सुझावों पर विचार करने के लिए लखनऊ में लिपि सुधार-परिषद का गठन किया और विभिन्न राज्यों के मंत्रियों और विद्वानों को परिषद में आमंत्रित किया।
6. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित लिपि सुधार परिषद के बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने की थी।

90. 'नाममंजरी' किसकी रचना है?

Correct Answer: (b) नन्ददास
Solution:नाम मंजरी नदंदास की रचना है।
• अष्टछाप के कवियों में नंददास का स्थान काव्य सौष्ठव और भाषा की प्रांजलता में सूरदास के बाद है।
• नंददास के प्रमुख ग्रंथ अनेकार्थ मंजरी, मानमंजरी, सुदामाचरित, रसमंजरी, रूपमंजरी, विरहमंजरी, प्रेमबारह खड़ी, श्यामसगाई, रूक्मिणीमंगल, भँवर गीत, रासपंचाध्यायी, सिद्धान्त पंचाध्यायी, दसमस्कंध भाषा आदि।
नोट:- नंददास की जितनी भी रचनाएँ प्रमुख इतिहास ग्रंथों में प्राप्त होती हैं, उनमें 'नाममंजरी' नाम से कोई भी रचना प्राप्त नहीं होती। इस प्रश्न में इसे 'मानमंजरी' मान सकते है।
• गोस्वामी विठ्ठलनाथ सन् 1565 ई. में चार वल्लभाचार्य के और चार अपने शिष्यों को मिलाकर अष्टछाप कवियों की स्थापना की।
• आचार्य रामचन्द्र शुल्क के अनुसार अष्टछाप कवियों का क्रमानुसार संक्षिप्त विवरण -
कवि जन्म-मृत्यु (ई.) गुरु जन्मस्थान 
सूरदास1478-1583वल्लभाचार्यसीही (उ.प्र.)
कुंभनदास1468-1583वल्लभाचार्यजमुनावती (उ.प्र.)
परमानंददास1493-वल्लभाचार्यकन्नौज (उ.प्र.)
कृष्णदास1496-1578वल्लभाचार्यचिलोतरा (गुजरात)
छीतस्वामी1515-1585विट्ठलनाथमथुरा (उ.प्र.)
गोविन्द स्वामी1505-1585विट्ठलनाथआंतरी (राजस्थान)
चतुर्भुजदास1530-1585विट्ठलनाथजमुनावती (उ.प्र.)
नंददास1533-1583विट्ठलनाथरामपुर (उ.प्र.)