मूल कर्तव्य

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31. मौलिक कर्तव्यों को भारतीय संविधान के भाग III में नहीं रखा गया, क्योंकि भाग III ....... है। [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) वादयोग्य
Solution:
  • मौलिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) को भारतीय संविधान के भाग III (मौलिक अधिकार) में नहीं रखा गया है, क्योंकि भाग III वादयोग्य (Justiciable) है।
  • इसका अर्थ है कि मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर नागरिक सीधे न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट) जा सकते हैं
  • न्यायालय उन्हें लागू करवा सकता है। इसके विपरीत, मौलिक कर्तव्य (जो भाग IV-A में हैं) गैर-वादयोग्य हैं और उन्हें सीधे न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता है।
  • भाग III की प्रकृति
    • भाग III (अनुच्छेद 12 से 35) में मौलिक अधिकार शामिल हैं, जो नागरिकों को अदालतों में प्रवर्तनीय हैं।
    • इनकी रक्षा के लिए संविधान सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों को अधिकार देता है। मौलिक कर्तव्य नैतिक दायित्व हैं, जिन्हें कानूनी रूप से लागू नहीं किया जा सकता।​
  • मौलिक कर्तव्यों का स्थान
    • मौलिक कर्तव्यों को 42वें संशोधन (1976) द्वारा भाग IVA (अनुच्छेद 51A) में जोड़ा गया। मूल संविधान में ये नहीं थे
    • स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर इन्हें शामिल किया गया। 86वें संशोधन (2002) से इनकी संख्या 11 हो गई।​
  • कर्तव्यों की सूची
    • संविधान का पालन और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान।​
    • स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों का पालन।
    • भारत की संप्रभुता और एकता की रक्षा।
    • देश की रक्षा और राष्ट्रीय सेवा।
    • सद्भाव, भाईचारा बढ़ाना; महिलाओं की गरिमा।
    • संस्कृति की रक्षा।
    • पर्यावरण संरक्षण।
    • वैज्ञानिक स्वभाव को बढ़ावा।
    • सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा।
    • उत्कृष्टता के प्रयास।
    • 6-14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा (2002 में जोड़ा)।​
  • महत्वपूर्ण अंतर
    • मौलिक अधिकार अमेरिकी बिल ऑफ राइट्स से प्रेरित हैं, जबकि कर्तव्य जिम्मेदारी सिखाते हैं। यह विभाजन संविधान की स्पष्टता बनाए रखता है।

32. निम्नलिखित में से किस अनुच्छेद में यह उल्लेख किया गया है कि नीति निदेशक सिद्धांत न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं? [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 37
Solution:
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 37 स्पष्ट रूप से उल्लेख करता है कि राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP) न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (न्यायालय में वादयोग्य) नहीं होंगे, लेकिन वे देश के शासन में मूलभूत हैं
  • विधि बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।
  • राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत (DPSP) भारतीय संविधान के भाग IV, अनुच्छेद 36 से 51 में निहित हैं।
  • संविधान का अनुच्छेद 37 घोषित करता है कि DPSP
  •  किसी भी अदालत द्वारा लागू करने योग्य नहीं होगा, लेकिन फिर भी इसमें निर्धारित सिद्धांत देश के शासन में मौलिक हैं
  • कानून बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।"
    Other Information
  • अनुच्छेद 40:
    • राज्य ग्राम पंचायतों को संगठित करने के लिए कदम उठाएगा और उन्हें ऐसी शक्तियाँ और अधिकार प्रदान करेगा
    • जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हो।
  •  अनुच्छेद 38:
    • राज्य लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी ढंग से सुरक्षित और संरक्षित करने का प्रयास करेगा क्योंकि यह एक सामाजिक व्यवस्था हो सकती है
    • जिसमें न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक, राष्ट्रीय जीवन के सभी संस्थानों को सूचित करेगा।
  • अनुच्छेद 39:
    • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39 राज्य नीति के लिए कुछ मार्गदर्शक सिद्धांतों की रूपरेखा तैयार करता है।

33. भारतीय संविधान के अनुच्छेद ....... के अनुसार, भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना विकसित करे। [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली), JE मैकेनिकल परीक्षा 22 मार्च, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 51A
Solution:
  • भारतीय संविधान के भाग-4 क के अनुच्छेद 51क (51A) में मूल कर्तव्यों का प्रावधान है
  • जो स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया।
  • अनुच्छेद 51A(h) [51 क (ज)] में कहा गया है कि भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है
  • वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना विकसित करे।
  • मूलतः संविधान में 10 मौलिक कर्तव्य थे, किंतु 86वें संविधान संशोधन, 2002 द्वारा 11वां मौलिक कर्तव्य 51क (ट) जोड़ा गया।
  • मौलिक कर्तव्य पूर्व सोवियत संघ के संविधान से प्रेरित हैं।
  • अनुच्छेद का परिचय
    • विशेष रूप से वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जो अंधविश्वासों के विरुद्ध तर्कसंगत दृष्टिकोण अपनाने को प्रोत्साहित करता है।
    • यह कर्तव्य गैर-न्यायसंगत है, अर्थात् इसका उल्लंघन दंडनीय नहीं है, लेकिन यह नागरिकों को नैतिक रूप से बाध्य करता है।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • 42वां संशोधन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा आपातकाल के दौरान पारित हुआ, जिसने प्रस्तावना में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता शब्द जोड़े तथा मौलिक कर्तव्यों को शामिल किया।
    • इसका उद्देश्य अधिकारों के साथ कर्तव्यों का संतुलन स्थापित करना था, जैसा कि स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर आधारित था।
    • यह प्रावधान नेहरूवादी वैज्ञानिक दृष्टिकोण को संवैधानिक मान्यता देता है, जो राष्ट्र निर्माण में आलोचनात्मक सोच को मजबूत करता है।​
  • महत्व और व्याख्या
    • वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तात्पर्य तर्क, प्रमाण-आधारित निर्णय, प्रयोग और अवलोकन से है, जो अंधविश्वास, कুरीतियों को चुनौती देता है।
    • मानवतावाद करुणा और समानता पर जोर देता है, जबकि ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना निरंतर सीखने और प्रगति को प्रेरित करती है।
    • यह कर्तव्य शिक्षा, नीति निर्माण और सामाजिक सुधारों में उपयोगी है, जैसे कि नवाचार को बढ़ावा देकर भारत को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना।​
  • कार्यान्वयन और चुनौतियाँ
    • संविधान अदालतों द्वारा इसे लागू करने योग्य मानती है, जैसे कि अंकुर गुप्ता बनाम भारत संघ मामले में।
    • हालांकि, सामाजिक अंधविश्वास, धार्मिक कट्टरता चुनौतियाँ बनी हुई हैं। सरकारें शिक्षा अभियानों, विज्ञान दिवस आदि से इसे प्रोत्साहित करती हैं।​
  • अन्य मौलिक कर्तव्य
    • संविधान का पालन और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान।​
    • पर्यावरण संरक्षण और हिंसा त्याग।​
    • उत्कृष्टता की ओर निरंतर प्रयास।

34. भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य पहली बार कब शामिल किए गए थे? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 1976
Solution:
  • भारतीय संविधान के भाग-4 क के अनुच्छेद 51क (51A) में मूल कर्तव्यों का प्रावधान है, जो स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया
  • अनुच्छेद 51A(h) [51 क (ज)] में कहा गया है कि भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना विकसित करे।
  • भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य पहली बार 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा शामिल किए गए थे।
  • यह संशोधन आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी सरकार द्वारा पारित हुआ और संविधान के भाग IVA (अनुच्छेद 51A) के रूप में जोड़ा गया, जिसमें शुरू में 10 कर्तव्य थे।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • 1976 में सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर आधारित यह संशोधन अधिकारों के साथ कर्तव्यों का संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से लाया गया।
    • सोवियत संघ के संविधान से प्रेरित ये कर्तव्य नागरिकों को राष्ट्र के प्रति नैतिक दायित्वों की याद दिलाने के लिए थे
    • हालांकि वे गैर-न्यायसंगत हैं। 42वां संशोधन को 'लघु संविधान' भी कहा जाता है क्योंकि इसमें व्यापक बदलाव किए गए।​
  • प्रारंभिक कर्तव्यों की सूची
    • शुरुआती 10 मौलिक कर्तव्य निम्नलिखित थे:
    • संविधान का पालन और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान।​
    • देश की संस्कृति और विरासत का संरक्षण।​
    • सद्भाव और एकता को बढ़ावा।​
    • पर्यावरण रक्षा, हिंसा त्याग और सार्वजनिक संपत्ति संरक्षण।​
    • उत्कृष्टता की ओर प्रयास।​
  • बाद के संशोधन
    • 2002 में 86वें संशोधन द्वारा 11वां कर्तव्य जोड़ा गया: 6-14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा प्रदान करना। यह संशोधन RTE अधिनियम से जुड़ा था।​
  • महत्व और आलोचना
    • ये कर्तव्य न्यायिक व्याख्याओं में उपयोगी साबित हुए, जैसे पर्यावरण मामलों में। आलोचना यह है कि वे अस्पष्ट और अप्रवर्तनीय हैं, लेकिन जागरूकता अभियान चलते हैं।​

35. निम्नलिखित में से किस समिति की सिफारिश पर नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को भारतीय संविधान में जोड़ा गया था? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (IV-पाली), CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (IV-पाली), MTS (T-I) 03 मई, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 04 सितंबर, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (III- पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) स्वर्ण सिंह समिति
Solution:
  • भारतीय संविधान के भाग-4 क के अनुच्छेद 51क (51A) में मूल कर्तव्यों का प्रावधान है
  • जो स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया।
  • अनुच्छेद 51A(h) [51 क (ज)] में कहा गया है कि भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है
  • वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना विकसित करे।
  • मूलतः संविधान में 10 मौलिक कर्तव्य थे, किंतु 86वें संविधान संशोधन, 2002 द्वारा 11वां मौलिक कर्तव्य 51क (ट) जोड़ा गया।
  • मौलिक कर्तव्य पूर्व सोवियत संघ के संविधान से प्रेरित हैं।
  • मौलिक कर्तव्य
    • इन्हें संविधान के भाग IV-A के तहत अनुच्छेद 51A के रूप में जोड़ा गया था।
    • ये कर्तव्य नागरिकों को राष्ट्रवाद की भावना को बनाए रखने और संविधान में निहित मूल्यों का पालन करने की याद दिलाते हैं।
  • स्वर्ण सिंह समिति
    • संवैधानिक संशोधनों के लिए सिफारिशें करने के लिए 1976 में स्वर्ण सिंह समिति का गठन किया गया था।
    • समिति ने नागरिकों के अधिकारों के अलावा उनकी जिम्मेदारियों के महत्व पर जोर देने के लिए संविधान में मौलिक कर्तव्यों को शामिल करने का प्रस्ताव दिया।
    • हालांकि समिति ने आठ मौलिक कर्तव्यों को शामिल करने की सिफारिश की थी, लेकिन संविधान में शुरू में दस कर्तव्य शामिल किए गए थे।
      Other Information
  •  मौलिक कर्तव्यों का उद्देश्य
    • नागरिकों को उनके नैतिक और नागरिक जिम्मेदारियों की याद दिलाना।
    • राष्ट्र के प्रति अनुशासन और प्रतिबद्धता की भावना को बढ़ावा देना।
    • भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना और उसकी रक्षा करना।
  • कानूनी स्थिति
    • मौलिक कर्तव्य गैर- न्यायसंगत हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें अदालतों द्वारा लागू नहीं किया जा सकता है।
    • हालांकि, वे कानून बनाने में नागरिकों और सरकार के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य करते हैं।
  •  मौलिक अधिकारों से तुलना
    • जहां मौलिक अधिकार अदालतों द्वारा लागू करने योग्य हैं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं
    • वहीं मौलिक कर्तव्य नागरिकों की जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। दोनों राष्ट्र के लोकतांत्रिक कामकाज के पूरक और अभिन्न अंग हैं।
  • अतिरिक्त कर्तव्य
    •  86वें संशोधन अधिनियम, 2002 ने 11वां मौलिक कर्तव्य जोड़ा, जिसमें माता-पिता या अभिभावकों को 6 से 14 वर्ष की आयु के अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करने की आवश्यकता है।

36. मौलिक कर्तव्यों की सूची में उप-धारा (C) किसी भारतीय नागरिक के लिए भारत की प्रभुता, एकता और ....... को बनाए रखने और उसकी रक्षा करने के कर्तव्य को निर्धारित करती है। [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली), CGL (T-I) 02 दिसंबर, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) अखंडता
Solution:
  • मौलिक कर्तव्यों की सूची में उप-धारा (C), यानी अनुच्छेद 51A (c), किसी भारतीय नागरिक के लिए भारत की प्रभुता (Sovereignty), एकता (Unity) और अखंडता (Integrity) को बनाए रखने और उसकी रक्षा करने के कर्तव्य को निर्धारित करती है।
  • संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों और संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना;
    • स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय संघर्ष को प्रेरित करने वाले महान आदर्शों को संजोना और उनका पालन करना;
    • भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना और उसकी रक्षा करना;
    • देश की रक्षा करना तथा आह्वान किए जाने पर राष्ट्रीय सेवा प्रदान करना;
    • भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा व प्रदेश या वर्ग आधारित सभी प्रकार के भेदभाव से परे हो
    • ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं।
    • देश की समग्र संस्कृति की समृद्ध विरासत को महत्व देना और संरक्षित करना;
    • वनों, झीलों, नदियों और वन्य जीवन सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना और जीवित प्राणियों के प्रति दया भाव रखना;
    • वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करना;
  • सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा को त्यागना;
    • व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत् प्रयास करें जिससे राष्ट्र प्रगति की
    • निरंतर बढ़ते हुए उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को प्राप्त किया जा सके. तथा
    • छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना।
    • यह कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था।
  • उप-धारा (c) का विवरण
    • अनुच्छेद 51A(c) स्पष्ट रूप से कहता है: "भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना और उसकी रक्षा करना।
    • यह कर्तव्य नागरिकों को देश की संपूर्णता असम्बद्ध रखने के लिए बाध्य करता है
    • जिसमें अलगाववाद या विभाजनकारी गतिविधियों का विरोध शामिल है।​
  • पूरी सूची
    • संविधान का पालन और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज व गान का सम्मान।
    • स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को संजोना।
    • भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा।
    • देश की रक्षा और राष्ट्रीय सेवा।
    • सभी लोगों में सद्भाव और महिलाओं की गरिमा की रक्षा।​

37. निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों के अंतर्गत नहीं आता है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) वयस्क मताधिकार का प्रयोग करना
Solution:
  • वयस्क मताधिकार का प्रयोग करना (Voting) एक कानूनी और नागरिक अधिकार है
    • लेकिन यह भारतीय संविधान में सूचीबद्ध मौलिक कर्तव्यों के अंतर्गत नहीं आता है। अन्य सभी विकल्प मौलिक कर्तव्य हैं।
    • भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य अनुच्छेद 51A के अंतर्गत भाग IVA में वर्णित हैं, जो 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा जोड़े गए।
    • ये 11 कर्तव्य नागरिकों के नैतिक दायित्व हैं, लेकिन ये गैर-न्यायसंगत हैं, अर्थात् इनके उल्लंघन पर अदालत सीधे दंड नहीं दे सकती।​
  • मौलिक कर्तव्यों की सूची
  • संविधान में निम्नलिखित 11 मौलिक कर्तव्य शामिल हैं:
    • संविधान का पालन करना तथा इसका आदर करना, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना।​
    • स्वतंत्रता संग्राम की भावना का आदर करना।​
    • भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना।​
    • देश की रक्षा करना तथा राष्ट्रीय सेवा में योगदान देना।​
    • भारत के सभी लोगों में समान भ्रातृत्व की भावना विकसित करना।​
    • हमारी समग्र संस्कृति की गरिमा का संरक्षण करना।​
    • प्राकृतिक पर्यावरण, वन्यजीव, नदी, झील और विरासत स्थलों का संरक्षण।​
    • वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और जिज्ञासा तथा सुधार की भावना का विकास।​
    • सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना तथा हिंसा का त्याग।​
    • व्यक्तिगत और सामूहिक उत्कृष्टता के लिए प्रयास।​
    • 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना।​
  • जो मौलिक कर्तव्य नहीं है
    • भारत के किसी भी भाग में निवास करना और बसना" मौलिक कर्तव्य के अंतर्गत नहीं आता। यह नागरिकों का मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19) का हिस्सा है
    • प्रकार, "राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण" राज्य का नीति निर्देशक तत्व (अनुच्छेद 49) है, न कि नागरिकों का मौलिक कर्तव्य।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • मौलिक कर्तव्य स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर जोड़े गए, जो रूसी संविधान से प्रेरित हैं। मूल संविधान में ये नहीं थे
    • क्योंकि अपेक्षा थी कि नागरिक स्वेच्छा से कर्तव्य निभाएंगे। इन्हें जोड़ने का उद्देश्य अधिकारों के साथ संतुलन स्थापित करना था।​

38. निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय संविधान में सूचीबद्ध मौलिक कर्तव्य नहीं है? [MTS (T-I) 13 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना
Solution:
  • लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होना भारतीय संविधान में सूचीबद्ध मौलिक कर्तव्यों में शामिल नहीं है।
  • जबकि नागरिक होने के नाते ऐसा करना अपेक्षित है, यह अनुच्छेद 51A के 11 कर्तव्यों में से एक नहीं है।
  • ये कर्तव्य नागरिकों पर नैतिक दायित्व लगाते हैं, लेकिन ये गैर-न्यायसंगत हैं, अर्थात् इनके सीधे उल्लंघन पर दंड का प्रावधान नहीं है।​
  • मौलिक कर्तव्यों की पूर्ण सूची
  • संविधान में निम्न 11 मौलिक कर्तव्य स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध हैं:
    • संविधान का पालन करना तथा उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना।​
    • स्वतंत्रता संग्राम के उन महान आदर्शों को संजोना और उनका पालन करना, जिन्होंने इसे प्रेरित किया।​
    • भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना और उसकी रक्षा करना।​
    • देश की रक्षा करना तथा आह्वान पर राष्ट्रीय सेवा करना।​
    • भारत के सभी लोगों में धार्मिक, भाषाई, क्षेत्रीय या सांप्रदायिक भेदभाव से ऊपर उठकर सद्भाव और समान भाईचारे की भावना बढ़ावा देना; महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध अपमानजनक प्रथाओं का त्याग करना।​
    • हमारी समग्र संस्कृति की समृद्ध विरासत को महत्व देना और संरक्षित करना।​
    • वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीव सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करना तथा जीव-जंतुओं के प्रति दया रखना।​
    • वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद तथा जिज्ञासा और सुधार की भावना का विकास करना।​
    • सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा का परित्याग करना।​
    • व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की ओर निरंतर प्रयास करना।​
    • माता-पिता या अभिभावक द्वारा 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना।​
  • जो मौलिक कर्तव्य नहीं है
    • प्रश्न "निम्नलिखित में से कौन-सा" सूचीबद्ध नहीं करता, लेकिन सामान्यतः परीक्षाओं में विकल्प जैसे "राष्ट्रीय स्मारकों का संरक्षण" (जो नीति निर्देशक तत्व अनुच्छेद 49 में है)
    • करों का भुगतान करना" (राज्य का अधिकार), या "भारत में कहीं भी निवास करना" (मौलिक अधिकार अनुच्छेद 19 में) मौलिक कर्तव्य नहीं माने जाते।
    • ये कर्तव्य केवल ऊपर सूचीबद्ध 11 हैं, और कोई अन्य संविधान में सूचीबद्ध नहीं है।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व
    • स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर जोड़े गए ये कर्तव्य अधिकारों के साथ संतुलन स्थापित करते हैं, जो अमेरिकी संविधान से प्रेरित हैं
    • लेकिन रूसी मॉडल पर आधारित। इन्हें लागू करने के लिए वर्मा समिति (1999) ने सुझाव दिए, लेकिन अभी भी इन्हें अदालतें मौलिक अधिकारों की व्याख्या में उपयोग करती हैं
    • जैसे AIIMS छात्रवृत्ति मामले में। ये राष्ट्र निर्माण में नागरिक जिम्मेदारी बढ़ाते हैं।

39. मौलिक कर्तव्य ....... हैं और कानून द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं लेकिन किसी भी मामले का निर्णय करते समय न्यायालयों द्वारा दृष्टिगत रखे जाते हैं। [CHSL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) वैधानिक
Solution:
  • मौलिक कर्तव्य वैधानिक (Statutory) या नैतिक दायित्व हैं। वे गैर-वादयोग्य हैं और सीधे कानून द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं
  • लेकिन न्यायालय किसी मामले का निर्णय करते समय उनकी प्रासंगिकता को ध्यान में रख सकते हैं। हालाँकि, संसद उनके प्रवर्तन के लिए कानून बनाने के लिए स्वतंत्र है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • मौलिक कर्तव्यों को 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से संविधान में जोड़ा गया था, जो स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर आधारित था।
    • मूल रूप से 10 कर्तव्य जोड़े गए, जिनमें 86वें संशोधन, 2002 द्वारा 6-11 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करने वाला एक कर्तव्य शामिल किया गया।
    • ये कर्तव्य USSR से प्रेरित हैं और भारत के अलावा जापान ही एकमात्र लोकतांत्रिक देश है जहां संविधान में ऐसे कर्तव्य हैं।​
  • कानूनी प्रकृति
    • मौलिक कर्तव्य नैतिक दायित्व हैं, न कि कानूनी रूप से प्रवर्तनीय, क्योंकि इनके उल्लंघन पर न्यायालय सीधे दंड नहीं दे सकता। हालांकि ये निर्देशक सिद्धांतों के समान हैं
    • न्यायालय इन्हें फैसलों में मार्गदर्शक के रूप में उपयोग करते हैं, जैसे AIIMS Students Union मामले में।
    • कुछ कानूनों जैसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के माध्यम से इन्हें अप्रत्यक्ष रूप से लागू किया जाता है।​
  • मौलिक कर्तव्यों की सूची
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A में 11 मौलिक कर्तव्य निम्नलिखित हैं:​
    • संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज व राष्ट्रगान का सम्मान करना।
    • स्वतंत्रता संग्राम के महान आदर्शों को संजोना और पालन करना।
    • भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना।
    • देश की रक्षा करना और राष्ट्रीय सेवा प्रदान करना।
    • भारत के सभी लोगों में सद्भाव और भाईचारा बढ़ाना।
    • हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना।
    • पर्यावरण, वन्यजीव और प्राकृतिक सौंदर्य की रक्षा करना।
    • वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन की आकांक्षा विकसित करना।
    • सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा से बचना।
    • व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों में उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास करना।
    • 6-14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा सुनिश्चित करना।
  • न्यायिक महत्व
    • न्यायालय मौलिक कर्तव्यों को मौलिक अधिकारों पर उचित प्रतिबंध लगाने के आधार के रूप में देखते हैं
    • जैसे MC Mehta मामले में पर्यावरण कर्तव्य को बाध्यकारी बनाया गया।
    • ये कर्तव्य नागरिकों को जिम्मेदार बनाते हैं और संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं, जैसा कि Minerva Mills मामले में मान्यता प्राप्त हुई।
    • इन्हें लागू करने के लिए अलग कानून मौजूद हैं, लेकिन व्यापक प्रवर्तन कानून की आवश्यकता पर चर्चा जारी है।

40. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद कहलाता है कि माता-पिता या संरक्षक, छः वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले अपने, यथास्थिति, बालक या प्रतिपाल्य के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करे? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) 51A (k)
Solution:
  • अनुच्छेद 51A के खंड (k) में यह मौलिक कर्तव्य शामिल है। इसे 86वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था
  • यह माता-पिता/संरक्षक पर छः वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का दायित्व डालता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • 86वें संशोधन ने अनुच्छेद 21A (6-14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार) को भी जोड़ा, जबकि 51A(k) नागरिकों पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी डालता है।
    • राज्य नीति के निदेशक तत्त्वों में पहले अनुच्छेद 45 था, जो राज्य को 14 वर्ष तक निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने का निर्देश देता था, लेकिन यह मौलिक कर्तव्य नहीं था।
    • यह संशोधन RTE अधिनियम 2009 को मजबूत करने में सहायक सिद्ध हुआ।​
  • महत्व और प्रभाव
    • यह कर्तव्य माता-पिता को बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने बाध्य करता है, जिससे ड्रॉपआउट दर कम हुई और नामांकन बढ़ा।
    • हालांकि, यह न्यायिक रूप से प्रवर्तनीय नहीं है, लेकिन सामाजिक जागरूकता बढ़ाता है। RTE के साथ मिलकर यह 6-14 वर्ष के आयु वर्ग को लक्षित करता है।
    • यह अनुच्छेद संविधान के भाग IV-A के अंतर्गत आता है जो नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों से संबंधित है।
    • यह लेख विशेष रूप से अपने बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए माता-पिता और अभिभावकों के कर्तव्य को संबोधित करता है।
  • Other Information
  •  51A(j) में कहा गया है कि व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की दिशा में प्रयास करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
  •  51A(i) में कहा गया है कि सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा से दूर रहना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
  •  51A(h) में कहा गया है कि वैज्ञानिक स्वभाव, मानवतावाद और जांच और सुधार की भावना विकसित करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।