महान्यायवादी, महाधिवक्ता और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन)

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21. भारत सरकार का कौन-सा अधिकारी सदस्य न होते हुए भी भारतीय संसद की कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार रखता है? [60 to 62nd B.P.C.S. (Pre) 2016]

Correct Answer: (b) अटॉर्नी जनरल
Solution:एक गैर-सदस्य के रूप में संसद की कार्यवाही में महान्यायवादी भाग ले सकता है। चूंकि प्रश्न के विकल्प में उपराष्ट्रपति भी है और वह भी संसद का सदस्य नहीं होता, इसलिए यहां उपराष्ट्रपति भी उत्तर हो सकता है। हालांकि उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के सभापति के पद से हटाने का प्रस्ताव सदन में विचारणीय हो, तो उस समय उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति नहीं रहता। इस दौरान वह सदन का एक हिस्सा होता है और इस संदर्भ में वह सदन में अपनी बात रख सकता है। यदि संसद के दोनों सदनों में से किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग लेने की बात हो, तो वहां उत्तर महान्यायवादी ही होगा क्योंकि उपराष्ट्रपति की भागीदारी राज्य सभा में ही होती है। साथ ही प्रश्न में भारत सरकार का 'अधिकारी' (Officer) शब्द प्रयुक्त हुआ है जबकि उपराष्ट्रपति राष्ट्र का उप-प्रमुख और राज्य सभा का पदेन सभापति होता है। संभवतः इसी आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा इस प्रश्न का उत्तर (b) अटॉर्नी जनरल दिया गया है।

22. निम्नलिखित में से कौन संसद के दोनों सदनों में से किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग ले सकता है? [U.P.P.C.S. (Mains) 2005]

Correct Answer: (d) महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल)
Solution:एक गैर-सदस्य के रूप में संसद की कार्यवाही में महान्यायवादी भाग ले सकता है। चूंकि प्रश्न के विकल्प में उपराष्ट्रपति भी है और वह भी संसद का सदस्य नहीं होता, इसलिए यहां उपराष्ट्रपति भी उत्तर हो सकता है। हालांकि उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के सभापति के पद से हटाने का प्रस्ताव सदन में विचारणीय हो, तो उस समय उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति नहीं रहता। इस दौरान वह सदन का एक हिस्सा होता है और इस संदर्भ में वह सदन में अपनी बात रख सकता है। यदि संसद के दोनों सदनों में से किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग लेने की बात हो, तो वहां उत्तर महान्यायवादी ही होगा क्योंकि उपराष्ट्रपति की भागीदारी राज्य सभा में ही होती है। साथ ही प्रश्न में भारत सरकार का 'अधिकारी' (Officer) शब्द प्रयुक्त हुआ है जबकि उपराष्ट्रपति राष्ट्र का उप-प्रमुख और राज्य सभा का पदेन सभापति होता है। संभवतः इसी आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा इस प्रश्न का उत्तर (b) अटॉर्नी जनरल दिया गया है।

23. एक गैर-सदस्य के रूप में संसद के किसी एक सदन की कार्यवाही में भाग ले सकता है- [48th to 52nd B.P.S.C. (Pre) 2008]

Correct Answer: (e) (a) & (c)
Solution:एक गैर-सदस्य के रूप में संसद की कार्यवाही में महान्यायवादी भाग ले सकता है। चूंकि प्रश्न के विकल्प में उपराष्ट्रपति भी है और वह भी संसद का सदस्य नहीं होता, इसलिए यहां उपराष्ट्रपति भी उत्तर हो सकता है। हालांकि उपराष्ट्रपति को राज्य सभा के सभापति के पद से हटाने का प्रस्ताव सदन में विचारणीय हो, तो उस समय उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति नहीं रहता। इस दौरान वह सदन का एक हिस्सा होता है और इस संदर्भ में वह सदन में अपनी बात रख सकता है। यदि संसद के दोनों सदनों में से किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग लेने की बात हो, तो वहां उत्तर महान्यायवादी ही होगा क्योंकि उपराष्ट्रपति की भागीदारी राज्य सभा में ही होती है। साथ ही प्रश्न में भारत सरकार का 'अधिकारी' (Officer) शब्द प्रयुक्त हुआ है जबकि उपराष्ट्रपति राष्ट्र का उप-प्रमुख और राज्य सभा का पदेन सभापति होता है। संभवतः इसी आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा इस प्रश्न का उत्तर (b) अटॉर्नी जनरल दिया गया है।

24. सॉलिसिटर जनरल निम्न में से क्या होता है? [U.P.P.C.S. (Pre) 1991]

Correct Answer: (c) कानूनी सलाहकार
Solution:अटॉर्नी जनरल के अतिरिक्त भारत सरकार के कानूनी सलाहकार के रूप में अन्य विधि अधिकारी भी होते हैं। इन्हें सॉलिसिटर जनरल कहा जाता है। ये अटॉर्नी जनरल को उसके दायित्वों के निर्वहन में सहायता प्रदान करते हैं।

25. भारत का सॉलिसिटर होता है- [U.P.P.C.S. (Pre) 1994]

Correct Answer: (b) एक न्यायिक सलाहकार
Solution:अटॉर्नी जनरल के अतिरिक्त भारत सरकार के कानूनी सलाहकार के रूप में अन्य विधि अधिकारी भी होते हैं। इन्हें सॉलिसिटर जनरल कहा जाता है। ये अटॉर्नी जनरल को उसके दायित्वों के निर्वहन में सहायता प्रदान करते हैं।

26. कानूनी विषयों पर राज्य सरकार को कौन परामर्श देता है? [45th B.P.S.C. (Pre) 2001]

Correct Answer: (b) एडवोकेट जनरल
Solution:एडवोकेट जनरल (महाधिवक्ता) राज्य सरकार को कानूनी विषयों पर परामर्श देता है [अनुच्छेद 165(2)]। प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता धारण करने वाले किसी व्यक्ति को एडवोकेट जनरल नियुक्त करता है [अनुच्छेद 165(1)]। वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है [अनुच्छेद 165(3)]। यह राज्य सरकार का प्रथम विधिक सलाहकार होता है।

27. इनमें से कौन राज्य सरकार का कानूनी सलाहकार है? [U.P. Lower Sub. (Pre) 2015]

Correct Answer: (a) महाधिवक्ता
Solution:एडवोकेट जनरल (महाधिवक्ता) राज्य सरकार को कानूनी विषयों पर परामर्श देता है [अनुच्छेद 165(2)]। प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता धारण करने वाले किसी व्यक्ति को एडवोकेट जनरल नियुक्त करता है [अनुच्छेद 165(1)]। वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है [अनुच्छेद 165(3)]। यह राज्य सरकार का प्रथम विधिक सलाहकार होता है।

28. राज्य सरकार को कानूनी मामलों में सलाह देने के लिए अधिकृत है- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2003 U.P.P.C.S. (Mains) 2014]

Correct Answer: (c) महाधिवक्ता (Advocate General)
Solution:एडवोकेट जनरल (महाधिवक्ता) राज्य सरकार को कानूनी विषयों पर परामर्श देता है [अनुच्छेद 165(2)]। प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता धारण करने वाले किसी व्यक्ति को एडवोकेट जनरल नियुक्त करता है [अनुच्छेद 165(1)]। वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है [अनुच्छेद 165(3)]। यह राज्य सरकार का प्रथम विधिक सलाहकार होता है।

29. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : [I.A.S. (Pre) 2009]

1. भारत में राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के राज्यपाल की अनुशंसा पर की जाती है।

2. सिविल प्रक्रिया संहिता के उपबंधों के अनुसार राज्य-स्तर पर उच्च न्यायालयों की मूल, अपीलीय तथा सलाहकारी अधिकारिता होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Correct Answer: (d) न तो 1 और न ही 2
Solution:संविधान के अनुच्छेद 165 (1) के अनुसार, राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है न कि राष्ट्रपति द्वारा, अतः कथन 1 गलत है। सलाहकारी अधिकारिता अनुच्छेद 143 के तहत सर्वोच्च न्यायालय की होती है। उच्च न्यायालयों की अधिकारिता, मूल तथा अपीलीय होती है। अतः कथन 2 भी गलत है।

30. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति की जाती है- [U.P.U.D.A./L.D.A. (Pre) 2001]

Correct Answer: (a) राष्ट्रपति द्वारा
Solution:भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 (1) के तहत भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। अनुच्छेद 151(1) के अनुसार, भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक भारत सरकार के लेखों का लेखा परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट 5 को राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है तथा अनुच्छेद 151(2) के अनुसार, वह राज्य सरकारों के लेखों का लेखा परीक्षण कर रिपोर्ट संबंधित राज्य के राज्यपाल को सौंपता है।