प्रथम प्रकार के मानचित्रों में किसी यादृच्छक रंगों के अनुक्रम का चयन स्वेच्छा से करके विविध क्षेत्रों में दिखाया जाता है जिसे साधारण रंगीन मानचित्र कहते हैं। दूसरे प्रकार के कोरो क्रोमैटिक प्रकारों में, अंतर्राष्ट्रीय रंग योजना के मानक रंगों के प्रयोग से मानचित्र बनाया जाता है।
तीसरे प्रकार के मानचित्रों को परत आभा प्रणाली (लेयर टिंट मेथड) के प्रयोग से बनाया जाता है जहाँ एक ही रंग की एकाधिक घनत्व या छाया के प्रयोग से विविध विशेषताएँ उजागर की जाती हैं।
काले रंग की अलग छायाओं की मदद से तत्वों के वितरण को चिन्हांकित करने की विधि को वितरण मानचित्र में प्रयोग किया जाता है। यह विधि रंगारेख विधि के समान है। चित्रों द्वारा वितरण मानचित्र में तत्वों के वितरण के प्रदर्शन की विधि को सचित्र विधि कहते हैं।
भारत के विभिन्न खनिजों के प्रमुख खनन केन्द्रों को दर्शाने वाला मानचित्र का_____उदाहरण है।