विविध (खेल जगत) भाग-I

Total Questions: 60

31. किस देश ने फीफा विश्व कप, 2022 की मेजबानी की ? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) कतर
Solution:
  • फीफा विश्व कप, 2022 की मेजबानी कतर देश ने की थी। यह पहली बार था जब यह प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट मध्य पूर्व के किसी देश में आयोजित किया गया।
  • इस टूर्नामेंट का आयोजन नवंबर और दिसंबर 2022 में हुआ था। अर्जेंटीना ने फाइनल में फ्रांस को हराकर यह खिताब जीता था।
  • कतर ने इस आयोजन के लिए कई अत्याधुनिक स्टेडियमों का निर्माण किया, जिसने दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों को आकर्षित किया।
  • आयोजन विवरण
    • कुल 64 मैच खेले गए, और फाइनल लुसैल स्टेडियम में अर्जेंटीना ने फ्रांस को पेनल्टी शूटआउट में हराकर खिताब जीता।
    • मेजबान कतर ग्रुप स्टेज से बाहर हो गया, जबकि फ्रांस 2018 का defending चैंपियन था।​
  • ऐतिहासिक महत्व
    • कतर को 2010 में मेजबानी मिली, जो एशिया में 2002 जापान-दक्षिण कोरिया के बाद दूसरा अवसर था।
    • यह पहला विश्व कप था जो सर्दियों में खेला गया और COVID-19 प्रतिबंधों के बिना।
    • कतर ने आठ आधुनिक वातानुकूलित स्टेडियम बनाए, जिनमें लुसैल (80,000 क्षमता) प्रमुख था। कुल 2.45 मिलियन टिकट बिके।​
  • विवाद और तैयारियां
    • मेजबानी पर श्रमिक शोषण, मानवाधिकार और LGBTQ अधिकारों जैसे विवाद रहे।
    • फिर भी, कतर ने 2.7 मिलियन बुनियादी ढांचे का विकास किया।
    • फीफा की स्थापना 1904 में हुई, मुख्यालय ज्यूरिख में, और गियानी इन्फेंटिनो अध्यक्ष थे।
  • अन्य तथ्य
    • सबसे सफल टीम: ब्राजील (5 खिताब)।
    • 2026 विश्व कप अमेरिका, मैक्सिको, कनाडा संयुक्त रूप से आयोजित करेंगे।​
    • यह आयोजन कतर के लिए ऐतिहासिक रहा, जिसने अरब जगत को वैश्विक फुटबॉल से जोड़ा।​

32. भारतीय मुक्केबाजों ...... ने फरवरी, 2022 में सोफिया, बुल्गारिया में आयोजित 73वें स्ट्रैंड्जा मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीते। [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) निखत जरीन (52 किग्रा.) और नीतू (48 किग्रा.)
Solution:
  • फरवरी, 2022 में बुल्गारिया के सोफिया में आयोजित 73वें स्ट्रैंड्जा मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में भारतीय मुक्केबाजों निखत जरीन (52 किग्रा.) और नीतू (48 किग्रा.) ने स्वर्ण पदक जीते थे।
  • निखत जरीन ने 52 किग्रा. वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया, जबकि नीतू ने 48 किग्रा. वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया।
  • इस टूर्नामेंट को यूरोप के सबसे पुराने और सबसे मजबूत मुक्केबाजी टूर्नामेंटों में से एक माना जाता है, और इसमें भारतीय मुक्केबाजों का यह प्रदर्शन उत्कृष्ट था।
  • टूर्नामेंट का परिचय
    • स्ट्रैंड्जा मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट यूरोप के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित एमेच्योर मुक्केबाजी आयोजनों में से एक है
    • जो 1950 से हर साल बुल्गारिया के सोफिया में होता है। यह टूर्नामेंट दुनिया भर के शीर्ष मुक्केबाजों को आकर्षित करता है
    • ओलंपिक या विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े इवेंट के लिए फॉर्म का संकेत देता है।
  • स्वर्ण पदक विजेताओं की उपलब्धियाँ
    • निखत ज़रीन ने 52 किग्रा वर्ग में फाइनल में यूक्रेन की टेटियाना कोब को हराकर स्वर्ण पदक जीता।
    • यह उनकी स्ट्रैंड्जा में दूसरी स्वर्णिम सफलता थी
    • जिससे वे इस टूर्नामेंट में दो स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय मुक्केबाज बनीं।
    • नीतु घनघास ने 48 किग्रा वर्ग में इटली की एरिका प्रिस्कियांडारो (पूर्व यूथ विश्व चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता) को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया।
  • अन्य भारतीय प्रदर्शन
    • भारतीय दल ने इस टूर्नामेंट में मजबूत प्रदर्शन किया, हालांकि केवल दो स्वर्ण ही मिले।
    • अन्य मुक्केबाजों जैसे सुमित कुंडू (75 किग्रा) ने विश्व चांदी पदक विजेता को हराया लेकिन आगे नहीं बढ़ सके।
    • कुल मिलाकर, भारत ने अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में अपनी मजबूत स्थिति का प्रदर्शन किया।

33. ....... भारत का पहला स्पोर्ट्स यूनिकॉर्न बन गया, जिसका मार्केट कैप 30 जनवरी, 2022 तक 7,600 करोड़ रुपये के उच्च स्तर को छू गया था। [CHSL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) चेन्नई सुपर किंग्स
Solution:
  • चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings - CSK) भारत का पहला स्पोर्ट्स यूनिकॉर्न बन गया।
  • 30 जनवरी, 2022 तक, इसका मार्केट कैप (बाजार पूंजीकरण) ₹7,600 करोड़ के उच्च स्तर को छू गया था।
  • एक यूनिकॉर्न कंपनी वह निजी कंपनी होती है जिसका मूल्यांकन (Valuation) $1 बिलियन (लगभग ₹7,500 करोड़) से अधिक होता है।
  • आईपीएल फ्रेंचाइजी सीएसके ने यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय स्पोर्ट्स टीम बनकर इतिहास रचा।
  • CSK का इतिहास और स्थापना
    • CSK की स्थापना 2008 में हुई, जब इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की शुरुआत हुई। यह IPL की सबसे सफल टीमों में से एक है
    • जिसने अब तक पांच IPL खिताब जीते हैं - 2010, 2011, 2018, 2021 और 2023 में।
    • 2015-2017 तक स्पॉट फिक्सिंग कांड के कारण दो साल के लिए निलंबन झेलने के बावजूद, 2018 में शानदार वापसी की और खिताब जीता।
    • महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में टीम ने IPL में सबसे अधिक प्लेऑफ (11 बार) और फाइनल (9 बार) में जगह बनाई है, साथ ही उच्चतम जीत प्रतिशत (58.41%) का रिकॉर्ड है।
  • स्वामित्व और संरचना
    • CSK का स्वामित्व चेन्नई सुपर किंग्स क्रिकेट लिमिटेड (CSKCL) के पास है, जो इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड की होल्डिंग कंपनी है।
    • प्रमुख मालिक एन. श्रीनिवासन हैं, जो इंडिया सीमेंट्स के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं।
    • 2024 तक CSK की ब्रांड वैल्यू 122 मिलियन डॉलर आंकी गई, जो इसे IPL की दूसरी सबसे मूल्यवान फ्रेंचाइजी बनाती है।
  • यूनिकॉर्न स्टेटस कैसे हासिल हुआ
    • यह उपलब्धि IPL 2022 सीजन से ठीक पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम के जरिए मिली, जहां CSK के शेयर्स की ट्रेडिंग तेजी से बढ़ी।
    • IPL फ्रेंचाइजियों की बढ़ती लोकप्रियता, ब्रांड वैल्यू और कमाई (स्पॉन्सरशिप, ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से) ने वैल्यूएशन को बढ़ावा दिया।
    • CSK ने साबित किया कि स्पोर्ट्स एंटरप्राइज भी यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो सकते हैं, हालांकि यह स्टॉक मार्केट लिस्टिंग से पहले की वैल्यूएशन थी।
  • उपलब्धियां और प्रभाव
    • CSK ने IPL में रुतुराज गायकवाड़, रविंद्र जडेजा, एमएस धोनी जैसे सितारों के दम पर स्थायी ब्रांड बनाया।
    • 2025 IPL में रुतुराज कप्तान हैं, कोच स्टीफन फ्लेमिंग। यह मील का पत्थर भारतीय स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के लिए है
    • जहां अब अन्य IPL टीमों जैसे MI, KKR भी ऊंचे वैल्यूएशन की ओर बढ़ रही हैं।

34. वॉलीबॉल के अलावा, निम्नलिखित में से किस खेल में खिलाड़ी स्क्रीन तकनीक का उपयोग करते हैं? [CGL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) बास्केटबॉल
Solution:
  • स्क्रीन तकनीक (Screen Technique), जिसका उपयोग वॉलीबॉल में प्रतिद्वंद्वी को गेंद को हिट करते हुए देखने से रोकने के लिए किया जाता है
  • उपयोग बास्केटबॉल में भी किया जाता है। बास्केटबॉल में, इसे आमतौर पर 'स्क्रीन' या 'पिक' कहा जाता है
  • जहां एक आक्रामक खिलाड़ी अपने शरीर को स्थिर करके एक रक्षात्मक खिलाड़ी के रास्ते को अवरुद्ध करता है
  • जिससे उनके साथी खिलाड़ी को शूट करने या पास देने के लिए जगह मिल जाती है।
  • स्क्रीन तकनीक क्या है?
    •  गेंद वाले अपने साथी को खुला स्थान मिल सके। यह तकनीक आक्रामक रणनीति का हिस्सा है
    • इसे "पिक" (Pick) या "स्क्रीन सेट करना" भी कहा जाता है।
    • वॉलीबॉल में यह सर्विस रिसीव के दौरान विरोधी के दृष्टिकोण को बाधित करने या ब्लॉकर की पोजीशनिंग के लिए इस्तेमाल होती है
    • जबकि बास्केटबॉल में यह कोर्ट पर गेंदबाज़ी और शूटिंग के अवसर पैदा करने के लिए प्रमुख है।
  • बास्केटबॉल में स्क्रीन का उपयोग
    • बास्केटबॉल में स्क्रीन दो मुख्य प्रकार की होती है:
    • ऑन-बॉल स्क्रीन: गेंद वाले खिलाड़ी के ठीक सामने एक साथी स्क्रीन सेट करता है
    • जिससे डिफेंडर को रोक दिया जाता है। इससे गेंदबाज़ी करने वाला ड्राइव कर सकता है या शूट कर सकता है।
    • ऑफ-बॉल स्क्रीन: गेंद से दूर एक खिलाड़ी स्क्रीन सेट करके दूसरे आक्रामक खिलाड़ी को खुला स्थान देता है
    • जो पास लेकर शूटिंग या कटिंग के लिए तैयार हो जाता है।
    • यह तकनीक NBA, FIBA और सभी स्तरों के बास्केटबॉल मैचों में आम है।
    • उदाहरणस्वरूप, स्टीफन कुर्री जैसे प्लेयर्स अक्सर ऑफ-बॉल स्क्रीन का फायदा उठाते हैं।
    • नियमों के अनुसार, स्क्रीन सेट करने वाला खिलाड़ी स्थिर रहता है (मूव नहीं करता), अन्यथा फाउल माना जाता है।
  • वॉलीबॉल vs बास्केटबॉल में अंतर
    • वॉलीबॉल में स्क्रीन मुख्यतः सर्व रिसीव या ब्लॉक के समय विरोधी को भ्रमित करने के लिए होती है
    • जबकि बास्केटबॉल में यह आक्रामक गतिशीलता बढ़ाने वाली कोर स्ट्रैटेजी है।
    • दोनों खेलों में यह फिजिकल कॉन्टैक्ट सीमित रखने के नियमों का पालन करती है।

35. पॉवर लिफ्टिंग (power lifting) में कौन-सी प्रतियोगिताएं होती हैं? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) स्क्वाट्स, बेंच प्रेस और डेड लिफ्ट
Solution:
  • पॉवर लिफ्टिंग (Power Lifting) में तीन मुख्य प्रतियोगिताएं शामिल होती हैं
  • स्क्वॉट्स (Squats), बेंच प्रेस (Bench Press), और डेड लिफ्ट (Dead Lift)। यह एक शक्ति खेल है
  • जहां एथलीट इन तीनों लिफ्टों में अपने अधिकतम वजन उठाने की क्षमता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करते हैं।
  • ये लिफ्टें शरीर की समग्र शक्ति और सहनशक्ति का प्रदर्शन करती हैं।
  • मुख्य लिफ्ट्स
    • स्क्वाट, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट पॉवरलिफ्टिंग की मूलभूत प्रतियोगिताएं हैं।
    • प्रत्येक लिफ्ट में एथलीट को तीन प्रयास मिलते हैं, और सबसे भारी वैध लिफ्ट को उनके स्कोर में गिना जाता है।​
    • स्क्वाट: एथलीट बारबेल को कंधों पर रखकर गहराई तक नीचे झुकता है
    • फिर खड़ा होता है। न्यूनतम गहराई यह सुनिश्चित करती है कि कूल्हे घुटनों के स्तर पर आएं।​
    • बेंच प्रेस: लेटकर बारबेल को छाती तक नीचे लाकर दबाना होता है। कंधे, कूल्हे और सिर फर्श से सटे रहते हैं।​
    • डेडलिफ्ट: जमीन से बारबेल को सीधे खींचकर कमर की ऊंचाई तक उठाना। यह अंतिम लिफ्ट होती है।​
  • प्रतियोगिता का प्रारूप
    • एक सामान्य पॉवरलिफ्टिंग मीट तीन फ्लाइट्स में चलती है
    • स्क्वाट फ्लाइट, बेंच प्रेस फ्लाइट, फिर डेडलिफ्ट फ्लाइट। एथलीट अपनी घोषित वजन (अटेम्प्ट) चुनते हैं, जो प्लेटफॉर्म रेफरी वैलिडेट करते हैं।​
    • प्रत्येक लिफ्ट के बाद जज सिग्नल देते हैं—सफेद (गुड लिफ्ट), लाल (फेल)। तीन जजों में से दो सफेद होने पर लिफ्ट पास।
    • महिलाओं और पुरुषों के लिए समान श्रेणियां, साथ ही जूनियर, सीनियर, मास्टर्स उम्र-आधारित।​
  • उप-प्रतियोगिताएं:
    • क्लासिक पॉवरलिफ्टिंग: उपकरण सीमित (सिंगलेट, बेल्ट, रिस्ट रैपर्स)।​
    • इक्विप्ड: नी-रैपर, सूट्स का उपयोग।​
    • यह चित्र 2009 IPF वर्ल्ड चैंपियन डीन बोरिंग को डेडलिफ्ट करते दिखाता है, जो प्रतियोगिता के वातावरण को दर्शाता है।​
  • प्रमुख फेडरेशंस और इवेंट्स
    • IPF (इंटरनेशनल पॉवरलिफ्टिंग फेडरेशन): वर्ल्ड चैंपियनशिप्स आयोजित करता है
    • जिसमें क्लासिक और इक्विप्ड डिविजन। वार्षिक इवेंट्स जूनियर, ओपन, मास्टर्स के लिए।
    • वर्ल्ड पॉवरलिफ्टिंग: एंटी-डोपिंग पर फोकस, समान क्लासेस।​
    • भारत में पॉवरलिफ्टिंग इंडिया राज्य/राष्ट्रीय चैंपियनशिप्स चलाती है। कॉमनवेल्थ/एशियन चैंपियनशिप्स भी होते हैं।​
    • वजन श्रेणियां पुरुषों में 52kg से 120kg+ तक, महिलाओं में 47kg से 84kg+।​
  • नियम और वैरिएशंस
    • IPF नियमों के तहत डोपिंग टेस्ट अनिवार्य।
    • लिफ्ट फेल होने के कारण: गहराई न पहुंचना, लॉकआउट न करना। बेंच पर पॉज अनिवार्य।
  • वैरिएशंस:
    • सिंगल-प्लाई सूट्स बनाम मल्टी-प्लाई।
    • रॉ पॉवरलिफ्टिंग: न्यूनतम गियर।

36. ब्रिटिश एम्पायर गेम्स की शुरुआत कब हुई थी? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 1930
Solution:
  • ब्रिटिश एम्पायर गेम्स (British Empire Games) की शुरुआत 1930 में हुई थी।
  • ये खेल कनाडा के हैमिल्टन शहर में आयोजित किए गए थे।
  • यह आयोजन राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) का अग्रदूत था
  • जिसे समय के साथ अलग-अलग नामों से जाना गया (जैसे ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स, ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स)।
  • 1930 के खेलों में नौ देशों के लगभग 400 एथलीटों ने भाग लिया था।
  • शुरुआत कब और कहाँ हुई?
    • पहले ब्रिटिश एम्पायर गेम्स 16 अगस्त 1930 को हैमिल्टन, कनाडा में शुरू हुए
    • इन खेलों में उस समय के ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़े 11 देशों के लगभग 400 खिलाड़ियों ने प्रतिस्पर्धा की
    • जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, स्कॉटलैंड, वेल्स आदि।
  • खेलों का उद्देश्य और विशेषताएँ
    • इन खेलों का उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के विभिन्न देशों के बीच खेल के माध्यम से मित्रता, एकता और समझ–बूझ बढ़ाना था।
    • पहले संस्करण में 8 प्रमुख खेल (जैसे एथलेटिक्स, तैराकी, शूटिंग, वजन उठाना आदि) और लगभग 59 प्रतिस्पर्धात्मक स्पर्धाएँ थीं
    • जिनमें सभी प्रतियोगिताएँ व्यक्तिगत (सिंगल इवेंट) थीं, कोई टीम इवेंट नहीं था।
  • नाम की धीरे‑धीरे बदलती परंपरा
    • 1930 से 1950 तक इन खेलों को आधिकारिक तौर पर “ब्रिटिश एम्पायर गेम्स” (British Empire Games) ही कहा जाता रहा।
    • 1954 से 1966 तक इनका नाम बदलकर “ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स” रखा गया
    • क्योंकि समय के साथ ब्रिटिश साम्राज्य की जगह “राष्ट्रमंडल” (Commonwealth) की अवधारणा मजबूत हो रही थी।
    • आखिरकार, 1978 से इन खेलों को आधिकारिक रूप से “कॉमनवेल्थ गेम्स” (Commonwealth Games) कहा जाने लगा, जो आज तक चला आ रहा है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास
    • इस तरह के खेल आयोजित करने की पहली औपचारिक रूप रेखा 1891 में ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार व शिक्षक जॉन एशले कूपर ने दी थी
    • जो चार साल में एक बार होने वाले “इंपीरियल गेम्स” (साम्राज्य खेल) की वकालत करते थे।
    • कूपर के विचार और ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर खेल के माध्यम से एकता बनाए रखने की पहल ने 1930 में हैमिल्टन में इन खेलों को वास्तविक आयोजन का रूप दिया।
  • द्वितीय विश्व युद्ध और बाद का चरण
    • इन खेलों को मूल रूप से हर चार साल बाद आयोजित करने की योजना थी, लेकिन 1942 और 1946 के संस्करण द्वितीय विश्व युद्ध के कारण रद्द हो गए।
    • युद्ध के बाद फिर 1950 में खेल शुरू हुए और इनके नाम‑परिवर्तन के साथ‑साथ भाग लेने वाले स्वतंत्र राष्ट्रों की संख्या में भी लगातार वृद्धि होती गई।
  • संक्षेप में महत्व
    • ब्रिटिश एम्पायर गेम्स 1930 में शुरू होकर आज के राष्ट्रमंडल खेलों की नींव बने
    • जो ब्रिटिश साम्राज्य के इतिहास और उसके बाद के राष्ट्रमंडल के विकास को दर्शाते हैं।
    • इस श्रृंखला ने न केवल खेलकूद में उत्कृष्टता बढ़ाई, बल्कि पूर्व उपनिवेशों और ब्रिटेन के बीच वैचारिक और सांस्कृतिक संपर्क को भी जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

37. तैराकी (Swimming) में लेन की न्यूनतम चौड़ाई मीटर में कितनी होती है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (I-पाली)2.13]

Correct Answer: (b) 2.13
Solution:
  • तैराकी में न्यूनतम लेन की चौड़ाई 2.13 मीटर होती है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय मानक के अनुसार है
  • हालांकि, ओलंपिक खेलों और विश्व चैंपियनशिप जैसे प्रमुख आयोजनों के लिए न्यूनतम लेन की चौड़ाई 2.50 मीटर होती है, लेकिन अन्य प्रतियोगिताओं के लिए 2.13 मीटर स्वीकार्य है.  
  • FINA मानक
    • अंतरराष्ट्रीय तैराकी महासंघ (FINA, अब World Aquatics) द्वारा निर्धारित न्यूनतम लेन चौड़ाई ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप जैसे उच्च स्तरीय आयोजनों के लिए 2.5 मीटर है।
    • यह चौड़ाई तैराकों को एक-दूसरे से टकराए बिना स्वतंत्र रूप से तैरने की अनुमति देती है।
    • कम स्तर की प्रतियोगिताओं जैसे महाद्वीपीय चैंपियनशिप में यह 2.13 मीट तक कम हो सकती है।
  • पूल के प्रकार अनुसार
    • 50 मीटर पूल (ओलंपिक आकार): लेन चौड़ाई न्यूनतम 2.5 मीटर, कुल 8 या 10 लेन के साथ पूल की चौड़ाई 25 मीटर।
    • 25 मीटर पूल (शॉर्ट कोर्स): न्यूनतम 2.0 मीटर।​
    • पूल के दोनों छोर पर अतिरिक्त 2.5 मीटर चौड़े क्षेत्र होने चाहिए।​
  • लेन की विशेषताएँ
    • लेन रस्सियों (लेन डिवाइडर्स) से अलग की जाती हैं, जो पूरे पूल में फैली होती हैं।
    • ये रस्सियाँ तैराकों को दिशा भटकने से रोकती हैं और पानी की हलचल कम करती हैं।
    • पहली और आखिरी लेन हरी रस्सियों वाली होती हैं, बीच वाली नीली।
  • महत्वपूर्ण कारण
    • यह न्यूनतम चौड़ाई तैराकों की सुरक्षा, निष्पक्षता और प्रदर्शन सुनिश्चित करती है। संकरी लेन से टकराव का खतरा बढ़ता है
    • जबकि पर्याप्त चौड़ाई स्प्रिंट और लंबी दूरी की दौड़ दोनों में फायदा देती है।
    • FINA नियम पूल के तापमान (25-28°C) और गहराई (पानी की सतह से कम से कम 2 मीटर) भी निर्दिष्ट करते हैं।

38. किस ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में 'ग्लाइड टेक्निक' (Glide Technique) का प्रयोग में किया जाता है? [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) शॉट पुट
Solution:
  • 'ग्लाइड टेक्निक' (Glide Technique) का प्रयोग शॉट पुट (गोला फेंक) की स्पर्धा में किया जाता है।
  • इस तकनीक में, एथलीट एक चिकनी, फिसलने वाली गति (Gliding motion) का उपयोग करते हुए वृत्त (Circle) के पीछे से आगे की ओर जाता है
  • शक्ति को अधिकतम किया जा सके और गोले को फेंकने से पहले गति उत्पन्न की जा सके।
  • इसे अक्सर अमेरिकी शॉट पुटर पैरी ओ'ब्रायन द्वारा लोकप्रिय बनाई गई ओ'ब्रायन ग्लाइड के रूप में जाना जाता है।
  • शॉट पुट स्पर्धा का परिचय
    • शॉट पुट ट्रैक एंड फील्ड का एक फील्ड इवेंट है
    • जिसमें एथलीट को 7.26 मीटर (पुरुष) या 4.72 मीटर (महिला, जूनियर स्तर पर भिन्न) व्यास वाले सर्कल से 4-7.26 किग्रा की शॉट को जितना दूर फेंकना होता है।
    • प्रतियोगिता में आमतौर पर 6 प्रयास मिलते हैं, और सबसे लंबी दूरी वाला विजेता होता है।
    • यह ओलंपिक और विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप का हिस्सा है।
    • डिस्कस थ्रो, जेवलिन या हैमर थ्रो जैसी अन्य थ्रोइंग स्पर्धाओं में ग्लाइड का उपयोग नहीं होता।
  • ग्लाइड टेक्निक कैसे की जाती है?
    • यह तकनीक चरणबद्ध तरीके से होती है:
    • स्टार्टिंग पोजीशन: एथलीट सर्कल के पिछले हिस्से पर खड़ा होता है
    • पीठ थ्रो दिशा की ओर, दाहिना पैर (राइट-हैंडेड के लिए) पीछे और बायां पैर आगे। शॉट गर्दन के नीचे रखी जाती है।
    • पावर पोजीशन: घुटनों को मोड़कर शरीर को नीचा रखा जाता है
    • फिर दाहिने पैर से जोरदार धक्का देकर बाएं पैर को आगे स्लाइड किया जाता है।
    • ग्लाइड मूवमेंट: पूरा शरीर सर्कल के सामने की ओर तेजी से फिसलता है
    • बाएं पैर टो-बोर्ड (स्टॉप बोर्ड) के पास रुकता है और दाहिना पैर बीच में आ जाता है। इस दौरान गति बनी रहती है।
    • डिलीवरी: बाएं पैर पर वजन डालकर कूल्हों और छाती को घुमाया जाता है
    • फिर हाथ को ऊपर की ओर फैलाकर शॉट फेंकी जाती है।
    • फॉलो-थ्रू के साथ शरीर सर्कल से बाहर निकल सकता है, लेकिन फुट फॉल्ट नहीं होना चाहिए।
    • यह प्रक्रिया 1-2 सेकंड में पूरी होती है और कमजोर कंधों वाले एथलीटों के लिए उपयुक्त है।
  • अन्य तकनीकों से तुलना
    • रोटेशनल तकनीक में एथलीट सर्कल में 1.5-2 चक्कर लगाते हैं
    • जो अधिक जटिल लेकिन कभी-कभी लंबी दूरी देती है।
    • ग्लाइड सरल होने से शुरुआती एथलीटों को आसानी होती है।​
  • प्रसिद्ध एथलीट और इतिहास
    • ग्लाइड टेक्निक का उपयोग अमेरिकी एथलीट रेया स्टॉप्सन (पुरुष रिकॉर्ड धारक) जैसे खिलाड़ियों ने किया।
    • यह 19वीं सदी से प्रचलित है, लेकिन 1970-80 के दशक में रोटेशनल ने लोकप्रियता हासिल की।
    • विश्व रिकॉर्ड 23.56 मीटर (पुरुष) और 22.63 मीटर (महिला) हैं।
    • भारतीय एथलीट जैसे तेजिंदर पाल सिंह तोलिया ने भी इसे अपनाया। ओलंपिक में यह स्पर्धा 1896 से है।​
  • लाभ और नुकसान
  • लाभ:
    • सरल सीखना, कम जगह की जरूरत।
    • मजबूत पैरों और कोर पर निर्भर, कंधों पर कम दबाव।
  • नुकसान:
    • रोटेशनल से कम गति मिल सकती है।
    • ऊंचाई वाली शॉट्स में कम प्रभावी।

39. खो-खो की टीम में खिलाड़ियों की संख्या कितनी होती है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 12
Solution:
  • खो-खो की टीम में 12 खिलाड़ी होते हैं, लेकिन मैदान पर एक समय में केवल 9 खिलाड़ी ही खेलते हैं।
  • शेष 3 खिलाड़ी स्थानापन्न (Substitute) होते हैं। चूंकि प्रश्न में 'टीम में खिलाड़ियों की संख्या' पूछी गई है
  • जिसमें स्थानापन्न खिलाड़ी भी शामिल होते हैं, तो उत्तर 12 होगा। यदि केवल मैदान पर खिलाड़ियों की संख्या पूछी जाती, तो उत्तर 9 होता।
  • टीम संरचना
    • जबकि 1 खिलाड़ी सक्रिय होकर विरोधी खिलाड़ियों को छूने की कोशिश करता है।
    • बचाव करने वाली टीम के 8 खिलाड़ी मैदान पर दौड़ते हैं और छूने से बचने का प्रयास करते हैं ।
  • मैच प्रारूप
    • एक मैच में दो पारियाँ होती हैं, प्रत्येक पारी में दोनों टीमों को 7-7 मिनट चेज़ करने और 7-7 मिनट बचाव करने का समय मिलता है
    • यानी कुल 4 टर्न। यदि स्कोर बराबर रहता है
    • तो लीग अंक तय करने के लिए अतिरिक्त मैच या पर्ची प्रणाली का उपयोग होता है।
    • रिजर्व खिलाड़ी घायल या थके खिलाड़ियों की जगह ले सकते हैं ।
  • मैदान और नियम
    • मानक मैदान 27 मीटर लंबा और 16 मीटर चौड़ा होता है, जिसमें सेंट्रल लेन, क्रॉस लेन और दो पोस्ट होते हैं।
    • चेज़ करने वाला खिलाड़ी "खो" कहकर साथी को टैग पास करता है।
    • फाउल जैसे लाइन क्रॉस करना या गलत टैग से आउट हो सकते हैं। यह खेल गति, चपलता और रणनीति पर आधारित है ।
  • अन्य विवरण
    • खो-खो की उत्पत्ति महाराष्ट्र से मानी जाती है और यह कबड्डी के साथ भारत के दो प्रमुख टैग खेलों में से एक है।
    • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हो रहा है, जैसे खो-खो वर्ल्ड कप। स्कूलों से लेकर प्रोफेशनल लीग तक खेला जाता है ।

40. निम्नलिखित भारतीय भारोत्तोलकों में से किसने विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप 2022 (World Weightlifting Championships 2022) में महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) सैखोम मीराबाई चानू
Solution:
  • विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप 2022 (World Weightlifting Championships 2022) का आयोजन कोलंबिया के बोगोटा में किया गया था।
  • इसमें भारतीय भारोत्तोलक सैखोम मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था।
  • उन्होंने कुल 200 किग्रा (स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 113 किग्रा) का भार उठाकर यह उपलब्धि हासिल की थी। वह इस चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय थीं।
  • प्रतियोगिता विवरण
    • यह चैंपियनशिप 28 नवंबर से 8 दिसंबर 2022 तक कोलंबिया के बोगोटा में आयोजित हुई थी।
    • मीराबाई चानू ने स्नैच में 85 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 107 किग्रा का कुल भार 192 किग्रा उठाकर रजत पदक हासिल किया।
    • स्वर्ण पदक चीन की लो झिहाई को 194 किग्रा के साथ मिला, जबकि कांस्य उज्बेकिस्तान की शाखनोमोन इस्लामोवा को 190 किग्रा के साथ।
  • मीराबाई चानू का प्रदर्शन
    • मणिपुर की यह स्टार भारोत्तोलक टोक्यो ओलंपिक 2020 की रजत पदक विजेता हैं।
    • 2022 विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने स्नैच के तीनों प्रयास सफल रखे, लेकिन क्लीन एंड जर्क में थोड़ी कमी रह गई।
    • यह उनका विश्व चैंपियनशिप में दूसरा पदक था—पहला स्वर्ण 2017 में 48 किग्रा वर्ग में जीता था।
  • भारत का योगदान
    • भारत ने इस चैंपियनशिप में मीराबाई के अलावा कोई अन्य पदक नहीं जीता।
    • उन्होंने देश के लिए कुल लिफ्ट रिकॉर्ड स्थापित किया
    • पेरिस ओलंपिक 2024 की तैयारी में महत्वपूर्ण योगदान दिया। चैंपियनशिप में 93 देशों के 469 खिलाड़ी शामिल हुए थे।
  • उपलब्धियां और महत्व
    • मीराबाई भारत की सबसे सफल भारोत्तोलकों में शुमार हैं
    • जिन्होंने कर्णम मल्लेश्वरी और कुंजरानी देवी के बाद विश्व चैंपियनशिप में कई पदक जीते।
    • 2022 का यह रजत उनके करियर का मील का पत्थर साबित हुआ, जो ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए उपयोगी रहा।