कथन (A) : किसी धन विधेयक के लोक सभा द्वारा पारित किए जाने और राज्य सभा को पारेषित किए जाने के बाद, राज्य सभा की सिफारिशें लोक सभा द्वारा सिफारिशों की प्राप्ति के 14 दिन के अंदर अनिवार्यतः स्वीकार की जानी होती हैं और तत्पश्चात उन्हें विधेयक में अंगीकृत किया जाना होता है।
कारण (R) : धन विधेयक राज्य सभा में पेश नहीं किया जा सकता है। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
Correct Answer: (d) (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
Solution:अनुच्छेद 109 के अनुसार, धन विधेयक केवल लोक सभा में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। लोक सभा द्वारा धन विधेयक पारित किए जाने के पश्चात राज्य सभा में उसकी सिफारिशों हेतु प्रेषित किया जाता है, जिसे राज्य सभा 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों सहित लोक सभा को लौटा देती है। परंतु लोक सभा, राज्य सभा की किसी सिफारिश को मानने या न मानने हेतु स्वतंत्र है। यदि राज्य सभा 14 दिनों के भीतर धन विधेयक लोक सभा को वापस नहीं करती, तो उसे उसी रूप में दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाएगा। अतः राज्य सभा को धन विधेयक में संशोधन या अस्वीकार करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 113 (2) के अनुसार, अनुदान मांगें लोक सभा में रखी जाएंगी तथा उसे ही उस पर मतदान का अधिकार होता है। अनुच्छेद 112 के अनुसार, वार्षिक वित्तीय विवरण राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक वित्तीय वर्ष के संबंध में दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत भारत सरकार की प्राप्तियों एवं व्यय का विवरण होता है, जिस पर दोनों सदनों में साधारण चर्चा होती है।