Solution:परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 53 A के अनुसार सम्यक अनुक्रम धारक, प्ररक्राम्य लिखत को पूर्ववती पक्षकारों के हक के किसी दोष से मुक्त रखता है, साथ ही, वह पूर्ववर्ती पक्षकारों को आपस में उपलब्ध बचावों से भी मुक्त रखता हैं, सम्यक अनुक्रम पारक, उस लिखत पर उत्तरदायी सभी पक्षकारों के खिलाफ उसकी पूरी रकम का भुगतान करा सकता है।