Correct Answer: (c) हिमाचल प्रदेश और नगालैंड
Solution:- परिवार न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 2022 को जुलाई 2022 में संसद में पेश किया गया था।
- इस विधेयक का उद्देश्य परिवार न्यायालय अधिनियम, 1984 को हिमाचल प्रदेश और नागालैंड राज्य के कुछ जिलों तक विस्तारित करना था
- जहाँ केंद्र सरकार ने इन न्यायालयों को स्थापित करने की अधिसूचना नहीं दी थी। यह विधेयक इन राज्यों में अधिनियम के तहत स्थापित पारिवारिक न्यायालयों को वैधता प्रदान करता है।
- यह कदम उन दो राज्यों में संरचित न्यायिक ढांचे को एक समान केंद्रीय ढांचे के अनुरूप लाने के लिए उठाया गया है।
- पार्श्व प्रभाव:
- विधेयक प्रस्तावित करता है कि राज्य सरकारें पहले से स्थापित परिवार न्यायालयों के जजों की नियुक्ति, पोस्टिंग, प्रमोशन, आदि से संबंधित आदेश भी मान्य माने जाएँ; जिससे उन जजों के अधिकार क्षेत्र और कार्यवाही केंद्रीय अधिनियम के अनुरूप बने रहें।
- पूर्वव्यापी मान्यता:
- हिमाचल प्रदेश (15 फरवरी 2019 से) और नगालैंड (12 सितंबर 2008 से) में स्थापित परिवार न्यायालयों के लिए पूर्वव्यापी वैधानिक कवरेज सुनिश्चित किया जाना है।
- इससे दोनों राज्यों के परिवार न्यायालयों से जुड़ी पूर्व रिपोर्टेड कार्रवाइयों और नियुक्तियों की वैधानिक वैधता मिलती है।
- किन राज्यों में विस्तार के प्रावधान
- हिमाचल प्रदेश: 15 फरवरी 2019 से स्थापित परिवार न्यायालयों के लिए अधिनियम के दायरे का विस्तार (विधेयक के अनुसार) और पूर्वव्यापी मान्यता।
- नगालैंड: 12 सितंबर 2008 से स्थापित परिवार न्यायालयों के लिए अधिनियम के दायरे का विस्तार (विधेयक के अनुसार) और पूर्वव्यप मान्यता।
- प्रमुख वैधानिक बिंदु (संशोधन की प्रकृति)
- धारा 3ए:
- नया प्रावधान जोक्षेत्र-स्तरीय (state-level) परिवार न्यायालयों के क्षेत्राधिकार के विस्तार, नियुक्ति/पदस्थापन के आदेशों के मान्यता और अन्य संरचनात्मक पहलुओं को वैधानिक आधार देता है।
- इससे मध्यस्थता/सुलह पर जोर देने के उद्देश्य को बनाए रखने के साथ साथ राज्य स्तर के न्यायालयों को केंद्रीय अधिनियम के अनुरूप संचालित किया जा सके।
- क्षेत्राधिकार का अनुपालन:
- एक बार किसी क्षेत्र के लिए परिवार न्यायालय स्थापित हो जाने पर उसका क्षेत्राधिकार अनन्य माना जाएगा, ताकि अन्य न्यायाधिकरणों का вмешान कम हो और न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्टता बनी रहे। यह अवधारणा उसी प्रकार रहेगी जैसे केंद्रीय अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित है।
- राज्यों के ऐतिहासिक संदर्भ
- हिमाचल प्रदेश और नगालैंड में पहले से स्थापित परिवार न्यायालयों के कार्यों को केंद्र की अधिनियम-रेखा के हिसाब से वैधानिक रूप से मान्यता देना, ताकि उनके निर्णय, नियुक्तियाँ, ट्रांसफर आदि केंद्र-आधारित मानकों के अनुरूप हों। हिमाचल प्रदेश में 2019 से, नगालैंड में 2008 से परिवार न्यायालय अस्तित्व में हैं।
- इस प्रकार, यह विधेयक उन दो राज्यों के लिए “पूर्वव्यापी मान्यता” और “कार्य-क्षेत्र विस्तार” का औपचारिक अधिकार देता है ताकि कानूनी स्थिति स्पष्ट और एकरूप हो सके।
- तुलना (संक्षिप्त)
- उद्देश्य: क्षेत्रीय विस्तार और पूर्वव्यापी वैधानिक कवरेज बनाना।
- प्रभाव: जजों की नियुक्ति/स्थानांतरण आदि के आदेश मान्य; क्षेत्राधिकार अनन्य बनना।
- सीमाएं: केवल हिमाचल प्रदेश और नगालैंड के लिए प्रस्तावित; अन्य राज्यों के लिए समान विस्तार के लिए अलग प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।