Correct Answer: (d) अल्पाइन स्कीइंग
Solution:- दिसंबर, 2021 में मोंटेनेग्रो में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली आंचल ठाकुर का संबंध अल्पाइन स्कीइंग खेल से है।
- वह हिमाचल प्रदेश से हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाली भारत की पहली स्कीयर (स्कीइंग खिलाड़ी) हैं।
- अल्पाइन स्कीइंग में खिलाड़ी बर्फ से ढके ढलानों पर स्की के साथ नीचे उतरते हैं।
- खेल और उपलब्धि
- आंचल ठाकुर हिमाचल प्रदेश के मनाली की रहने वाली हैं और अल्पाइन स्कीइंग में विशेषज्ञता रखती हैं
- जो बर्फीले ढलानों पर तेज गति से स्कीइंग करने वाला खेल है। दिसंबर 2021 में मोंटेनेग्रो में हुई
- इस अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में उन्होंने 1:54.30 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक हासिल किया।
- यह भारत का दूसरा अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग पदक था
- आंचल पहली भारतीय महिला बनीं जिन्होंने दो अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में कांस्य पदक जीते।
- इससे पहले 2018 में तुर्की के अल्पाइन एजडर 3200 कप में भी उन्होंने कांस्य जीता था।
- पृष्ठभूमि
- आंचल ठाकुर का जन्म हिमाचल के एक छोटे से गांव में हुआ
- जहां उन्होंने चार साल की उम्र से ही स्कीइंग शुरू कर दी।
- उनके पिता रोशन ठाकुर ने आर्थिक तंगी के बावजूद उधार लेकर उनकी ट्रेनिंग करवाई।
- वह पिछले कई वर्षों से ऑस्ट्रिया जैसे देशों में प्रशिक्षण ले रही हैं।
- 2021 की इस जीत के बाद उन्होंने चीन में होने वाले विंटर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का लक्ष्य रखा था।
- महत्व
- यह पदक भारत में विंटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।
- आंचल ने स्लैलम श्रेणी में पदक जीतकर पहली भारतीय बनने का गौरव प्राप्त किया।
- हालांकि, सरकारी सहायता की कमी के बावजूद उन्होंने दृढ़ता दिखाई। उनके भाई भी स्की एथलीट हैं
- जो परिवार की खेल परंपरा को दर्शाता है।
- स्वर्ण पदक क्रोएशिया की डोरा ल्जुटिक और रजत साइप्रस की जॉर्जिया एपिफेनियू ने जीता।
- अन्य तथ्य
- आंचल की इस सफलता ने हिमाचल और पूरे भारत में स्कीइंग को लोकप्रिय बनाने में मदद की।
- वह हिमालयी क्षेत्रों में खेल सुविधाओं के विकास की वकालत करती हैं।
- उनकी कहानी संघर्ष, जुनून और सफलता की प्रेरणादायक मिसाल है।