NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ पुनर्परीक्षा, जून 2024 भूगोल

Total Questions: 100

41. भारत के निम्नलिखित वनावरण प्रकारों को उनके क्षेत्रीय विस्तार के अवरोही क्रम में व्यवस्थित करें।

A. उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन
B. उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन
C. उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन
D. उष्णकटिबंधीय अर्द्ध सदाबहार वन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) B, C, D, A
Solution:

भारत में पाए जाने वाले वनावरण प्रकारों का उनके क्षेत्रीय विस्तार का सही अवरोही क्रम निम्नलिखित है-
उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन उष्णकटिबंधीय अर्द्ध-सदाबहार वन उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन ।

वन समूहवनावरण प्रतिशत में (%)
उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन40.86
उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती वन17.65
उष्णकटिबंधीय अर्द्ध सदाबहार वन9.27
उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन2.61

42. शेफर हार्टशोर्न वाद-विवाद के बारे में सही कथनों की पहचान करें

A. हार्टशोर्न के लिए भूगोलवेत्ताओं ने जो बनाया है, वही भूगोल है जबकि शेफर ने भूगोल क्या होना चाहिए, पर कार्य किया।
B. शेफर ने क्षेत्रीय विभेदन के अध्ययन को बढ़ावा दिया जबकि हार्टशोर्न ने भूगोल में अपवादवाद का पक्ष लिया।
C. शेफर ने भूगोल में नियमों के निर्माण की वकालत की थी।
D. शेफर भूगोल में प्रत्यक्षवादी विधियों के अनुप्रयोग - के विरूद्ध थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल A और C
Solution:

हार्टशोर्न शेफर विवाद में हार्टशोर्न ने भूगोल का वह दृष्टिकोण रखा जिसे भूगोलवेत्ताओं ने भूगोल को वास्तव में बनाया है जबकि शेफर ने यह बताने की कोशिश की, कि भूगोल को क्या और होना चाहिए। शेफर ने "भूगोल में अपवादवाद" पेपर का प्रकाशन किया

जबकि हार्टशोर्न ने क्षेत्रीय विभवन के अध्ययन को बढ़ावा दिया। शेफर महोदय ने भूगोल में नियमों के निर्माण की वकालत की। शेफर भूगोल में प्रत्यक्षवादी विधियों के अनुप्रयोग के विरुद्ध नही थे, बल्कि उसके समर्थक थे।

अतः कथन (A) और (C) सही है जबकि कथन (B) और (D) सही नहीं है, इसलिए विकल्प (b) सही है।

43. निम्नलिखित में से किस प्रावस्था में, एक प्रदत्त वासस्थान में पादप बीज अंकुरण और पादप विकास के माध्यम से नवनिर्मित अनावृत क्षेत्र में स्थापित होते हैं?

Correct Answer: (c) आस्थापन की प्रावस्था
Solution:

आस्थापन की प्रावस्था में, एक प्रदत्त वास स्थान में पादप बीज अंकुरण और पादप विकास के माध्यम से नवनिर्मित अनावृत क्षेत्र में स्थापित होते हैं।

किसी भी पारिस्थितिक तंत्र या आवास में वनस्पति के एक समुदाय के दूसरे समुदाय द्वारा प्रतिस्थापन को अनुक्रम (Succession) कहते हैं

तथा इस तरह के परिवर्तन (वनस्पति समुदाय के) के क्रम को क्रमक (Sere) कहते हैं। क्लीमेण्ट्स ने वनस्पति के अनुक्रमिक विकास में पाँच प्रवास्थाओं का उल्लेख किया है, जो निम्नलिखित हैं-

प्रावस्थानाम
प्रावस्था- Iविवस्त्रीकरण (Nudation)
प्रावस्था- IIप्रवास (Migration)
प्रावस्था- IIIआस्थापन (Ecesis)
प्रावस्था- IVप्रतिक्रिया (Reaction)
प्रावस्था- Vस्थिरीकरण (Stabilization)

अतः विकल्प (c) सही है।

44. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए

सूची-I (भाषा)सूची-II (भाषीय परिवार)
A.भीलीI.इंडो-आर्यन
B.गौंडी II.ऑस्ट्रो-एशियाटिक
C.खासी III.तिब्बतो बर्मि
D.लाहोली IV.द्रविडियन

नीचे दिए गए विकल्पों में से का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) A-I, B-IV, C-II, D-III
Solution:

सही सुमेलित युग्म इस प्रकार है

सूची-I (भाषा)सूची-II (भाषीय परिवार)
भीलीइंडो-आर्यन
गौंडी द्रविडियन 
खासी ऑस्ट्रो-एशियाटिक
लाहोली तिब्बतो-बर्मिस 

अतः विकल्प (d) सही सुमेलित है।

45. कृषि भूमि उपयोग के वॉन थ्यूनेन मॉडल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

Correct Answer: (d) क्षेत्र-III में, जैसे- जैसे दूरी बढ़ती है, पैदावार में परिणामतः बढ़ोतरी होती है।
Solution:

वॉन थ्यूनेन के अनुसार, केन्द्रीय नगर (बाजार) से क्षेत्र तृतीय में दूरी बढ़ने के साथ-साथ भूमि की उत्पादकता तथा शुद्ध लाभ में कमी होती जाती है जिसके परिणामस्वरूप भूमि उपयोग या शस्य स्वरूप में परिवर्तन होता जाता है।

इसमें किसानों को बाजार की जरूरतों का पूर्ण ज्ञान होता है। क्षेत्र पंचम में, भूमि का एक तिहाई हमेशा परती रखा जाता है। वॉन थ्यूनेन ने सर्वप्रथम 1826 ई. में कृषि के स्थानीकरण सिद्धांत का प्रतिपादन किया। वॉन थ्यूनेन के मॉडल के अनुसार विलग प्रदेश में केंद्रीय नगर के चारों ओर कृषि भूमि उपयोग की विभिन्न संकेन्द्रीय पेटियाँ पायी जाती हैं, जिनका क्रम नगर से बाहर की ओर निम्नवत् पाया जाता है-

प्रथम पेटी - यह पेटी नगर से संलग्न और सबसे निकट होती है। इसमें फल, शाक सब्जी तथा दुग्ध का उत्पादन किया जाता है।
दूसरी पेटी - इसमें ईंधन की लकड़ी का उत्पादन किया जाता है।
तीसरी पेटी- इस पेटी में गहन कृषि द्वारा अन्न का उत्पादन किया जाता है और इसमें किसी भी भूखण्ड को परती नहीं छोड़ा जाता है।
चौथी पेटी- इस पेटी में भी अन्न की खेती की जाती है किंतु इसमें कुछ भूमि को परती छोड़ा जाती है और कुछ भूमि पर चारागाह भी पाये जाते हैं।
पाँचवीं पेटी - इस पेटी में परती और चारागाह की अधिकता पायी जाती है तथा कुछ भूमि पर अन्न की खेती भी की जाती है। इस प्रकार इस पेटी में त्रिक्षेत्र (Three field) व्यवस्था पायी जाती है।
अत: (d) सही है।

46. काई-वर्ग परीक्षण के बारे में सत्य कथनों की पहचान करें।

A. यह एक मानदण्डनीय परीक्षण है।
B. शून्य परिकल्पना के अनुसार प्रेक्षित और प्रत्याशित आवृत्तियों के बीच अंतर महत्वपूर्ण नहीं है।
C. शून्य परिकल्पना की अस्वीकृति दर्शाती है कि प्रक्षित और प्रत्याशित आवृत्तियों के बीच अंतर वास्तविक है।
D. शून्य परिकल्पना अस्वीकृत करने के लिए तालिकाबद्ध मान, काई वर्ग के गणना किए गए मान से अधिक होनी चाहिए।
नींचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल B और C
Solution:

काई-वर्ग परीक्षण एक मानदण्डीय परीक्षण नहीं बल्कि यह एक सांख्यिकी परीक्षण है। शून्य परिकल्पना के अनुसार प्रेक्षित और प्रत्याशित आवृत्तियों के बीच अंतर महत्वपूर्ण नहीं होता है। शून्य परिकल्पना की अस्वीकृति दर्शाती है

कि प्रेक्षित और प्रत्याशित आवृत्तियों के बीच अंतर वास्तविक है। शून्य परिकल्पना अस्वीकृत करने के लिए तालिकाबद्ध मान, काई वर्ग के गणना किए गए मान से अधिक नहीं बल्कि कम होनी चाहिए।
अतः कथन (B) और (C) सही है जबकि कथन (A) और (D) गलत है, इसलिए विकल्प (a) सही है।

47. निम्नलिखित में से कौन सी विकास के केन्द्र परिधि मॉडल की विशेषता नहीं थी?

Correct Answer: (b) उपान्त क्षेत्र में वृद्धि पहले दृष्टिगोचर होती है।
Solution:

उपांत क्षेत्र में वृद्धि पहले दृष्टिगोचर होती है यह केन्द्रपरिधि मॉडल की विशेषता नहीं है जबकि संसाधनों और विकास का असमान वितरण, अन्तः क्षेत्र के मानवीय और भौतिक लाभ एवं कतिपय क्षेत्र, अन्य की तुलना में तेजी से विकसित होते है,

केन्द्रपरिधि मॉडल की विशेषताएँ है। अमेरिकी नियोजक एवं अर्थशास्त्री जे. फ्रीडमैन ने विकास ध्रुव की संकल्पना की भिन्न रूप में प्रयोग करते हुए सन् 1966 ई. में अपने “केन्द्र परिधि मॉडल” का प्रतिपादन किया। उन्होंने केन्द्र को ऐसे विकास केन्द्र के रूप में स्वीकार किया

जहाँ उद्योग सहित सभी महत्वपूर्ण आर्थिक क्रियाओं का संकेन्द्रण होता है और बाह्य क्षेत्र या परिधि को केन्द्र पर पुंजीभूत आर्थिक क्रियाओं पर आश्रित होना पड़ता है। इस प्रकार केन्द्र नगरीय केन्द्र का और परिधि उसके चतुर्दिक स्थित ग्रामीण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती है।
अतः विकल्प (b) सही है।

48. धरातल पर सड़क की चौड़ाई 60 फीट जबकि वायुचित्र में 2 इंच है। वायुचित्र की मापनी_______है।

Correct Answer: (b) 1:360
Solution:

धरातल पर सड़क की चौड़ाई = 60 फीट
वायु चित्र में चौडाई = 2 इंच
वायु चित्र की मापन = 2 इंच: 60 फीट
(चूंकि 1 फीट = 12 इंच)
अतः 2:60 × 12
⇒ या 1 : 360
अतः विकल्प (b) सही है।

49. पेंक के भूदृश्य विकास मॉडल के अब्स्तीजिण्डे इंट्विकलुंग चरण में______|

Correct Answer: (d) निरपेक्ष ऊँचाई और सापेक्ष उच्चावच घटती हैं।
Solution:

पेंक के भूदृश्य विकास मॉडल के अब्स्तीजिण्डे इंट्विकलुंग चरण में निरपेक्ष ऊँचाई और सापेक्ष उच्चावच घटती है। पॅक के अनुसार, “स्थल संरचना, प्रक्रम तथा अवस्था का प्रतिफल न होकर उत्थान की दर तथा अपरदन एवं पदार्थों के विस्थापन की दर के बीच अनुपात का प्रतिफल होता है।

" फेंक ने 'अवस्था' के स्थान पर 'इंट्विकलुंग' नामावली का प्रयोग किया जिसका तात्पर्य होता है 'विकास' (Development)। इस तरह फेंक ने तरुण, प्रौढ़ तथा जीर्ण आवस्थाओं के स्थान पर क्रमशः आफस्ती जिंडे इंट्विकलुंग (बढ़ती दर से विकास) नामावलियों का प्रयोग किया।

यह फेंक के अपरदन चक्र की प्रथम अवस्था है। इस समय निरपेक्ष एवं सापेक्षिक उच्चावच दोनों में तीव्र दर से वृद्धि होती है क्योंकि उत्थान की दर अपरदन की दर से अधिक होती है तथा घाटी के गहरा होने की दर जलविभाजकों के अवनयन की दर से अधिक होती है।

ग्लीखफर्मिंग इंट्विकलुंग (समान दर से विकास) फेंक के अपरदन चक्र के बीच की प्रावस्था है जिसके दौरान निरपेक्ष एवं सापेक्षिक उच्चावच में न तो वृद्धि होती है और न ही हास क्योंकि उत्थान एवं अपरदन तथा जलविभाजकों के अधःक्षय एवं घाटियों के गर्तन की दरे बराबर होती है।

आब्स्तीजिण्डे इंट्विकलुंग (घटती दर से विकास) पॅक के अपरदन की अंतिम प्रावस्था। जिसके दौरान निरपेक्ष एवं सापेक्षिक उच्चावच दोनों में तेजी से ह्रास होता है। अतः विकल्प (d) सही है।

50. ________ अवस्था को, एक छोटे बाजार कस्बे जिसमें परम्परागत मूल्यों की अभी भी मान्यता है जबकि आधुनिक सुविधाओं का उदय भी प्रारम्भ हो गया है, के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

Correct Answer: (a) पोलीस
Solution:

एक छोटे बाजार कस्बे जिसमें परम्परागत मूल्यों की अभी भी मान्यता है जबकि आधुनिक सुविधाओं का उदय भी प्रारंभ हो गया है, के रूप में परिभाषित किया जा सकता है,

नगरों की इस अवस्था को पोलीस की अवस्था कहते है। लेविस ममफोर्ड (1938) ने अपनी पुस्तक "The Culture of Cities" में नगरीय विकास की छः अवस्थाओं का वर्णन किया है जो निम्नलिखित है-

1. इओपोलिस (पूर्वनगर) यह मानव सभ्यता के विकास के प्रथम चरण की द्योतक है जिसमें कृषि सभ्यता के विकास के प्रथम चरण की द्योतक है जिसमें कृषि तथा पशुपालन जैसे प्राथमिक कार्यों का विकास प्रारंभ होता है।

2. पोलिस या नगर इस अवस्था में बड़े ग्रामों का रूपांतरण लघु नगर या कस्बा के रूप में होने लगता है और सम विभाजन के विकास में प्रत्येक परिवार विशिष्टीकरण प्राप्त कर लेता है जिसमें नगरीय कार्यों का प्रभुत्व बढ़ता जाता है।

3. मेट्रोपोलिस या महानगर इस अवस्था में कुछ नगर विशाल हो हो जाते है ओर अपने समीपवर्ती नगरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की सेवा करते है।

4. मेगालोपोलिस यह नगरीय विकास की चरम अवस्था का द्योतक है जिसमें व्यापार तथा समृद्धि में वृद्धि से नगर में मकानों तथा जनसंख्या का जमघट पाया जाता है।

5. टायरेनोपोलिस या हासोन्मुख नगर नगर में उद्योग, व्यापार, सेवाओं आदि का हास होने लगता है, यह अवस्था नगर की अधोगति की सूचक है।

6. नेक्रोपोलिस या नष्टप्राय नगर- यह नगरीय ह्रास की अंतिम अवस्था है, जिसमें नगर नष्ट प्राय हो जाता है ओर उसका आर्थिक - सामाजिक महत्व लगभग समाप्त हो जाता है केवल उसका नाम ही शेष रहा जाता है। अतः विकल्प (a) सही है।