प्रमुख वैज्ञानिक एवं आविष्कार

Total Questions: 56

21. सर एलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने किसकी खोज की? [M.P. P.C.S. (Pre) 1998]

Correct Answer: (a) पेनिसिलीन
Solution:पेनिसिलीन एंटीबायोटिक का एक समूह है, जिसकी व्युत्पत्ति पेनिसिलियम कवक से हुई है। सभी पेनिसिलीन बीटा-लैक्टेम एंटीबायटिक होते हैं तथा ऐसे जीवाणुगत संक्रमण के इलाज में प्रयोग में लाए जाते हैं, जो आमतौर पर ग्राम-पॉजिटिव जीवधारियों के कारण होते हैं। पेनिसिलीन की खोज का श्रेय वर्ष 1928 में स्कॉटिश वैज्ञानिक एवं नोबेल पुरस्कार विजेता एलेक्जेंडर फ्लेमिंग को जाता है।

22. फ्लेमिंग ने क्या खोजा ? [Uttarakhand Lower Sub. (Pre) 2010]

Correct Answer: (b) पेनिसिलीन
Solution:पेनिसिलीन एंटीबायोटिक का एक समूह है, जिसकी व्युत्पत्ति पेनिसिलियम कवक से हुई है। सभी पेनिसिलीन बीटा-लैक्टेम एंटीबायटिक होते हैं तथा ऐसे जीवाणुगत संक्रमण के इलाज में प्रयोग में लाए जाते हैं, जो आमतौर पर ग्राम-पॉजिटिव जीवधारियों के कारण होते हैं। पेनिसिलीन की खोज का श्रेय वर्ष 1928 में स्कॉटिश वैज्ञानिक एवं नोबेल पुरस्कार विजेता एलेक्जेंडर फ्लेमिंग को जाता है।

23. निम्नलिखित में से किसने 'एक्स' किरणों का आविष्कार किया है? [Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Pre) 2003]

Correct Answer: (b) रोएंटजन
Solution:रेडियम तत्व की खोज पियरे क्यूरी और मैडम क्यूरी ने 1898 ई. में की।

पेनिसिलीन की खोज एलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने वर्ष 1928 में की।

एक्स-किरणों की खोज 1895 ई. में विलहेल्म के. रोएंटजन ने की थी। उन्होंने देखा कि कैथोड रे ट्यूब से निकलने वाली एक अदृश्य किरणें कुछ सामग्रियों से गुजर सकती हैं और फ्लोरोसेंट स्क्रीन पर चमक पैदा कर सकती हैं। उनकी इस अभूतपूर्व खोज ने चिकित्सा विज्ञान और भौतिकी के क्षेत्र में क्रांति ला दी, जिसके लिए उन्हें 1901 में भौतिकी का पहला नोबेल पुरस्कार मिला।

एडवर्ड जेनर ने 1796 ई. में चेचक के टीके की खोज की।

24. 'ब्लैक होल' के सिद्धांत को प्रतिपादित किया था- [U.P.P.C.S. (Pre) 2011]

Correct Answer: (c) एस. चन्द्रशेखर ने
Solution:ब्लैक होल एक ऐसा खगोलीय क्षेत्र है, जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता है कि प्रकाश सहित कुछ भी इसके खिंचाव से बच नहीं सकता है। भारतीय-अमेरिकी खगोलविद् एस. चन्द्रशेखर 'चन्द्रशेखर सीमा' (Chandrasekhar Limit) के सिद्धांत का प्रतिपादन करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके सिद्धांत के अनुसार, सफेद बौने तारे एक निश्चित द्रव्यमान प्राप्त करने के बाद अपने भार में और वृद्धि नहीं कर सकते। अंततः वे ब्लैक होल बन जाते हैं। उन्होंने बताया कि जिन तारों का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से 1.44 गुना अधिक हो जाता है, वे अंततः सिकुड़ कर बहुत भारी हो जाते हैं। इस योगदान के लिए इन्हें वर्ष 1983 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हाल ही में खगोलविदों ने इवेंट होराइजन दूरबीन की मदद से किसी ब्लैक होल का प्रथम चित्र लेने में सफलता प्राप्त की है।

25. वैज्ञानिक एस. चन्द्रशेखर को नोबेल पुरस्कार किस कार्य के लिए मिला था? [M.P. P.C.S. (Pre) 1996]

Correct Answer: (a) नक्षत भौतिक
Solution:ब्लैक होल एक ऐसा खगोलीय क्षेत्र है, जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता है कि प्रकाश सहित कुछ भी इसके खिंचाव से बच नहीं सकता है। भारतीय-अमेरिकी खगोलविद् एस. चन्द्रशेखर 'चन्द्रशेखर सीमा' (Chandrasekhar Limit) के सिद्धांत का प्रतिपादन करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके सिद्धांत के अनुसार, सफेद बौने तारे एक निश्चित द्रव्यमान प्राप्त करने के बाद अपने भार में और वृद्धि नहीं कर सकते। अंततः वे ब्लैक होल बन जाते हैं। उन्होंने बताया कि जिन तारों का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से 1.44 गुना अधिक हो जाता है, वे अंततः सिकुड़ कर बहुत भारी हो जाते हैं। इस योगदान के लिए इन्हें वर्ष 1983 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हाल ही में खगोलविदों ने इवेंट होराइजन दूरबीन की मदद से किसी ब्लैक होल का प्रथम चित्र लेने में सफलता प्राप्त की है।

26. निम्नलिखित वैज्ञानिकों में से किसने यह सिद्ध किया कि सूर्य के द्रव्यमान से 1.44 गुना कम द्रव्यमान वाले तारे मृत होकर श्वेस वामन तारे (हाइट ड्वार्क्स) बन जाते हैं? [I.A.S. (Pre) 2009]

Correct Answer: (b) एस. चन्द्रशेखर
Solution:सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर (Subrahmanyan Chandrasekhar) एक भारतीय-अमेरिकी खगोल भौतिक विज्ञानी थे। उन्होंने तारकीय विकास (Stellar evolution) और ब्लैक होल के सिद्धांत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने चंद्रशेखर सीमा (Chandrasekhar Limit) की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसके अनुसार सूर्य के द्रव्यमान के लगभग 1.44 गुना से कम द्रव्यमान वाले तारे अपने जीवन के अंत में श्वेत वामन (White Dwarf) तारे बन जाते हैं, जबकि इससे अधिक द्रव्यमान वाले तारे या तो न्यूट्रॉन तारे या ब्लैक होल में विकसित होते हैं। उनके इस कार्य के लिए उन्हें विलियम ए. फाउलर के साथ संयुक्त रूप से 1983 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला।

27. प्रकाश-वैद्युत प्रभाव के आविष्कारकर्ता थे- [U.P.P.C.S. (Pre) 2011]

Correct Answer: (a) हर्ट्ज
Solution:

किसी धातु द्वारा बहुत ही छोटी तरंगदैर्ध्य के विद्युत-चुंबकीय विकिरण से ऊर्जा के अवशोषण के फलस्वरूप उसमें से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन होता है। इसे प्रकाश-विद्युत प्रभाव के नाम से जाना जाता है। इस प्रभाव की खोज सर्वप्रथम 1887 ई. में हेनरिच हर्ट्ज ने की थी। इस घटना को हर्ट्ज प्रभाव के नाम से भी जाना जाता है। आइंस्टीन को प्रकाश-वैद्युत प्रभाव की व्याख्या एवं इसके नियम के आविष्कार का श्रेय प्राप्त है। इस कार्य के लिए इन्हें वर्ष 1921 में नोबेल पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।

28. वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन प्रसिद्ध हैं一 [38th B.P.S.C. (Pre) 1992]

Correct Answer: (b) प्रकाश-विद्युत प्रभाव (Photo-electric effect) के लिए
Solution:किसी धातु द्वारा बहुत ही छोटी तरंगदैर्ध्य के विद्युत-चुंबकीय विकिरण से ऊर्जा के अवशोषण के फलस्वरूप उसमें से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन होता है। इसे प्रकाश-विद्युत प्रभाव के नाम से जाना जाता है। इस प्रभाव की खोज सर्वप्रथम 1887 ई. में हेनरिच हर्ट्ज ने की थी। इस घटना को हर्ट्ज प्रभाव के नाम से भी जाना जाता है। आइंस्टीन को प्रकाश-वैद्युत प्रभाव की व्याख्या एवं इसके नियम के आविष्कार का श्रेय प्राप्त है। इस कार्य के लिए इन्हें वर्ष 1921 में नोबेल पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।

29. आइंस्टीन को नोबेल पुरस्कार दिया गया था- [U.P.P.C.S. (Pre) 2015]

Correct Answer: (c) प्रकाश-वैद्युत प्रभाव के लिए
Solution:किसी धातु द्वारा बहुत ही छोटी तरंगदैर्ध्य के विद्युत-चुंबकीय विकिरण से ऊर्जा के अवशोषण के फलस्वरूप उसमें से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन होता है। इसे प्रकाश-विद्युत प्रभाव के नाम से जाना जाता है। इस प्रभाव की खोज सर्वप्रथम 1887 ई. में हेनरिच हर्ट्ज ने की थी। इस घटना को हर्ट्ज प्रभाव के नाम से भी जाना जाता है। आइंस्टीन को प्रकाश-वैद्युत प्रभाव की व्याख्या एवं इसके नियम के आविष्कार का श्रेय प्राप्त है। इस कार्य के लिए इन्हें वर्ष 1921 में नोबेल पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।

30. आइंस्टीन को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया- [U.P.P.C.S. (Pre) 2016 U.P. Lower Sub. (Pre) 2015]

Correct Answer: (a) प्रकाश-वैद्युत प्रभाव के लिए
Solution:किसी धातु द्वारा बहुत ही छोटी तरंगदैर्ध्य के विद्युत-चुंबकीय विकिरण से ऊर्जा के अवशोषण के फलस्वरूप उसमें से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन होता है। इसे प्रकाश-विद्युत प्रभाव के नाम से जाना जाता है। इस प्रभाव की खोज सर्वप्रथम 1887 ई. में हेनरिच हर्ट्ज ने की थी। इस घटना को हर्ट्ज प्रभाव के नाम से भी जाना जाता है। आइंस्टीन को प्रकाश-वैद्युत प्रभाव की व्याख्या एवं इसके नियम के आविष्कार का श्रेय प्राप्त है। इस कार्य के लिए इन्हें वर्ष 1921 में नोबेल पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।