प्रमुख वैज्ञानिक एवं आविस्कार (भौतिक विज्ञान)

Total Questions: 10

1. माइकल फैराडे नाम के एक अंग्रेज वैज्ञानिक ने किस वर्ष में प्रदीपक (इलुमिनेटिंग) गैस में बेंजीन की खोज की थी? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) 1825
Solution:
  • माइकल फैराडे नाम से एक अंग्रेज वैज्ञानिक ने 1825 ई. में प्रदीपक (इलुमिनेटिंग) गैस में बेंजीन की खोज की थी।
  • बेंजीन कमरे के तापमान पर रंगहीन या हल्के पीले रंग के तरल के रूप में होती है। यह अत्यधिक ज्वलनशील होती है।
  • खोज का वर्ष और संदर्भ
    • उन्होंने इसे "हाइड्रोजन का बाइकार्बुरेट" नाम दिया
    • जो उस समय के रासायनिक नामकरण की परंपरा के अनुरूप था।
    • यह खोज लंदन में "पोर्टेबल गैस" बनाने वाली कंपनी के संकट से जुड़ी थी
    • जहां व्हेल तेल या मछली तेल को गर्म भट्टी में डालकर गैस उत्पन्न की जाती और उसके अवशेष जमा हो जाते।
  • प्रक्रिया का विस्तार
    • फैराडे ने व्हेल तेल के उत्ताप अपघटन (डिस्ट्रक्टिव डिस्टिलेशन) से बनी संपीड़ित रोशनी वाली गैस के सिलेंडरों से तेलीय अवशेष एकत्र किए।
    • इन अवशेषों को बार-बार शुद्ध करने, गोठाने और उबालने पर एक रंगहीन, मीठी गंध वाला ज्वलनशील तरल प्राप्त हुआ
    • जिसे उन्होंने अपनी नोटबुक में "विलक्षण पदार्थ" कहा।
    • कंपनी को गैस की प्रकाशमानता घटने की शिकायतें मिल रही थीं
    • जो इन अवशेषों के कारण थीं
    • इसलिए फैराडे का यह अध्ययन व्यावहारिक समस्या का समाधान था।
  • बेंजीन के गुण और महत्व
    • बेंजीन एक रंगहीन, अत्यधिक ज्वलनशील हाइड्रोकार्बन (C6H6) है
    • जो कच्चे तेल का घटक है। फैराडे की खोज ने सेंद्रिय रसायनशास्त्र की नींव रखी
    • क्योंकि इसकी षटकोनी रिंग संरचना बाद में ऑगस्ट केकुले ने स्पष्ट की।
    • हालांकि, नाम "बेंजीन" बाद में जर्मन रसायनज्ञों ने दिया
    • 1833-34 में एइलहार्ट मिट्सचेरलिच ने बेंजोइक अम्ल से इसे बनाया
    • 1845 में एडब्ल्यू वॉन हॉफमैन ने कोयला टार से अलग किया।
  • फैराडे का वैज्ञानिक योगदान
    • फैराडे (1791-1867) विद्युत, चुंबकत्व और इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री के क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं
    • लेकिन उनके हाइड्रोकार्बन अनुसंधान ने रसायन को नई दिशा दी।
    • रॉयल इंस्टीट्यूशन में उनके प्रयोगों ने क्लोरीन, कार्बन डाइऑक्साइड जैसे गैसों का द्रवीकरण भी संभव बनाया।
    • आज बेंजीन रसायन उद्योग का आधार है
    • लेकिन इसकी विषाक्तता के कारण सावधानी बरती जाती है।

2. केशिका फीड फाउंटेन पेन का आविष्कार किसने किया था? [MTS (T-I) 12 अक्टूबर, 2021 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) एल.ई. वाटरमैन
Solution:
  • एल. ई. वाटरमैन, जिन्हें लुईस एडसन वाटरमैन के नाम से भी जाना जाता है
  • एक अमेरिकी आविष्कारक थे जिन्होंने फाउंटेन पेन का आविष्कार किया और वाटरमैन पेन कंपनी की स्थापना की।
  • आविष्कारक का परिचय
    • लुईस एडसन वाटरमैन का जन्म 18 नवंबर 1837 को न्यूयॉर्क के डेकेटर में हुआ था।
    • वे शुरुआत में स्टेनोग्राफी शिक्षक, किताब विक्रेता और बीमा एजेंट थे
    • जिसने उनकी उद्यमशीलता को प्रभावित किया।
    • 1901 में उनकी मृत्यु हुई, लेकिन उन्होंने वाटरमैन पेन कंपनी की स्थापना की।
  • आविष्कार की पृष्ठभूमि
    • 19वीं शताब्दी में फाउंटेन पेन मौजूद थे, लेकिन वे लीक होते थे
    • इंक का प्रवाह अनियंत्रित रहता था। वाटरमैन ने एक घटना से प्रेरित होकर (हालांकि यह कथा मानी जाती है) सुधार किया
    • जहां एक मीटिंग में पेन लीक हो गया।
    • उन्होंने अपने भाई के साथ प्रयोग कर केशिका आकर्षण (capillary action) पर आधारित फीड सिस्टम विकसित किया।
  • तकनीकी विवरण
    • केशिका फीड सिस्टम में निब के नीचे एक फीड होता है
    • जिसमें चैनल्स और एयर वेंट्स होते हैं। यह गुरुत्वाकर्षण से इंक को नियंत्रित रूप से निब तक पहुंचाता है
    • बिना लीक के। 12 फरवरी 1884 को अमेरिका में पेटेंट प्राप्त हुआ
    • जिसे "तीन फिशर फीड" कहा गया। 1899 में उन्होंने निब में ओवरफ्लो पॉकेट्स जोड़े
    • जब पेन लगभग खाली होता था तो बबल बनने की समस्या हल की।
  • प्रभाव और विरासत
    • इस आविष्कार ने डिप पेन और इंकवेल को अप्रचलित कर दिया।
    • वाटरमैन ने Ideal Pen Company और Waterman Pen Company शुरू की, जो आज भी प्रसिद्ध है।
    • यह आधुनिक फाउंटेन पेन की नींव बना।

3. निम्नलिखित में से किसने पहली बार विद्युत क्षेत्र की अवधारणा प्रस्तुत की थी? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) माइकल फैराडे
Solution:
  • विद्युत क्षेत्र (Electric field) की अवधारणा पहली बार माइकल फैराडे द्वारा प्रस्तुत की गई थी।
  • विद्युत क्षेत्र किसी आवेशित कण के चारों ओर के स्थान में निर्मित होता है
  • जिसके परिणामस्वरूप इस स्थान में रखे किसी अन्य आवेश पर बल लगता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • माइकल फैराडे ने 1830 के दशक में "lines of force" या बल रेखाओं का विचार दिया
    • जो विद्युत आवेशों के आसपास अदृश्य क्षेत्र की कल्पना करता था।
    • इस अवधारणा से पहले, विद्युत को केवल संपर्क बल के रूप में देखा जाता था
    • लेकिन फैराडे ने इसे स्थानिक क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया, जो बाद में गणितीय रूप से विकसित हुआ।
    • फैराडे का योगदान
    • फैराडे ने विद्युत और चुंबकीय प्रभावों को "क्षेत्र" के माध्यम से समझाया
    • जहां विद्युत क्षेत्र आवेशित वस्तुओं के बीच बल उत्पन्न करता है
    • बिना भौतिक संपर्क के। उनके प्रयोगो
    • जैसे इलेक्ट्रोस्टैटिक्स में तनाव पैटर्न, ने दिखाया कि क्षेत्र रेखाएं आवेशों से निकलती और समाप्त होती हैं।
    • फैराडे को "विद्युत के जनक" कहा जाता है
    • क्योंकि उन्होंने विद्युत चुम्बकीय प्रेरण और क्षेत्र सिद्धांत की नींव रखी
    • जो जेम्स क्लर्क मैक्सवेल ने बाद में समीकरणों में बदल दिया।
  • बाद के विकास
    • 1860 के दशक में मैक्सवेल ने फैराडे के क्षेत्र विचारों को गणितीय समीकरणों (मैक्सवेल के समीकरण) में बदल दिया
    • जहां विद्युत क्षेत्र E⃗
    • को बल प्रति आवेश के रूप में परिभाषित किया गया: E⃗=F⃗q. 19वीं शताब्दी के अंत तक
    • हेनरिक हर्ट्ज़ ने विद्युत चुम्बकीय तरंगों से इसकी प्रयोगात्मक पुष्टि की।
    • बेंजामिन फ्रैंकलिन ने 18वीं शताब्दी में धनात्मक-ऋणात्मक आवेश की अवधारणा दी, लेकिन क्षेत्र की कल्पना फैराडे की थी।

4. निम्नलिखित में से किसने अश्वशक्ति (horsepower) की एक इकाई स्थापित की, जो एक घोड़े द्वारा एक मिनट में 33,000 फुट-पाउंड काम (33,000 foot - Pound of work) करने के बराबर है? [MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) जेम्स वॉट
Solution:
  • जेम्स वॉट द्वारा अश्वशक्ति की एक इकाई स्थापित की गई
  • जो एक घोड़े द्वारा एक मिनट में 33000 फुट पाउंड कार्य के बराबर है। अश्वशक्ति, शक्ति मापन की इकाई है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • जेम्स वाट (1736-1819), एक स्कॉटिश आविष्कारक और यांत्रिक इंजीनियर, ने 18वीं शताब्दी के अंत में (लगभग 1783 में) इस इकाई को परिभाषित किया।
    • उन्होंने अपने सुधरे हुए भाप इंजनों की क्षमता को घोड़ों की शक्ति से तुलना करने के लिए यह मानक बनाया
    • खासकर कोयला खदानों और कारखानों में जहां घोड़े पंप चलाने के लिए इस्तेमाल होते थे
    • वाट ने ब्रूअरी (पिव घर) के घोड़ों के अवलोकन से गणना की कि एक मजबूत घोड़ा लगभग 32,400 फुट-पाउंड प्रति मिनट काम कर सकता है
    • लेकिन उन्होंने इसे व्यावहारिक बनाने के लिए 33,000 तक गोल किया ।
  • तकनीकी परिभाषा और गणना
    • एक अश्वशक्ति (imperial horsepower) को इस प्रकार परिभाषित किया गया
    • 1 hp=33,000 फुट-पाउंड प्रति मिनट, जो 550 फुट-पाउंड प्रति सेकंड या लगभग 745.7 वाट के बराबर है
    • यह इकाई घोड़े द्वारा 550 पाउंड वजन को 1 फुट ऊंचाई पर एक सेकंड में उठाने के बराबर है।
    • वाट के साथी मैथ्यू बोल्टन ने इसे व्यावसायिक रूप से प्रचारित किया
    • जिससे भाप इंजनों की बिक्री बढ़ी । मीट्रिक अश्वशक्ति थोड़ी भिन्न (735.5 वाट) है
    • लेकिन प्रश्न में निर्दिष्ट 33,000 फुट-पाउंड वाली इकाई वाट की ही है ।
  • महत्व और प्रभाव
    • इस इकाई ने औद्योगिक क्रांति को गति दी, क्योंकि इससे इंजनों की शक्ति को मानकीकृत तरीके से मापा जा सका।
    • वाट के सम्मान में शक्ति की SI इकाई "वाट" नामित की गई।
    • आज भी मोटर वाहनों और इंजनों में यह प्रचलित है
    • वाट ने न्यूकॉमन भाप इंजन में सुधार कर ऊर्जा हानि कम की और रोटरी गति प्रदान की, जो घोड़ों से कहीं बेहतर साबित हुई ।

5. किस भौतिक विज्ञानी को 'विकिरण परिघटना' में व्यापक शोध तथा पोलोनियम और रेडियम की खोज के लिए जाना जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) मैरी क्यूरी
Solution:
  • भौतिक विज्ञानी पियरे क्यूरी और मैरी क्यूरी को विकिरण परिघटना में व्यापक शोध तथा पोलोनियम और रेडियम की खोज के लिए जाना जाता है।
  • मैरी क्यूरी को कैंसर रोग के उपचार में उनके योगदान के लिए भी जाना जाता है।
  • प्रारंभिक जीवन
    •  रूस के कब्जे वाले पोलैंड में महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा सीमित होने के कारण उन्होंने रूप से पढ़ाई की और बाद में पेरिस पहुँचकर सोरबॉन विश्वविद्यालय में भौतिकी और गणित की डिग्री प्राप्त की।
    • 1895 में उन्होंने फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी पियरे क्यूरी से विवाह किया, जो उनके वैज्ञानिक साझीदार बने।
  • विकिरण शोध की शुरुआत
    • 1896 में हेनरी बेकरेल ने यूरेनियम लवणों से विकिरण उत्सर्जन की खोज
    • जिसे मैरी ने आगे बढ़ाया।
    • उन्होंने 'रेडियोधर्मिता' शब्द गढ़ा और पिचब्लेंड अयस्क में यूरेनियम से अधिक विकिरणकारी पदार्थों की खोज की।
    • उनके प्रयोगों ने स्थापित किया कि विकिरण परमाणु गुण है, न कि रासायनिक अभिक्रिया का परिणाम।
  • पोलोनियम और रेडियम की खोज
    • 1898 में क्यूरी दंपति ने पिचब्लेंड से पहले पोलोनियम (पोलैंड के सम्मान में नामित, परमाणु संख्या 84) अलग किया
    • फिर रेडियम (परमाणु संख्या 88)। शुद्धिकरण के लिए उन्होंने टन भर अयस्क प्रोसेस किया
    • जिसमें कठोर श्रमशाला स्थितियों में वर्षों लगे—मैरी ने व्यक्तिगत रूप से रसायनों को क्रिस्टलाइज किया।
    • 1902 तक उन्होंने 1 दशमलव भाग रेडियम प्राप्त किया, जो चमकदार सफेद पाउडर था।
  • उपलब्धियाँ और नोबेल पुरस्कार
    • 1903 में मैरी, पियरे और बेकरेल को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला—रेडियोधर्मिता शोध के लिए।
    • पियरे की 1906 में मृत्यु के बाद मैरी ने उनका पदभार संभाला।
    • 1911 में उन्होंने रसायन शास्त्र का नोबेल जीता—रेडियम के अलगाव और गुणों के लिए—एकमात्र व्यक्ति दो नोबेल विजेता।
    • उनके कार्य ने कैंसर उपचार (रेडियोथेरेपी) की नींव रखी।
  • विरासत और प्रभाव
    • मैरी क्यूरी की खोजों ने परमाणु भौतिकी, नाभिकीय ऊर्जा और चिकित्सा इमेजिंग को बदल दिया।
    • हालांकि विकिरण से प्रभावित होकर 1934 में उनकी मृत्यु हुई
    • उनकी बेटियाँ ईव और इरेन ने भी नोबेल जीते।
    • आज रेडियम और पोलोनियम चिकित्सा, उद्योग और अनुसंधान में उपयोग होते हैं।

6. लियोनार्डो द विंची द्वारा निर्मित हवा या गैस की आर्द्रता को मापने वाला प्रथम ज्ञात उपकरण कौन-सा है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) हाइग्रोमीटर
Solution:
  • लियोनार्डो द विंची द्वारा निर्मित हवा या गैस की आर्द्रता को मापने वाला प्रथम ज्ञात उपकरण हाइग्रोमीटर (आर्द्रताग्राही) है। आर्द्रताग्राही से वायुमंडल की सापेक्ष आर्द्रता मापी जाती है।
  • उपकरण का विवरण
    • यह पदार्थ आर्द्रता बढ़ने पर फैलता और शुष्क होने पर सिकुड़ता
    • जिससे एक स्केल पर संकेतक घूमकर आर्द्रता का स्तर दर्शाता।
    • हालांकि यह आधुनिक डिजिटल हाइग्रोमीटर जितना सटीक नहीं था
    • फिर भी यह मौसम विज्ञान में क्रांतिकारी कदम था।
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • लियोनार्डो द विंची (1452-1519), पुनर्जागरण काल के महान आविष्कारक
    • अपने नोटबुक कोडिसे अटलांटिकस में इस डिज़ाइन का स्केच बनाया।
    • यह 1480 के दशक का अनुमानित है
    • जब उन्होंने हवा की नमी को मापने की आवश्यकता महसूस की।
    • द विंची ने कई मौसम-संबंधी उपकरण डिज़ाइन किए
    • जैसे एनीमोमीटर (हवा की गति मापक), लेकिन हाइग्रोमीटर उनका आर्द्रता-केंद्रित पहला योगदान था।
  • कार्यप्रणाली और सीमाएँ
    • उपकरण में एक नमी-संवेदनशील स्ट्रिप को लीवर से जोड़ा जाता, जो सूजन पर यांत्रिक रूप से संतुलन बदलता।
    • आर्द्रता के स्तर को प्रतिशत या स्केल पर पढ़ा जा सकता था।
    • इसकी मुख्य सीमा थी अपरिष्कृत सटीकता
    • यह सापेक्ष आर्द्रता को ठीक से नहीं माप पाता था
    • पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होता। बाद में फ्रांसेस्को फोली ने 1600 के दशक में इसे सुधारा।
  • महत्व और विरासत
    • यह आविष्कार मौसम पूर्वानुमान, कृषि और नेविगेशन के लिए आधारभूत सिद्ध।
    • द विंची की डिज़ाइन ने बाद के वैज्ञानिकों जैसे रॉबर्ट हुक को प्रेरित किया।
    • आज के हाइग्रोमीटर (जैसे स्लिंग साइकोमीटर) उन्नत हैं
    • लेकिन द विंची का मॉडल प्रारंभिक नवाचार का प्रतीक है।

7. प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी विक्टर फ्रांज हेस निम्नलिखित में से किस खोज के लिए मशहूर हैं? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) ब्रह्मांडीय विकिरण
Solution:
  • प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी विक्टर फ्रांज हेस ब्रह्मांडीय विकिरण की खोज के लिए मशहूर हैं।
  • हेस को वर्ष 1936 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।
  • ब्रह्मांडीय विकिरण में उच्च ऊर्जा वाले कण होते हैं।
  • खोज का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • विक्टर फ्रांज हेस (1883-1964) एक ऑस्ट्रियाई भौतिक विज्ञानी थे
    • जिन्होंने प्रारंभ में यह माना गया था कि विकिरण धरती से उत्पन्न होता है।
    • 1911-1912 में उन्होंने कई बैलून उड़ानों के दौरान इलेक्ट्रोस्कोप का उपयोग कर विकिरण मापा
    • जहां ऊंचाई बढ़ने पर विकिरण बढ़ा। इस खोज ने विज्ञान जगत में क्रांति ला दी
    • क्योंकि इससे पहले वैज्ञानिकों को लगता था कि विकिरण केवल रेडियम जैसे तत्वों से आता है।
  • प्रयोग की विस्तृत प्रक्रिया
    • हेस ने 1912 में वियना से 5300 मीटर ऊंचाई तक बैलून उड़ाया।
    • इलेक्ट्रोस्कोप ने दिखाया कि सतह पर 10 डिवीजन/मिनट क्षय दर थी
    • जो ऊंचाई पर 30 तक पहुंच गई।
    • उन्होंने दिन-रात और धूप-छाया में परीक्षण कर सूर्य या धरातलीय स्रोत को खारिज किया।
    • बाद में, 1936 में कार्ल एंडरसन के साथ नोबेल भौतिकी पुरस्कार जीता।
  • कॉस्मिक किरणों का महत्व
    • ये उच्च-ऊर्जा कण (मुख्यतः प्रोटॉन) सुपरनोवा अवशेषों से आते हैं
    • जो पृथ्वी के वायुमंडल से टकराकर माध्यमिक किरणें बनाते हैं।
    • यह खोज कण भौतिकी, खगोल भौतिकी और अंतरिक्ष यात्रा के लिए आधार बनी।
    • हेस की खोज ने न्यूट्रिनो, पॉजिट्रॉन जैसी बाद की खोजों को प्रेरित किया।

8. कार्ल फ्रेडरिक गॉस (Carl Friedrich Gauss) और विल्हेम एडुअर्ड वेबर (Wilhelm Eduard Weber) ने दुनिया के पहले विद्युतचुंबकीय टेलीग्राफ का आविष्कार कब किया था? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) 1833
Solution:
  • कार्ल फ्रेडरिक गॉस (Carl Friedrich Gauss) और विल्हेम एडुअर्ड वेबर (Wilhelm Eduard Weber) ने 1833 ई
  • पहले विद्युतचुंबकीय टेलीग्राफ का आविष्कार किया था।
  • आविष्कार का पृष्ठभूमि
    • गॉस, एक प्रमुख गणितज्ञ और भौतिकीविद्, तथा वेबर, चुंबकत्व विशेषज्ञ, माइकल फैराडे
    • 1831 में विद्युतचुंबकीय प्रेरण की खोज से प्रेरित होकर इस पर काम शुरू किया।
    • उन्होंने लगभग 1.2 किलोमीटर लंबी तार लाइन बिछाई
    • जो वेधशाला से भौतिकी प्रयोगशाला तक जाती थी।
    • यह टेलीग्राफ चुंबकीय सुई और विद्युत धारा के माध्यम से सिग्नल भेजता था
    • जो लंबी दूरी पर संदेश प्रसारण का प्रारंभिक रूप था।
  • तकनीकी विवरण
    • यह प्रणाली दोहरी तार लाइन पर आधारित थी
    • जिसमें प्रेरण-चालित सिग्नल ट्रांसमीटर से धारा भेजी जाती थी।
    • सिग्नल प्राप्तकर्ता पर चुंबकीय सुई हिलती, जो कोडित संदेश दर्शाती।
    • यह व्यावसायिक टेलीग्राफ से पहले का प्रयोगात्मक मॉडल था, जिसने आधुनिक संचार की नींव रखी।
  • वैज्ञानिकों का योगदान
    • गॉस (1777-1855) संख्या सिद्धांत, खगोल विज्ञान और भू-चुंबकत्व में प्रसिद्ध थे
    • जबकि वेबर (1804-1891) ने चुंबकीय मापन इकाइयों (जैसे वेबर) का विकास किया।
    • उनका सहयोग चुंबकत्व अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए था
    • टेलीग्राफ इसके उप-उत्पाद के रूप में उभरा।
    • इसने बाद में मोर्स कोड जैसी प्रणालियों को प्रभावित किया।
  • ऐतिहासिक महत्व
    • यह आविष्कार दूरसंचार क्रांति का प्रारंभ बिंदु था
    • जिसने रेलवे, समाचार और युद्ध संचार को बदल दिया।
    • गोटिंगेन विश्वविद्यालय आज भी इसे संरक्षित रखता है
    • जो विद्युतचुंबकीय संचार के विकास को दर्शाता है।

9. इवेंजेलिस्टा टोरिसेली किस खोज के लिए प्रसिद्ध हैं? [CGL (T-I) 03 दिसंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) मरकरी बैरोमीटर के आविष्कार
Solution:
  • बैरोमीटर द्वारा वायुमंडल के दबाव को मापा जाता है।
  • इसकी खोज इवेंजेलिस्टा टोरिसेली (Evangelista Torricelli) ने की थी।
  • उन्होंने 1643 में यह प्रयोग किया, जिसने सिद्ध किया कि वायु का अपना भार होता है
  • निर्वात (vacuum) का अस्तित्व संभव है।
  • जीवन परिचय
    • टोरिसेली का जन्म 15 अक्टूबर 1608 को रोम, इटली में हुआ था।
    • वे गैलीलियो गैलीली के शिष्य थे और 1641 में फ्लोरेंस में गणितज्ञ व दार्शनिक के रूप में नियुक्त हुए।
    • मात्र 39 वर्ष की आयु में 25 अक्टूबर 1647 को उनका निधन हो गया
    • लेकिन उनके योगदान ने भौतिकी को नई दिशा दी।
  • बैरोमीटर का आविष्कार
    • टोरिसेली ने एक लंबी कांच की नली को पारे से भरकर उसके मुंह को बंद कर दिया
    • फिर उसे उलटकर पारे के एक बर्तन में डाल दिया। नली के ऊपरी भाग में पारा नीचे गिर गया
    • जिससे लगभग 76 सेंटीमीटर ऊंचाई का पारा स्तंभ बना रहा। इस अंतराल को "टोरिसेलियन निर्वात" कहा गया।
    • यह खोज सक्शन पंप की समस्या से उत्पन्न हुई
    • जहाँ पानी अधिकतम 10 मीटर ऊंचाई तक ही उठ पाता था।
  • वैज्ञानिक महत्व
    • इस प्रयोग ने सिद्ध किया कि वायुमंडल का दाब पारे के स्तंभ को संतुलित रखता है
    • जो मौसम पूर्वानुमान, ऊंचाईमापी (altimeter) और आधुनिक दाबमापी यंत्रों की नींव बना।
    • दाब की इकाई "टॉर" (torr) उनके नाम पर रखी गई
    • जहाँ 1 torr लगभग 1 mmHg होता है। इससे पहले लोग मानते थे
    • प्रकृति निर्वात से घृणा करती है ("नेचर एबोर ए वैक्यूअम")।
  • अन्य योगदान
    • टोरिसेली ने टोरिसेली प्रमेय (Torricelli's theorem) प्रतिपादित किया
    • जो द्रव के वेग से संबंधित है: एक छिद्र से बहने वाले द्रव का वेग 2gh
    • होता है, जहाँ h द्रव सतह से छिद्र की ऊंचाई है।
    • उन्होंने साइक्लॉइड वक्र का क्षेत्रफल व गुरुत्व केंद्र निकाला
    • जो कलन (calculus) के विकास में सहायक हुआ।
    • दूरबीन व सूक्ष्मदर्शी में भी सुधार किए।

10. निम्नलिखित में से कौन 17वीं शताब्दी में वैक्यूम पंप के आविष्कार के लिए प्रसिद्ध हैं, इन्होंने सबसे पहले अंतरिक्ष के पूर्ण निर्वात की अवधारणा दी थी, हवा के भार का मापन किया था और मौसम की भविष्यवाणी करने के लिए हवा के दाब का इस्तेमाल किया था? [CHSL (T-I) 08 जून, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) ओटो वॉन गुएरिके
Solution:
  • 17वीं शताब्दी में वैक्यूम पंप का आविष्कार जर्मन वैज्ञानिक ओटो वॉन गुएरिके ने किया था।
  • उन्होंने सबसे पहले अंतरिक्ष के पूर्ण निर्वात की अवधारणा दी थी
  • हवा के भार का मापन किया था और मौसम की भविष्यवाणी करने हेतु हवा के दाब का इस्तेमाल किया था।
  • वैक्यूम पंप (निर्वात पंप) वह युक्ति है
  • जो चारों ओर से बंद किसी स्थान (आयतन) में से गैस के अणुओं को निकालकर उस स्थान में दाब को कम कर देती है।
  • जीवन परिचय
    • ऑटो वॉन गेरिके (Otto von Guericke) का जन्म 20 नवंबर 1602 को जर्मनी के मैग्डेबर्ग शहर में हुआ था।
    • वे एक इंजीनियर, भौतिक विज्ञानी और राजनेता थे
    • जो मैग्डेबर्ग के मेयर भी रहे। 1686 में उनकी मृत्यु हुई।
    • उन्होंने वैज्ञानिक क्रांति के दौर में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • वैक्यूम पंप का आविष्कार
    • 1650 के दशक में वॉन गेरिके ने पहला वैक्यूम पंप विकसित किया
    • जिसमें पिस्टन और एयर गन सिलेंडर का उपयोग होता था।
    • यह पंप किसी बर्तन से हवा निकालकर निर्वात पैदा करने में सक्षम था।
    • उनके प्रयोगों ने निर्वात के गुणों को समझने में मदद की।
  • प्रमुख योगदान
    • पूर्ण निर्वात की अवधारणा: उन्होंने सिद्ध किया कि प्रकृति निर्वात से डरती नहीं है
    • बल्कि वायुमंडलीय दाब ही चीजों को धकेलता है।
    • यह "प्रकृति शून्यता से घृणा करती है" की प्रचलित धारणा को चुनौती था।
    • हवा के भार का मापन: उन्होंने वायु के वजन को मापा और दिखाया कि निर्वात में वस्तुएं हल्की महसूस होती हैं।
    • मौसम पूर्वानुमान: वायु दाब मापने के लिए बारोमीटर जैसी युक्ति का उपयोग कर मौसम की भविष्यवाणी
    • जो आधुनिक मौसम विज्ञान की नींव बनी।
  • प्रसिद्ध मैग्डेबर्ग प्रयोग
    • 1654 में उन्होंने मैग्डेबर्ग गोलार्ध (Magdeburg hemispheres) प्रयोग किया।
    • दो धातु गोलार्धों को जोड़कर हवा निकाली गई
    • तो 16 घोड़ों (8-8 प्रत्येक तरफ) की ताकत से भी वे अलग न हुए।
    • इससे वायुमंडलीय दाब की विशाल शक्ति सिद्ध हुई।
  • वैज्ञानिक प्रभाव
    • उनके कार्य ने वायुमंडलीय दाब, गैसों के अध्ययन (प्न्यूमेटिक्स) और वैक्यूम प्रौद्योगिकी को नई दिशा दी।
    • रॉबर्ट बॉयल जैसे वैज्ञानिकों ने उनके प्रयोगों को आगे बढ़ाया।
    • आज वैक्यूम पंप चंद्रमा मिशनों से लेकर चिकित्सा उपकरणों तक में उपयोग होते हैं।