विविध (रसायन विज्ञान)

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1. कुछ सॉस और शरबत में खाद्य परिरक्षक के रूप में कौन-सा रासायनिक यौगिक प्रयोग किया जाता है, जो उनके प्राकृतिक रंग को बरकरार रखता है और बैक्टीरिया से उनकी रक्षा करता है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट
Solution:
  • कुछ सॉस और शराब में खाद्य परिरक्षक के रूप में पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट (Potassium Metabisulphite) रासायनिक यौगिक का प्रयोग किया जाता है
  • जो उनके प्राकृतिक रंग को बरकरार रखता है और बैक्टीरिया से उनकी रक्षा करता है।
  • पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट का रासायनिक सूत्र K₂S₂O₅ है
  • रासायनिक संरचना और गुण
    • पोटेशियम मेटाबाइसल्फाइट सफेद क्रिस्टलीय पाउडर है
    • जो पानी में घुलनशील होता है और सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) गैस मुक्त करता है।
    • यह एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है, जो ऑक्सीडेशन को रोककर रंग ब्राउनिंग से बचाता है।
    • इसके अतिरिक्त, यह सूक्ष्मजीवों के एंजाइम्स को निष्क्रिय करके वृद्धि रोकता है।
  • कार्यप्रणाली
    • यह यौगिक खाद्य पदार्थों में मिलाकर बैक्टीरिया की कोशिका झिल्ली को क्षतिग्रस्त करता है
    • pH को कम करके अम्लीय वातावरण बनाता है।
    • शरबत में यह फलों के प्राकृतिक रंग को लंबे समय तक संरक्षित रखता है
    • जबकि सॉस में किण्वन रोकता है। सोडियम बेंजोएट टमाटर सॉस में वैकल्पिक रूप से प्रयुक्त होता है
    • लेकिन रंग संरक्षण के लिए मेटाबाइसल्फाइट श्रेष्ठ है।
  • अन्य परिरक्षक विकल्प
    • सोडियम बेंजोएट: मुख्यतः अम्लीय सॉस और जूस में बैक्टीरिया रोकने के लिए, लेकिन रंग संरक्षण सीमित।
    • सोडियम मेटाबाइसल्फाइट: समान कार्य, लेकिन पोटेशियम रूप अधिक स्थिर।
    • ये यौगिक FSSAI द्वारा 0.1-0.2% तक अनुमत हैं।

2. 1937 में, सर क्रिस्टोफर इंगोल्ड (Sir Christopher Ingold) के साथ किसने एल्किल हेलाइड और संबंधित यौगिकों के नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं का प्रस्ताव रखा था? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) एडवर्ड डेविस ह्यूजेस
Solution:
  • वर्ष 1937 में सर क्रिस्टोफर इंगोल्ड (Sir Christopher Ingold) के साथ एडवर्ड डेविस ह्यूजेस (Edward Davies Hughes) ने एल्किल हैलाइड और संबंधित यौगिकों के नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं का प्रस्ताव रखा था।
  • एल्किल हैलाइड कार्बनिक यौगिक होते हैं
  • जिनमें एक हैलोजन परमाणु होता है, जो एल्किल समूह से जुड़ा होता है।
  • SN2 अभिक्रिया का विस्तार
    • SN2 (Substitution Nucleophilic Bimolecular) एक एकल-चरणीय संयुक्त प्रक्रिया है
    • जिसमें न्यूक्लियोफाइल (जैसे OH⁻) पीछे से हमला करता है, जिससे विन्यास उलट जाता है।
    • प्राथमिक (primary) और द्वितीयक (secondary) एल्किल हेलाइड्स में यह द्वितीय-क्रम (second-order) गतिकी दिखाती है
    • जो दोनों रिएक्टेंट्स की सांद्रता पर निर्भर करती है।
    • स्टेरिक बाधा (steric hindrance) न्यून होने पर यह पसंदीदा होती है।
  • SN1 अभिक्रिया का विस्तार
    • SN1 (Substitution Nucleophilic Unimolecular) दो-चरणीय है
    • पहले धीमा आयनन (ionization) कार्बोकेशन मध्यवर्ती (carbocation intermediate) बनाता है
    • फिर न्यूक्लियोफाइल तेजी से जुड़ता है, जिससे रेसमाइजेशन होता है।
    • तृतीयक (tertiary) एल्किल हेलाइड्स में प्रथम-क्रम (first-order) गतिकी होती है।
    • ध्रुवीय प्रोटिक विलायन (polar protic solvents) इसे बढ़ावा देते हैं।
  • वैज्ञानिक महत्व
    • इंगोल्ड-ह्यूजेस के 1937 के शोध ने गतिकीय प्रमाणों से तंत्रों को अलग किया
    • जिससे सब्सट्रेट संरचना, विलायन और न्यूक्लियोफाइल के आधार पर भविष्यवाणी संभव हुई।
    • यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में यह सहयोग कार्बनिक रसायनशास्त्र को अनुभवजन्य से यांत्रिकीय दृष्टिकोण की ओर ले गया।

3. किस कार्बनिक रासायनिक यौगिक की 273-278K ताप पर नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया कराके बेंजीन डायजोनियम क्लोराइड तैयार किया जाता है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) ऐनिलीन
Solution:
  • ऐनिलीन कार्बनिक रसायन यौगिक की 273 - 278K ताप पर नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया कराके बेंजीन डायजोनियम क्लोराइड तैयार किया जाता है।
  • अभिक्रिया का समीकरण
    • एनिलीन को पहले हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) में घोलकर इसकी लवण अवस्था (एनिलीनियम क्लोराइड) बनाई जाती है
    • फिर सोडियम नाइट्राइट (NaNO₂) को धीरे-धीरे ठंडे HCl में मिलाकर नाइट्रस अम्ल इन-सीटू उत्पन्न किया जाता है।
    • निम्नलिखित अभिक्रिया होती है:
    • यह डायज़ोटाइजेशन अभिक्रिया कहलाती है
    • जिसमें प्राथमिक आरोमेटिक एमाइन का अमीन समूह (-NH₂) डायजोनियम समूह (-N₂⁺) में परिवर्तित हो जाता है।
  • तापमान का महत्व
    • 273-278 K (0-5°C) तापमान बनाए रखना आवश्यक है
    • क्योंकि डायजोनियम लवण अत्यंत अस्थिर होते हैं
    • उच्च तापमान पर विघटित होकर फेनॉल या अन्य उत्पाद बना देते हैं।
    • निम्न तापमान पर अभिक्रिया स्थिर डायजोनियम लवण प्राप्त करने में सहायक होता है।
  • विस्तृत प्रक्रिया
    • चरण 1: एनिलीन को संकेंद्रित HCl में घोलें और मिश्रण को बर्फ के स्नान में ठंडा करें (0-5°C)।
    • चरण 2: अलग से NaNO₂ को ठंडे HCl में घोलें, जिससे HNO₂ बने (NaNO₂ + HCl → HNO₂ + NaCl)।
    • चरण 3: NaNO₂ विलयन को धीरे-धीरे (ड्रॉपवाइज) एनिलीन के ठंडे HCl विलयन में मिलाएं, तापमान 273-278 K पर नियंत्रित रखें।
    • चरण 4: अभिक्रिया पूर्ण होने पर साफ़ विलयन प्राप्त होता है
    • जिसमें बेंजीन डायजोनियम क्लोराइड आयन विद्यमान होता है।
  • डायजोनियम लवण का महत्व
    • बेंजीन डायजोनियम क्लोराइड कार्बनिक संश्लेषण में बहुमूल्य मध्यवर्ती है।
    • इसका उपयोग संडमेयर अभिक्रिया (क्लोरो-, ब्रोमो-बेंजीन बनाने हेतु), गुलाम अभिक्रिया (फेनॉल बनाने हेतु), कपलिंग अभिक्रिया (एज़ो डाई बनाने हेतु) आदि में होता है।

4. एसिडिक ड्रेन क्लीनर ....... या ....... अम्ल से बने होते हैं, जो मोटे बालों, भोजन, ग्रीस, साबुन के मैल या पेपर-आधारित गंदगी को 15 मिनट या उससे कम समय में साफ करने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली होते हैं। [CGL (T-I) 20 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) सल्फ्यूरिक, हाइड्रोक्लोरिक
Solution:
  • एसिडिक ड्रेन क्लीनर सल्फ्यूरिक या हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से बने होते हैं
  • जो मोटे बालों, भोजन, ग्रीस, साबुन के मैल या पेपर-आधारित गंदगी को 15 मिनट या उससे कम समय में साफ करने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली होते हैं।
  • एसिडिक क्लीनर कैसे काम करते हैं
    • ये क्लीनर मजबूत अम्लों जैसे सल्फ्यूरिक एसिड (H₂SO₄) या हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) पर आधारित होते हैं
    • जो जैविक पदार्थों को रासायनिक प्रतिक्रिया द्वारा विघटित कर देते हैं।
    • बालों के प्रोटीन, ग्रीस की वसा और पेपर के सेल्यूलोज को ये अम्ल तेजी से तोड़ते हैं
    • जिससे रुकावट पिघल जाती है। परीक्षणों में, ऐसे क्लीनर 70% तक बाल और 80% जैविक मैल को घोल चुके हैं।
  • प्रभावी उपयोग के तरीके
    • नाली में सीधे डालें और 10-15 मिनट प्रतीक्षा करें, फिर गर्म पानी से धो लें।
    • मोटे बालों या ग्रीस जैसी जिद्दी रुकावटों के लिए ये सबसे शक्तिशाली साबित होते हैं
    • जबकि एंजाइम क्लीनर केवल हल्के जैविक कचरे पर काम करते हैं।
    • छोटी रुकावटों के लिए क्षारीय क्लीनर पर्याप्त, लेकिन भारी गंदगी के लिए एसिडिक जरूरी।
  • सावधानियां और खतरे
    • ये क्लीनर पाइपों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, खासकर पीवीसी या धातु नलियों को।
    • हमेशा दस्ताने, चश्मा पहनें और अच्छी हवा वाले स्थान पर इस्तेमाल करें
    • क्योंकि ये भाप विषैली पैदा करते हैं। बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें।

5. पॉश्चरीकरण विधि में सूक्ष्म जीवों को मारने के लिए दूध को किस तापमान (डिग्री सेल्सियस ) पर 15 से 30 सेकंड के लिए गर्म किया जाता है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 70
Solution:
  • पॉश्चरीकरण विधि में सूक्ष्मजीवों को मारने के लिए दूध को लगभग 70 डिग्री सेल्सियस पर 15 से 30 सेकंड के लिए गर्म किया जाता है।
  • पॉश्चरीकरण एक ऐसी क्रिया है जिसमें खाद्य पदार्थ को हल्की गर्मी से उपचारित किया जाता है।
  • पॉश्चरीकरण क्या है?
    • बिना इसके स्वाद या पोषण मूल्य को अधिक प्रभावित किए।
    • लुई पाश्चर ने 1860 के दशक में इस विधि की खोज की थी।
    • यह दूध को सुरक्षित बनाता है और इसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाता है।
  • मुख्य प्रकार की विधियां
    • पॉश्चरीकरण की दो प्रमुख विधियां प्रचलित हैं:
  • निम्न तापमान लंबे समय (LTLT या VAT Pasteurization)
    • दूध को 62-65°C पर 30 मिनट तक रखा जाता है।
    • यह पारंपरिक विधि है जो अधिकांश रोगजनक बैक्टीरिया को मारती है।
  • उच्च तापमान अल्प समय (HTST)
    • दूध को 71.7-72°C पर 15-30 सेकंड तक गर्म किया जाता है
    • फिर तुरंत 4°C से नीचे ठंडा किया जाता है।
    • यह आधुनिक उद्योगों में सबसे आम है क्योंकि यह तेज और कुशल है।
  • प्रक्रिया कैसे काम करती है?
    • दूध को पहले फिल्टर किया जाता है, फिर प्लेट हीट एक्सचेंजर में गर्म किया जाता होल्डिंग ट्यूब में रखा जाता है
    • जहां यह निर्दिष्ट तापमान और समय तक रहता है। उसके बाद रीजेनरेटिव कूलिंग से ठंडा किया जाता है।
    • यह प्रक्रिया 99.99% रोगजनक सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देती है
    • लेकिन कुछ गर्मी प्रतिरोधी स्पोर्स बच सकते हैं।
  • लाभ और सीमाएं
    • लाभ: दूध सुरक्षित हो जाता है, पोषक तत्व जैसे विटामिन और प्रोटीन बरकरार रहते हैं
    • यह 2-3 सप्ताह तक फ्रिज में ताजा रहता है।
    • सीमाएं: पूर्ण नस्टरलाइजेशन नहीं होता, इसलिए रेफ्रिजरेशन जरूरी है
    • उच्च तापमान पर स्वाद में हल्का परिवर्तन आ सकता है।

6. कौन-सा सिद्धांत मानसिक परिसरों में लिगैंड बॉन्डिंग और डी ऑर्बिटल्स के क्षरण और धातु परिसरों की ज्यामिति और डी ऑर्बिटल्स के विभाजन के बीच संबंधों पर चर्चा करता है? [CGL (T-I) 05 दिसंबर, 2022 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) क्रिस्टल फील्ड थ्योरी
Solution:
  • क्रिस्टल फील्ड थ्योरी में लिगैंड बॉन्डिंग और डी ऑर्बिटल्स के क्षरण और धातु परिसरों की ज्यामिति और डी ऑर्बिटल्स के विभाजन के बीच संबंधों का उल्लेख है।
  • यह सिद्धांत (थ्योरी) हंस बेथे और जॉन हैस्ब्रुक वैन वेलेक द्वारा विकसित किया गया था।
  • इस थ्योरी में यह माना जाता है कि आयन सरल बिंदु आवेश हैं।
  • सिद्धांत का परिचय
    • यह वैलेंस बॉन्ड थ्योरी (VBT) की सीमाओं को दूर करता है
    • मॉलिक्यूलर ऑर्बिटल थ्योरी (MOT) के सिद्धांतों पर आधारित है।
    • लिगैंड्स के रूप में σ-डोनर और π-एक्सेप्टर या π-डोनर व्यवहार को ध्यान में रखते हुए
    • यह धातु d-ऑर्बिटल्स और लिगैंड ऑर्बिटल्स के बीच ओवरलैपिंग से बॉन्डिंग की व्याख्या करता है।
  • मुख्य अवधारणाएं
    • लिगैंड फील्ड थ्योरी निम्नलिखित प्रमुख संबंधों पर केंद्रित है:
    • d-ऑर्बिटल Splitting: स्वतंत्र धातु आयन में penta-degenerate d-ऑर्बिटल्स लिगैंड क्षेत्र (ligand field) के प्रभाव से विभाजित हो जाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, ऑक्टाहेड्रल ज्यामिति में निचले ऊर्जा स्तर पर और ऊपरी स्तर पर आते हैं।
    • splitting ऊर्जा Δo लिगैंड की प्रकृति (जैसे CN^- मजबूत क्षेत्र लिगैंड) और ज्यामिति पर निर्भर करती है।
  • लिगैंड बॉन्डिंग
    • σ-बॉन्डिंग में लिगैंड की lone pair धातु के s, p, d (n-1)d hybrid orbitals से मिलती है।
    • π-बॉन्डिंग में π-डोनर लिगैंड्स (जैसे Cl^-) t_{2g} को ऊपर उठाते हैं
    • जबकि π-एक्सेप्टर (जैसे CO) t_{2g} को नीचे खींचते हैं, जिससे Δo बढ़ता है।
    • ज्यामिति का प्रभाव: विभिन्न ज्यामितियों में splitting पैटर्न अलग होते हैं
    • टेट्राहेड्रल में Δt=4/9Δo (उलटा ऑक्टाहेड्रल), स्क्वायर प्लानर में d_{x^2-y^2} सबसे ऊपर।
    • डायग्राम LFT से ज्यामिति और splitting के बीच संबंध दर्शाते हैं।

7. 1860 के दशक में किसने कार्बन डाइऑक्साइड में दाब, ताप और आयतन के संबंधों को व्यक्त करने वाले गैसीय नियम की गहन जांच की ? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) थॉमस एंड्रयूज
Solution:
  • 1860 के दशक में थॉमस एंड्रयूज (Thomas Andrews) ने कार्बन डाइऑक्साइड में दाब, ताप और आयतन के संबंधों को व्यक्त करने वाले गैसीय नियम की गहन जांच की।
  • गणितीय भौतिक वैज्ञानिक विलार्ड गिब्स ने गिब्स मुक्त ऊर्जा समीकरण के समर्थन में इन परिणामों का प्रयोग किया।
  • थॉमस एंड्रयूज का परिचय
    • थॉमस एंड्रयूज (1813-1885) एक आयरिश रसायनज्ञ और भौतिक विज्ञानी थे
    • जिन्होंने बेलफास्ट क्वीन विश्वविद्यालय में पढ़ाया। उन्होंने गैसों के ऊष्मीय गुणों पर विशेष ध्यान दिया
  • प्रयोगों का विवरण
    • एंड्रयूज ने कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) पर उच्च दाब और तापमान वाले प्रयोग किए।
    • उन्होंने एक विशेष उपकरण का उपयोग किया, जिसमें गैस को नियंत्रित स्थितियों में संपीड़ित किया जाता था।
    • दाब बढ़ाने पर आयतन में कमी और तापमान परिवर्तन के प्रभाव को मापा गया।
    • इससे पता चला कि निश्चित तापमान से ऊपर गैस कभी तरल नहीं बनती।
  • महत्वपूर्ण खोजें
    • क्रांतिक बिंदु (Critical Point): उन्होंने CO₂ का क्रांतिक तापमान (31.1°C) और क्रांतिक दाब (73.8 atm) निर्धारित किया
    • जहां गैस और तरल अवस्था अप्रभेद्य हो जाती है।
    • निरंतर फैलाव (Continuity of State): गैस को तरल में बदलने की प्रक्रिया निरंतर है, बिना स्पष्ट अंतर के।
    • वास्तविक गैस व्यवहार: बॉयल्स और चार्ल्स नियम आदर्श गैसों के लिए लागू होते हैं
    • लेकिन उच्च दाब पर CO₂ विचलन दिखाती है।
  • वैज्ञानिक प्रभाव
    • एंड्रयूज का कार्य 1873 में जेम्स क्लर्क मैक्सवेल द्वारा सराहा गया।
    • यह वैन डर वाल्स समीकरण (1873) का आधार बना
    • जो वास्तविक गैसों के लिए दाब (P), आयतन (V) और तापमान (T) संबंध व्यक्त करता है
    • (P+aV2)(V−b)=RT। उनके प्रयोगों ने आधुनिक थर्मोडायनामिक्स को मजबूत किया।

8. बहुपरमाणुक धनायनों के सामान्य नाम प्रायः प्रत्यय ....... के साथ समाप्त होते हैं। [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) ओनियम (-onium)
Solution:
  • बहुपरमाणुक धनायनों के सामान्य नाम प्रायः ओनियम (- onium) प्रत्यय के साथ समाप्त होते हैं
  • जबकि ऋणायनों के सामान्य नाम आइड (- ide) प्रत्यय के साथ समाप्त होते हैं।
  • बहुपरमाणुक धनायन क्या हैं?
    • बहुपरमाणुक धनायन वे आवेशित कण होते हैं
    • जो दो या अधिक परमाणुओं के समूह से बने होते हैं और कुल धनात्मक आवेश धारण करते हैं।
    • इनमें परमाणु सहसंयोजक बंधों से जुड़े होते हैं
    • जैसे अमोनियम (NH₄⁺) में नाइट्रोजन चार हाइड्रोजन परमाणुओं से बंधा होता है।
    • ये आयन रासायनिक प्रतिक्रियाओं में एक इकाई के रूप में कार्य करते हैं।
  • प्रत्यय -ओनियम का महत्व
    • -ओनियम प्रत्यय धनायन की प्रकृति दर्शाता है
    • विशेष रूप से जब केंद्रीय परमाणु पर लॉन्ग पेयर इलेक्ट्रॉन के कारण धनात्मक आवेश आकर्षित हो।
    • यह IUPAC नामकरण के अलावा सामान्य नामों में प्रचलित है
    • जो संरचना को सरलता से व्यक्त करता है।
    • उदाहरणस्वरूप, हाइड्रोनियम (H₃O⁺) जल के प्रोटोनेशन से बनता है।
  • सामान्य उदाहरण
    • अमोनियम (NH₄⁺): सबसे प्रसिद्ध, उर्वरकों और अमोनिया यौगिकों में पाया जाता है।
    • फॉस्फोनियम (PH₄⁺): फॉस्फीन से व्युत्पन्न।
    • सल्फोनियम (R₃S⁺): जहां R अल्काइल समूह है।
    • ऑक्सोनियम (R₃O⁺): ऑक्सीजन युक्त।
    • ये नाम -ओनियम प्रत्यय से समाप्त होते हैं
    • जो उनके बहुपरमाणुक स्वरूप को रेखांकित करता है।

9. भोजन पकाने की निम्नलिखित में से किस प्रक्रिया में भोजन में मौजूद चीनी ऑक्सीकृत होकर भूरे रंग में बदल जाती है? [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) कैरामेलीकरण
Solution:
  • भोजन पकाने की कैरामेलीकरण (Caramelisation) की प्रक्रिया में भोजन में मौजूद चीनी ऑक्सीकृत होकर भूरे रंग में बदल जाती है।
  • कैरामेलीकरण एक प्रकार की गैर-एंजाइमी ब्राउनिंग प्रतिक्रिया है।
  • प्रक्रिया का विवरण
    • कारमेलीकरण एक गैर-एंजाइमेटिक ब्राउनिंग प्रक्रिया है
    • जो शुद्ध शर्करा या चीनी युक्त भोजन को १६०°C से १८०°C तापमान पर गर्म करने से शुरू होती है।
    • इस दौरान शर्करा के अणु विघटित होकर नए यौगिक बनाते हैं
    • जो भूरा रंग, चमकदार बनावट और विशिष्ट स्वाद प्रदान करते हैं।
    • यह ऑक्सीकरण प्रतिक्रिया शर्करा को कारमेल में परिवर्तित करती है
    • जो पकाने की विधियों जैसे कि चीनी पिघलाना या प्याज भूनने में स्पष्ट दिखती है।
  • अन्य प्रक्रियाओं से अंतर
    • एंजाइमेटिक ब्राउनिंग (जैसे सेब काटने पर भूरापन) एंजाइमों जैसे पॉलीफेनॉल ऑक्सीडेज (PPO) द्वारा फेनोलिक यौगिकों के ऑक्सीकरण से होती है
    • मेलार्ड रिएक्शन अमीनो अम्ल और रिड्यूसिंग शर्करा के बीच कम तापमान (१४०°C के आसपास) पर होता है
    • जबकि कारमेलीकरण में केवल शर्करा शामिल होती है।
    • ये अंतर भोजन पकाने की विभिन्न तकनीकों को विशिष्ट बनाते हैं।
  • उदाहरण और उपयोग
    • चीनी का कैरमेल सिरप: चीनी को धीरे-धीरे गर्म करने पर वह पिघलकर भूरी हो जाती है
    • जो मिठाइयों में प्रयुक्त होती है।
    • भुनी सब्जियाँ: प्याज या लहसुन में प्राकृतिक चीनी कारमेलाइज होकर मीठा स्वाद देती है।
    • बेकरी उत्पाद: ब्रेड या कुकीज़ की सतह पर क्रस्ट बनने में यह प्रक्रिया सहायक होती है।
  • महत्व और प्रभाव
    • यह प्रक्रिया भोजन को आकर्षक बनाती है, स्वाद बढ़ाती है और बनावट सुधारती है
    • लेकिन अधिक गर्म करने से कड़वापन आ सकता है।
    • खाद्य उद्योग में इसे नियंत्रित कर फ्लेवर एन्हांसमेंट के लिए उपयोग किया जाता है।

10. रासायनिक आबंधों का बॉल और स्प्रिंग मॉडल (Ball and Spring Model) किसका पालन करता है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) हुक का नियम
Solution:
  • रासायनिक आबंधों का बॉल और स्प्रिंग मॉडल (Ball and Spring Model) हुक के नियम का पालन करते हैं।
  • बॉल परमाणु कोर का प्रतिनिधित्व करती है और स्प्रिंग रासायनिक बंधन का प्रतिनिधित्व करती है।
  • मॉडल का मूल सिद्धांत
    • इस मॉडल में, परमाणुओं को कठोर गेंदों के रूप में माना जाता है
    • जो न्यूनतम संतुलन दूरी पर स्थित होते हैं
    • जबकि रासायनिक बंध (जैसे सहसंयोजक बंध) को स्प्रिंग्स की तरह elastic माना जाता है।
    • जब बाहरी बल लगने पर बंध खिंचता या संपीड़ित होता है
    • तो स्प्रिंग restoring force उत्पन्न करता है जो बंध को मूल लंबाई पर वापस लाता है।
    • यह व्यवहार हूक के नियम F=−kx का अनुसरण करता है
    • जहाँ F restoring force है, k स्प्रिंग स्थिरांक (bond strength) है, और x विस्थापन है।
  • हूक के नियम का संबंध
    • हूक का नियम बताता है कि स्प्रिंग पर लगने वाला बल उसके विस्तार या संकुचन के समानुपाती होता है।
    • रासायनिक बंधों में, संतुलन दूरी से अधिक खिंचाव पर आकर्षण बल कार्य करता है
    • जबकि संपीड़न पर विकर्षण बल।
    • यह मॉडल रेणुओं के कंपन (vibrational modes), IR स्पेक्ट्रम और elastic गुणों को समझाने में सहायक है।
    • आणविक यांत्रिकी (Molecular Mechanics) में यह "ball-and-spring" approximation के रूप में उपयोग होता है
    • जो जटिल quantum calculations को सरल बनाता है।
  • अनुप्रयोग और सीमाएँ
    • यह मॉडल ठोस पदार्थों के elastic व्यवहार को भी स्पष्ट करता है
    • जहाँ परमाणु स्प्रिंग-बॉल तंत्र की तरह व्यवस्थित होते हैं।
    • बाहरी force हटने पर restoring mechanism मूल आकार बहाल करता है।
    • हालांकि, यह अनुमानित है क्योंकि वास्तविक बंध quantum प्रभावों (जैसे Pauli exclusion) से प्रभावित होते हैं
    • हमेशा perfectly harmonic नहीं रहते।
    • उच्च विस्थापन पर anharmonic effects दिखते हैं।
  • आणविक स्तर पर विवरण
    • रेणु में, दो परमाणुओं के बीच potential energy curve parabolic (harmonic) के निकट होती है
    • संतुलन बिंदु के आसपास। बॉल-एंड-स्प्रिंग मॉडल इस curve को V=12k(r−r0)2 से मॉडल करता है
    • जहाँ r0 संतुलन बंध लंबाई है। यह vibrational frequency ν=12πkμ
    • (reduced mass μ) की गणना में उपयोगी है।