प्रकाश और प्रकाशिकी (भौतिक विज्ञान) (Part-IV)

Total Questions: 50

41. सौर भट्ठी में किस दर्पण का उपयोग किया जाता है? [RRB JE 29/05/2019 (Morning)]

Correct Answer: (a) अवतल दर्पण
Solution:
  • यह एकमात्र दर्पण है जो प्रकाश को एक ही केंद्र बिंदु की ओर परावर्तित करता है जो प्रभावी तापन में मदद करता है।
  • गोलाकार दर्पण जिसमें एक सुसंगत वक्र और एक स्थिर वक्रता त्रिज्या होती है।
  • गोलाकार दर्पण द्वारा बनाई गई प्रतिबिम्ब वास्तविक या आभासी हो सकता हैं। समतल दर्पण परावर्तक सतह समतल होता है।
  • कौन‑सा दर्पण और क्यों?
    • उपयोग किया जाने वाला दर्पण: अवतल दर्पण (Concave mirror)।
    • आकार: आमतौर पर परवलयाकार (parabolic) अवतल दर्पण/डिश ताकि समानांतर सूर्य किरणें एक ही फोकस पर सटीक रूप से एकत्र हों।
  • कार्य सिद्धांत
    • सूर्य से आने वाली किरणें लगभग समानांतर मानी जाती हैं।
    • अवतल दर्पण इन समानांतर किरणों को परावर्तित करके मुख्य फोकस (focus) पर अभिसरित कर देता है।
    • फोकस पर रखी भट्ठी/क्रूसिबल/कुकिंग पॉट पर अत्यधिक ऊर्जा एक छोटे क्षेत्र में केंद्रित हो जाती है
    • जिससे तापमान बहुत अधिक हो जाता है (कई डिजाइनों में 3000–3500 °C तक)।
  • व्यावहारिक डिजाइन बिंदु
    • दर्पण जितना बड़ा व्यास और जितना अधिक परावर्तक, उतनी अधिक ऊर्जा फोकस पर पहुँचेगी।
    • दर्पण को इस प्रकार उन्मुख किया जाता है कि वह दिन भर सूर्य की किरणों को ठीक से फोकस पर फेंके (ट्रैकिंग सिस्टम)।

42. एक आपतित किरण, एक समतल दर्पण की सतह के साथ 30° का कोण बनाती है। आपतन कोण ज्ञात कीजिए [RRB JE 29/05/2019 (Evening)]

Correct Answer: (a) 30°
Solution:
  • परावर्तन का पहला नियम कहता है कि आपतित किरण, परावर्तित किरण और दर्पण की सतह का अभिलंब, सभी एक ही तल में होते हैं।
  • परावर्तन का दूसरा नियम कहता है कि जब प्रकाश की किरण किसी सतह से परावर्तित होती है, तो आपतन कोण (0) परावर्तन कोण (8.) के बराबर होता है।
  • गणना
    • परिभाषा: आपतन कोण (i) वह कोण है जो आपतित किरण और सतह के अभिलंब (normal) के बीच बनता है।
    • सतह के साथ कोण = 30°
    • अभिलंब के साथ कोण = 90° - 30° = 60°
    • ∴ आपतन कोण i = 60°
  • चित्रण
    • आपतित किरण
    • ↘ 30° (सतह के साथ)
    •   |
    • | अभिलंब (90°)
    •   |
    • दर्पण सतह ─────────────────
  • परावर्तन के नियम
    • आपतन कोण = परावर्तन कोण → r = 60°
    • आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में
    • सभी एक ही बिंदु पर मिलते हैं
  • परावर्तित किरण
    • आपतन कोण i = 60°
    • परावर्तन कोण r = 60°
    • सतह के साथ कोण = 30° (दोनों ओर)
  • कुल विचलन कोण
    • आपतित और परावर्तित किरण के बीच कोण = 180° - 2i = 180° - 120° = 60°
  • महत्वपूर्ण नोट
    • सतह के साथ कोण हमेशा 90° से कम आपतन कोण देता है
    • सामान्य आपतन (i = 0°) → सतह के लंबवत = 90° सतह के साथ
    • चरम आपतन (i = 90°) → सतह के समांतर = 0° सतह के साथ

43. कांच की पट्टी के माध्यम से प्रकाश के अपवर्तन के बाद निर्गत किरण कैसी होगी? [RRB JE 30/05/2019 (Morning)]

Correct Answer: (a) निर्गत किरण, आपतित किरण से 90 डिग्री के कोण पर होती है।
Solution:
  • वायु-कांच अंतरापृष्ठ पर प्रकाश की किरण का झुकना वायु-कांच अंतरापृष्ठ पर प्रकाश की किरण के झुकने के बराबर और विपरीत होता है।
  • अतः आपतन कोण = उद्गम कोण। प्रकाश के अपवर्तन के नियम नियम 1: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और सामान्य किरण सभी एक ही तल पर होती हैं।
  • नियम 2 (स्नेल का नियम) sin i = माध्यम 1 के संबंध में माध्यम 2 का अपवर्तनांक (स्थिर) है।
  • आपतित किरण (ⅰ) - प्रकाश किरण जो माध्यम में यात्रा करती है।
  • अपवर्तित किरण (r) - प्रकाश किरण जो अपवर्तित होने के बाद मुड़ जाती है।
  • सामान्य किरण - वह प्रकाश किरण जो प्रतिच्छेदन बिंदु पर सतह के लंबवत होती है।
  • विस्तृत प्रक्रिया
  • चरण 1: पहली सतह पर (हवा → कांच)
    • वायु (μ=1) → कांच (μ=1.5)
    • आपतित किरण अभिलंब की ओर झुकती है।
    • आपतन कोण i > अपवर्तन कोण r₁
  • चरण 2: दूसरी सतह पर (कांच → हवा)
    • कांच → वायु
    • किरण अभिलंब से दूर झुकती है।
    • आपतन कोण r₂ = r₁ (समानांतर सतहें)
    • अपवर्तन कोण e = i (स्नेल का नियम)
  • चरण 3 परिणाम
    • दोनों सतहें समांतर → समग्र अपवर्तन शून्य
    • निर्गत किरण = आपतित किरण के समांतर (पार्श्विक विस्थापन के साथ)
  • चित्रण
    • आपतित किरण ──→ i ──→ कांच ──→ e ──→ निर्गत किरण (समांतर)
    • ↓ r₁     ↓ r₂
    • अभिलंब   अभिलंब
  • गणितीय प्रमाण
  • स्नेल का नियम:
    • हवा→कांच: sin i₁ = μ sin r₁
    • कांच→हवा: μ sin r₂ = sin i₂
    • r₁ = r₂ → i₁ = i₂ → समांतर किरणें
  • पार्श्विक विस्थापन (d)
    • d = t sin(i - r)/cos r
    • t = स्लैब की मोटाई
  • व्यावहारिक उपयोग
    • माइक्रोस्कोप स्लाइड: स्पष्ट प्रतिबिंब
    • ऑप्टिकल उपकरण: पथ सुधार
    • प्रयोगशाला: अपवर्तनांक मापन

44. एक गोलीय दर्पण और एक पतले गोलीय लेंस, दोनों की फोकल दूरी -10 सेमी है। दर्पण और लेंस के किर प्रकार के होने की संभावना है? [RRB JE 30/05/2019 (Morning)]

Correct Answer: (b) दोनों अवतल
Solution:
  • फोकस दूरी - यह लेंस से फोकस बिंदु तक की दूरी है।
  • यह अवतल लेंस (अपसारी) या उत्तल दर्पण (अभिसारी) के लिए हमेशा धनात्मक होती है
  • अभिसारी या अवतल दर्पण के लिए हमेशा ऋणात्मक होती है।
  • विस्तृत व्याख्या
  • गोलीय दर्पण (f = -10 cm)
    • अवतल दर्पण → मुख्य अक्ष समांतर किरणें → F पर अभिसरित
    • फोकस दर्पण के सामने → f = -ve (-10 cm)
    • उदाहरण: शेविंग मिरर, सौर कुकर।
  • पतला गोलीय लेंस (f = -10 cm)
    • अवतल लेंस → मुख्य अक्ष समांतर किरणें → F₂ की ओर प्रतीत (अपसारी)
    • फोकस लेंस के बाएँ → f = -ve (-10 cm)
  • उदाहरण:
    • मायोपिया चश्मा।
    • गणितीय पुष्टि
  • दर्पण सूत्र:
    • f = -10 cm → अवतल दर्पण सत्यापित।
  • लेंस सूत्र:
    • f = -10 cm → अवतल लेंस सत्यापित।
  • व्यावहारिक उदाहरण
  • अवतल दर्पण (f = -10 cm):
    • वस्तु F-P के बीच → बड़ा आभासी प्रतिबिंब (शेविंग मिरर)
  • अवतल लेंस (f = -10 cm):
    • दूर की वस्तु → F-O के बीच छोटा आभासी प्रतिबिंब (मायोपिया चश्मा)

45. अवतल दर्पण के पीछे आभासी, सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए, वस्तु को कहाँ रखा जाना चाहिए? [RRB JE 30/05/2019 (Afternoon)]

Correct Answer: (a) ध्रुव P और फोकस F के बीच
Solution:
  • वस्तु की विभिन्न स्थितियों के लिए अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का निर्माणः अनंत पर (प्रतिबिंब (छोटा) - फोकस F पर, वास्तविक और उल्टा)।
  • C से दूर (प्रतिबिंब (छोटी) - F और C के बीच, वास्तविक और उल्टा)। C पर (प्रतिबिंब (समान) - C पर, वास्तविक और उल्टा)।
  • C और F के मध्य (प्रतिबिंब (बड़ा) - C से दूर, वास्तविक और उल्टा)।
  • F पर (प्रतिबिंब (बड़ा) - अनंत पर, वास्तविक और उल्टा)। C - वक्रता केंद्र, F - फोकस, P- ध्रुव।
  • विस्तृत व्याख्या
    • वस्तु की स्थिति: ध्रुव P और फोकस F के बीच
    • P ── वस्तु ── F (वस्तु F के अंदर)
  • किरण आरेख
    • मुख्य अक्ष के समांतर किरण → F से होकर परावर्तित
    • F से गुजरने वाली किरण → मुख्य अक्ष के समांतर परावर्तित
    • ध्रुव से गुजरने वाली किरण → उसी पथ पर लौटती
    •    ↓
    • पीछे की ओर बढ़ाने पर → दर्पण के पीछे बड़ा आभासी प्रतिबिंब
  • गणितीय प्रमाण
    • दर्पण सूत्र: 1/v+1/u=1/f
    • उदाहरण: f = -10 cm, u = -7 cm (P-F के बीच)
    • 1/v + 1/(-7) = 1/(-10)
    • 1/v = -1/10 + 1/7 = (-7 + 10)/70 = +3/70
    • v = +70/3 cm = +23.33 cm (दर्पण के पीछे)
    • आवर्धन: m=-v/u=-23.33/(-7)=+3.33
    • धनात्मक m = सीधा, |m| > 1 = बड़ा।
  • व्यावहारिक उपयोग
    • शेविंग मिरर: चेहरे का बड़ा स्पष्ट प्रतिबिंब
    • मेकअप मिरर: बारीक विवरण दर्शन
    • दंत चिकित्सक: दांतों की जाँच

46. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है? [RRB JE 31/05/2019 (Morning)]

  1. वस्तु को हमेशा गोलीय दर्पण के बाईं ओर रखा जाता है।
  2. मुख्य अक्ष के समानांतर सभी दूरी दर्पण के ध्रुव से मापी जाती हैं।
  3. मूल बिंदु के दाईं ओर मापी गई सभी दूरी को ऋणात्मक लिया जाता है।
  4. मुख्य अक्ष के ऊपर और उसके लंबवत मापी जाने वाली सभी दूरियों को ऋणात्मक लिया जाता है।
Correct Answer: (a) 3
Solution:
  • गोलाकार दर्पण दो प्रकार के होते हैं : अवतल दर्पण और उत्तल दर्पण। अवतल दर्पण की फोकल दूरी सदैव ऋणात्मक होती है
  • उत्तल दर्पण की फोकस दूरी सदैव धनात्मक होती है, यदि वास्तविक प्रतिबिम्ब बनेगा तो दर्पण के सामने बनेगा, अतः ऋणात्मक होगा। यदि आभासी प्रतिबिम्ब बनता है
  • तो वह दर्पण के पीछे बनेगा, अतः उसे धनात्मक माना जायेगा।
  • आपके प्रश्न में विकल्प (options) नहीं दिए गए हैं। "निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?" पूछने के लिए कम से कम 2-4 कथन आवश्यक हैं।
  • पिछले संदर्भ के आधार पर संभावित प्रश्न
    • हमारे प्रकाशिकी conversation के आधार पर, यह MCQ हो सकता है। यहाँ सामान्य गलत कथन हैं:
  • प्रकाश परावर्तन/अपवर्तन से सम्बंधित सामान्यतः गलत कथन:
  • सही कथन:
    • अवतल दर्पण P-F के बीच → आभासी, बड़ा
    • प्रिज्म में वर्ण-विक्षेपण (न कि प्रकीर्णन)
    • अवतल लेंस → हमेशा आभासी
    • सूर्यास्त में लाल (नीला प्रकीर्णित)
  • कृपया पूर्ण प्रश्न दें
    • विकल्प सहित पूरा प्रश्न भेजें, जैसे:
    • निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
    • अवतल दर्पण बड़ा आभासी प्रतिबिंब बनाता है
    • प्रिज्म में श्वेत प्रकाश प्रकीर्णित होता है
    • सूर्योदय में लाल रंग दिखता है
    • ऊपर सभी सही हैं

47. अपवर्तन के बाद उत्तल लेंस के उसी तरफ आभासी आवर्धित सीधा प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए, वस्तु को कहाँ रखा जाना चाहिए? [RRB JE 31/05/2019 (Afternoon)]

Correct Answer: (b) फोकस F₁ और वक्रता केंद्र O के बीच
Solution:
  • उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिंब निर्माण जब वस्तु अनंत पर होती है
  • (फोकस F₂ पर, अत्यधिक छोटा, बिंदु आकार, वास्तविक और उलटी), वस्तु 2F₁ से परे (F₂ और 2F₂ के बीच, कम, वास्तविक और उलटी), वस्तु 2F₁ (पर) पर होती है
  • 2F₂, समान आकार, वास्तविक और उलटी), वस्तु F₁ और 2F₁ के बीच रखी गई है
  • (2F₂ से परे, बड़ा, वास्तविक और उलटी), वस्तु F₁ पर है
  • (अनंत पर, अत्यधिक बड़ा, वास्तविक और उल्टा), वस्तु F₁ और ऑप्टिकल के बीच है केंद्र (लेंस के उसी तरफ जिस पर वस्तु है
  • बड़ा, आभासी और सीधा) लेंस
    • सूत्रः 1/f= 1/v-1/u
  • उत्तल लेंस के नियम
    • वस्तु की स्थिति: लेंस और उसके फोकस F के बीच (0 < |u| < f)
  • किरण आरेख
    • मुख्य अक्ष समांतर किरण → F से होकर अपवर्तित
    • प्रकाशिक केंद्र O से → बिना विचलन सीधी
    •   ↓
    • पीछे बढ़ाने पर → लेंस के बाएँ बड़ा आभासी प्रतिबिंब
  • गणितीय प्रमाण
    • लेंस सूत्र: 1/v-1/u=1/f
    • उदाहरण: f = +10 cm, u = -5 cm (O-F के बीच)
    • 1/v - 1/(-5) = 1/10
    • 1/v + 1/5 = 1/10
    • 1/v = 1/10 - 1/5 = -1/10
    • v = -10 cm (लेंस के बाएँ, आभासी)
    • आवर्धन: m=v/u=(-10)/(-5)=+2
    • धनात्मक m = सीधा, m > 1 = बड़ा।
  • व्यावहारिक उपयोग
    • साधारण माइक्रोस्कोप: वस्तु को लेंस के बहुत पास
    • पढ़ने का कांच (magnifying glass)
    • ज्वेलरी जाँच: बारीक विवरण
    • उत्तल लेंस का एकमात्र आभासी बड़ा प्रतिबिं

48. यदि वस्तु, अनंत और अवतल लेंस के प्रकाशीय केंद्र O के बीच रखी जाती है, तो अपवर्तन के बाद प्रतिबिंब कैसा बनेगा? [RRB JE 31/05/2019 (Evening)]

Correct Answer: (b) आभासी और सीधा
Solution:
  • वस्तु की विभिन्न स्थितियों के लिए अवतल लेंस द्वारा बनाई गई प्रतिबिंब अनंत पर वस्तु फोकस पर प्रतिबिंब का रूप, अत्यधिक छोटा, आभासी और सीधा।
  • अनंत और ऑप्टिकल केंद्र के बीच वस्तु फोकस और ऑप्टिकल केंद्र के बीच प्रतिबिंब का निर्माण, क्षीण, आभासी और सीधा।
  • जब कोई वस्तु वक्रता केंद्र पर होती है, तो वास्तविक प्रतिबिंब वक्रता के दूसरे केंद्र पर बनती है
  • प्रतिबिंब का आकार वस्तु की तुलना में समान है। जब किसी वस्तु को फोकस पर रखा जाता है
  • तो एक वास्तविक प्रतिबिंब अनंत पर बनती है; प्रतिबिम्ब का आकार वस्तु की तुलना में बहुत बड़ा होता है।
  • अवतल लेंस की सामान्य विशेषता
    • अवतल लेंस एक अपसारी (diverging) लेंस है, इसलिए यह किसी भी वास्तविक वस्तु के लिए हमेशा:
    • आभासी (virtual)
    • सीधा (erect)
    • वस्तु से छोटा (diminished)
    • लेंस के उसी तरफ बनता है जिस तरफ वस्तु है।
  • इस विशेष स्थिति में प्रतिबिंब
    • वस्तु की स्थिति: अनंत और O के बीच कहीं भी (यानि सामान्य रूप से लेंस के सामने)।
    • प्रतिबिंब की स्थिति: फोकस F₁ और प्रकाशिक केंद्र O के बीच।
    • प्रकृति: आभासी, सीधा।
    • आकार: लघु (वस्तु से छोटा)।
  • कारण (किरणों की भाषा में)
    • मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरणें, लेंस से गुजरने के बाद ऐसी अपसारित होती हैं कि उन्हें पीछे बढ़ाने पर वे फोकस F₁ से आती प्रतीत होती हैं।
    • प्रकाशिक केंद्र O से गुजरने वाली किरण बिना विचलन सीधी जाती है।
    • इन दोनों अपसारित किरणों को पीछे की ओर बढ़ाने पर वे लेंस के सामने F₁ और O के बीच एक बिंदु पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं, वहीं आभासी सीधा छोटा प्रतिबिंब बनता है।
  • निष्कर्ष (MCQ शैली में)
    • यदि विकल्प ऐसे हों:
    • वास्तविक और आवर्धित
    • वास्तविक और उल्टा
    • आभासी और सीधा
    • वास्तविक और समान आकार का

49. श्वेत प्रकाश के सात रंगों में से कौन सा कांच के प्रिज़्म द्वारा प्रकाश के परिक्षेपण के बाद सबसे कम विचलित होता है? [RRB JE 01/06/2019 (Morning)]

Correct Answer: (d) लाल
Solution:
  • प्रकाश का प्रकीर्णन एक प्रिज्म से गुजरने पर श्वेत प्रकाश की किरण को उसके घटक को 7 रंगों (बैंगनी, आसमानी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल) में विभाजित करने की घटना है।
  • लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक तथा बैंगनी रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे कम होती है। प्रकाश की गति माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करती है।
  • विचलन कोण सूत्र
  • प्रिज्म विचलन:
    • A (प्रिज्म कोण) स्थिर → δ ∝ μ → लाल का δ न्यूनतम
  • प्रिज्म आरेख
    • श्वेत प्रकाश → प्रिज्म
    •   ↓
    • लाल ────────── (सबसे कम δ ≈ 1°)
    • नारंगी ────────
    • पीला ─────────
    • हरा ──────────
    • नीला ───────
    • जामुनी ────
    • बैंगनी ─── (सबसे अधिक δ ≈ 2°)
  • न्यूटन प्रयोग
    • न्यूटन ने 1666 में प्रिज्म प्रयोग से सिद्ध किया:
    • श्वेत प्रकाश → प्रिज्म → VIBGYOR (लाल सबसे कम, बैंगनी सबसे अधिक विचलित)
  • भौतिक कारण
  • लाल प्रकाश:
    • लंबी तरंगदैर्ध्य → कांच परमाणुओं से कम संनादन
    • उच्च चाल → कम अपवर्तन → न्यूनतम झुकाव
  • क्रम (विचलन बढ़ते क्रम में)
    • लाल < नारंगी < पीला < हरा < नीला < जामुनी < बैंगनी
  • व्यावहारिक प्रमाण
    • इंद्रधनुष: लाल सबसे बाहर (कम विचलन), बैंगनी सबसे अंदर (अधिक विचलन)

50. यदि एक गोलीय दर्पण द्वारा निर्मित प्रतिबिंब आभासी है, तो आवर्धन का मान ज्ञात कीजिए । [RRB JE 01/06/2019 (Morning)]

Correct Answer: (c) धनात्मक
Solution:
  • अवतल लेंस तथा उत्तल दर्पण आभासी प्रतिबिम्ब बनाते हैं। उनका आवर्धन धनात्मक है।
  • उत्तल लेंस और अवतल दर्पण वस्तु की स्थिति आधार पर वास्तविक और आभासी प्रतिबिंब बना सकते हैं
  • इसलिए, उनका आवर्धन धनात्मक या ऋणात्मक दोनों हो सकता है।
  • दर्पण के आवर्धन का सूत्र (m) = - v/u = h₁/h₀
  • जहाँ, v = प्रतिबिंब की दूरी, u = वस्तु की दूरी, h₁ = प्रतिबिंब की ऊंचाई, h₀ = वस्तु की ऊंचाई।
  • गोलीय दर्पण में आवर्धन सूत्र
    • m = -v/u
    • आभासी प्रतिबिंब → v = +ve (दर्पण के पीछे)
    • u = -ve (वस्तु दर्पण के सामने हमेशा)
    • m = -(+ve)/(-ve) = +ve
  • अवतल दर्पण (P-F के बीच)
    • u = -7 cm, f = -10 cm
    • 1/v + 1/(-7) = 1/(-10)
    • v = +23.33 cm (आभासी)
    • m = -(+23.33)/(-7) = +3.33 (बड़ा, सीधा)
  • उत्तल दर्पण (किसी भी स्थिति)
    • u = -15 cm, f = +10 cm
    • 1/v + 1/(-15) = 1/(+10)
    • v = +6 cm (आभासी)
    • m = -(+6)/(-15) = +0.4 (छोटा, सीधा)
  • समतल दर्पण
    • v = -u → m = -(-u)/u = +1 (समान आकार, सीधा)
  • महत्वपूर्ण नोट
    • आवर्धन का मान केवल चिह्न से निर्धारित नहीं होता
    • आकार |m| से पता चलता है:
    • |m| > 1 → बड़ा
    • |m| = 1 → समान
    • |m| < 1 → छोटा