ऐतिहासिक परिदृश्य (छत्तीसगढ़)

Total Questions: 50

11. सूची-1 (छत्तीसगढ़ के ब्रिटिश सुपरिटेंडेंट) को सूची-2 (उनके समय की प्रमुख घटनाओं) से सुमेलित कीजिए| [Chhattisgarh P.C.S. (Pre), 2017]

सूची-1सूची-2
A. कैप्टन एडमंड1. रतनपुर से रायपुर राजधानी परिवर्तन
B. कर्नल पी. वान्स एग्न्यू2. डोंगरगढ़ जमींदारी में विद्रोह
C. मि. सैंडिस3. ब्रिटिश संरक्षण की समाप्ति
D. मि. क्रॉफर्ड4. बस्तर और करौंद जमींदारियों के बीच विवाद

कोड :

ABCD
(a)2143
(b)2314
(c)2431
(d)2134
(e)2341
Correct Answer: (a)
Solution:छत्तीसगढ़ का प्रथम ब्रिटिश अधीक्षक कैप्टन एडमंड (1818 ई.) था। उसने कुछ समय तक ही शासन किया। उसके शासनकाल में छत्तीसगढ़ में डोंगरगढ़ के जमींदारों ने विद्रोह किया था। कर्नल पी. वान्स एग्न्यू (1818-1825 ई.) के शासनकाल में 1818 ई. में रतनपुर को हटाकर रायपुर को पहली बार ब्रिटिश अधीक्षक का मुख्यालय और छत्तीसगढ़ की राजधानी बनाया गया। कैप्टन सैंडिस (1825-1828 ई.) के शासनकाल में बस्तर और करौंद के जमींदारों के बीच विवाद हुआ। कैप्टन क्रॉफर्ड (1828-1829 ई.) ने भोंसले शासक द्वारा नियुक्त अधिकारी कृष्णाराव- अप्पा को 6 जून, 1930 को सत्ता का हस्तांतरण करके ब्रिटिश संरक्षण की समाप्ति कर दी।

12. नागपुर के भोंसले राज्य पर ब्रिटिश संरक्षण के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में नियुक्त प्रथम सुपरिटेंडेंट निम्नलिखित में से कौन था? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre), 2016]

Correct Answer: (a) कैप्टन एडमंड
Solution:कैप्टन एडमंड छत्तीसगढ़ के प्रथम अधीक्षक नियुक्त किए गए। नवंबर, 1817 में अंग्रेजों और भोंसले के बीच सीताबल्दी का युद्ध हुआ। इस युद्ध में अंग्रेजों की जीत हुई। इस प्रकार भोंसले राज्य का उत्तरी भाग तथा नागपुर के आस-पास का क्षेत्र ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया। मि. एडमंड के बाद मेजर पी. वांस एग्न्यू ने राजधानी रतनपुर से रायपुर स्थानांतरित कर दी।

13. बहादुर कलारिन की माची निम्न में से क्या है? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre), 2014]

Correct Answer: (a) प्राचीन स्मारक
Solution:बहादुर कलारिन की माची एक प्राचीन स्मारक है, जो बालोद जिले के पिपरी गांव में स्थित है। यह एक जीर्ण खंभों वाला मंडप है

14. कल्चुरि राजवंश की निम्नलिखित में से किस शाखा ने छत्तीसगढ़ में राजनीतिक सत्ता स्थापित की ? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre), 2014]

Correct Answer: (a) लहुरी
Solution:कल्चुरि नाम से भारत में दो राजवंश थे-एक मध्य एवं पश्चिमी भारत में जिसे 'चेदि' या हैह्य या उत्तरी कल्चुरि कहते हैं। दूसरा-दक्षिणी कल्चुरि था, जो वर्तमान कर्नाटक के क्षेत्रों पर शासन करता था। हैह्य राजवंश की एक शाखा-लहुरी (Lahuri) ने केशवदेव के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सत्ता स्थापित की थी, इनकी राजधानी रायपुर में थी।

15. बाबू रेवाराम के अनुसार रायपुर के निम्नलिखित कल्चुरि शासकों का उनके शासनकाल के क्रम के सही विकल्प का चयन करें। [Chhattisgarh P.C.S. (Pre), 2023]

(i) चामुंड सिंह देव

(ii) सोमदत्त

(iii) जैत सिंहदेव

(iv) मान सिंह देव

Correct Answer: (b) (iv) (iii) (ii) (i)
Solution:बाबू रेवाराम के अनुसार 15वीं शताब्दी से रतनपुर के कल्चुरि राजा जगन्नाथ सिंह के दो पुत्र हुए वीर सिंह देव और देवनाथ सिंह देव। ज्येष्ठ पुत्र वीर सिंह देव को रतनपुर और कनिष्ठ पुत्र देवनाथ सिंह देव को रायपुर का राज्य मिला। देवनाथ सिंह देव के पुत्र ने रायपुर की गद्दी संभाली। बाबू रेवाराम के अनुसार, रायपुर शाखा के कल्चुरियों का शासनकाल इस प्रकार रहा केशव (1407 - 1437 ई.), भुवनेश्वर देव (1438 ई.), मान सिंह देव (1463 ई.), संतोष सिंह देव (1478 ई.), सुरता सिंह देव (1498 ई.), सम्मान सिंह देव (1518 ई.), चामुंड सिंह देव (1528 ई.), बंशी सिंह देव (1563 ई.), घन सिंह देव (1582 ई.), जैत सिंह देव (1603 ई.) फते सिंह देव (1615 ई.), यादव सिंह देव (1633 ई.), सोमदत्त देव (1650 ई.), बलदेव सिंह देव (1663 ई.), उम्मेद सिंह देव (1685 ई.), बनवीर सिंह देव (1705 ई.), अमर सिंह (1741-1750 ई.), शिवराज सिंह।

16. कल्चुरि कालीन रतनपुर से शासित होने वाले गढ़ों के निम्नलिखित समूहों में से सही गढ़ों की समूह चुनिए? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre), 2023]

Correct Answer: (a) खरौद, लाफ़ा, छुरी, पंडरभट्ठा
Solution:कल्चुरि कालीन रतनपुर से शामिल होने वाले 18 गढ़ तथा रायपुर से शासित होने वाले 18 गढ़ थे। इस प्रकार इस क्षेत्र से 36 गढ़ थे, जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ कहलाए। रतनपुर से शासित 18 गढ़ थे-रतनपुर, विजयपुर, खरौद, मारो, कोटगढ़, नवागढ़, सोधी, औखर, पंडरभट्ठा, सेमरिया, चांपा, लाफा, छुरी, केंडा, मातिन, उपरोडा, पेंड्रा तथा कुरकुटी। रायपुर से शासित होने वाले 18 गढ़ थे- रायपुर, पाटन, सिमगा, सिंगारपुर, लवन, ओमेरा, दुर्ग, सारधा, सिरसा, मेंहदी, खल्लारी, सिरपुर, फिंगेश्वर, राजिम, सिंघनपुर, सुवरमार, टेंगनागढ़ और अकलतरा ।

17. रायपुर में रतनपुर के कल्चुरि शाखा का प्रथम शासक कौन था? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre), 2015]

Correct Answer: (b) रामचंद्र
Solution:रायपुर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, रतनपुर के कल्चुरि शाखा के शासक रामचंद्र ने 'रायपुर' नगर की स्थापना की तथा यहां के प्रथम शासक बने। यहीं यह भी उद्धृत है कि एक अन्य कहानी के अनुसार, रायपुर की स्थापना रामचंद्र के पुत्र ब्रह्मदेव ने की थी। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने अपनी संशोधित उत्तर-कुंजी में इस प्रश्न के उत्तर हेतु विकल्प (b) को स्वीकृत किया है।

18. रतनपुर के निम्नलिखित कलचुरि शासकों के शिलालेख अथवा ताम्रलेख को उनकी प्राप्ति के स्थान से सुमेलित कीजिए- [Chhattisgarh P.C.S. (Pre), 2022]

व्यक्तिस्थान
(A) पृथ्वीदेव प्रथम(i) अमोदा
(B) गोपाल देव(ii) पुजारी-पाली
(C) प्रताप मल्ल(iii) बलौगढ़
(D) बाहर साय(iv) कोसगई

कूटः

(A)(B)(C)(D)
(a)(i)(ii)(iii)(iv)
(b)(ii)(i)(iii)(iv)
(c)(iv)(i)(ii)(iii)
(d)(iv)(iii)(ii)(i)
Correct Answer: (a)
Solution:रत्नदेव की मृत्यु के पश्चात उसका पुत्र पृथ्वीदेव प्रथम 1065 ई. में रतनपुर का शासक हुआ। अमोदा से प्राप्त ताम्रपत्र अभिलेख में इसे 21 हजार ग्रामों का शासक कहा गया है। पृथ्वीदेव प्रथम ने 'सकल कोसलाधिपति' की उपाधि धारण की। गोपाल देव का शिलालेख सारंगढ़ के पास पुजारी-पाली से प्राप्त हुआ है, जिसमें राजा गोपाल देव को सात माताओं की पूजा करने के रूप में वर्णित किया गया है। प्रताप मल्ल का बलौगढ़ का ताम्रलेख रायपुर के पवती ग्राम से प्राप्त हुआ, जिसमें नागरी लिपि में संस्कृत के 30 श्लोक मिलते हैं। बाहर साय का कोसगई से शिलालेख प्राप्त हुआ है।

19. रतनपुर के कलचुरि शासक रत्नदेव के सिक्कों में निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता नहीं पाई जाती है? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre), 2022]

Correct Answer: (c) गजलक्ष्मी
Solution:रतनपुर के कल्चुरि शासक रत्नदेव के सिक्कों पर गजशार्दूल, सिंह तथा मानवाकृति पाई जाती है, जबकि पृथ्वी देव द्वितीय के सिक्कों पर गजलक्ष्मी की आकृति पाई जाती है।

20. रतनपुर के कल्चुरि शासक पृथ्वीदेव प्रथम के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre), 2019]

Correct Answer: (c) उसने 'सकल कोसलाधिपति' की उपाधि धारण की।
Solution:रतनपुर के कल्चुरि शासक पृथ्वीदेव प्रथम ने 1065-1095 ई. तक शासन किया। उन्होंने 'सकलकोसलाधिपति' की उपाधि धारण की थी।