ब्रह्मांड (विश्व का भूगोल)

Total Questions: 29

1. निम्नलिखित में से कौन-सा एक जोवियन (Jovian) ग्रह नहीं है? [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) बुध
Solution:
  • बृहस्पति, शनि, यूरेनस तथा नेप्च्यून गैसीय ग्रह हैं। इनके बड़े आकार के कारण इन्हें जोवियन (Javian) ग्रह भी कहते हैं।
  • अतः बुध ग्रह जोवियन ग्रह की श्रेणी में नहीं आता है।
  • कौन-से ग्रह जोवियन हैं:
    • बृहस्पति (Jupiter)
    • शनि (Saturn)
    • अरुण/यूरेनस (Uranus)
    • वरुण/नेपच्यून (Neptune)
  • कौन-सा ग्रह स्थलीय है (जो जोवियन नहीं):
    • बुध (Mercury)
    • शुक्र (Venus)
    • पृथ्वी (Earth)
    • मंगल (Mars)
  • सही उत्तर का स्पष्ट स्पष्टीकरण:
    • अगर विकल्पों में बुध, शुक्र, पृथ्वी या मंगल में से एक हो, तो वही ग्रह जोवियन नहीं होगा, क्योंकि ये सभी स्थलीय ग्रह हैं
    • गैस-दानव नहीं हैं।
    • इसके विपरीत ग्रह अगर बृहस्पति, शनि, अरुण (यूरेनस), या वरुण (नेपच्यून्) में से हो, तो वह जोवियन ग्रह है।
  • संक्षिप्त सार:
    • जोवियन ग्रह: गैसीय giants → बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण
    • स्थलीय ग्रह: मिट्टी/चट्टानी स्थलीय पिंड → बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल
  • अक्सर पूछे जाने वाले बिंदु (ध्यान दें):
    • “जोवियन” शब्द Jupiter के रोमन देवता के नाम से बना है; यह दिग्गज गैस ग्रहों के समूह को दर्शाता है.​
    • गैस-दानव ग्रहों में सतह स्पष्ट ठोस नहीं होती; वे विशाल आकार वाले गैसों से बने होते हैं.​

2. उपग्रह वायुमंडल की निम्नलिखित में से किस परत में पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं? [MTS (T-I) 15 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) बहिर्मंडल
Solution:
  • उपग्रह वायुमंडल के बहिर्मंडल परत में पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। बहिर्मंडल वायुमंडल की सबसे बाहरी परत है।
  • वायुमंडलीय स्तरों में 640 किमी. के ऊपर बहिर्मंडल का विस्तार पाया जाता है। इसी मंडल में संचार उपग्रहों को स्थापित किया जाता है।
  • विस्तृत विवरण:
    • Atmosphere के भीतर कई परतें होती हैं, जिनमें क्षोभमण्डल (troposphere), समतापमण्डल (stratosphere), मध्यमण्डल (mesosphere), आयनमण्डल/एक्सोस्फीयर (ionosphere/thermosphere) आदि शामिल हैं।
    • उपग्रह सबसे बाहरी परत बहिर्मंडल (exo­sphere) में रहते हैं और वहीं से पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं.​
    • बहिर्मंडल पृथ्वी की वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत मानी जाती है और इसका घनत्व बहुत कम होता है
    • जिससे उपग्रह नीस/लो अर्बिट में भी स्थिर रहते हैं और अंतरिक्ष की सीमा के करीब रहकर पृथ्वी की घूर्णन के साथ कक्षीय पथ तय करते हैं.​
    • अन्य परतों में मौसम, क्लाउड कवर, ओजोन आदि जैविक और जलवायु क्रियाओं के कारण संचालन/उड़ान व्यवहार संभव नहीं होते हैं
    • इसलिए कृत्रिम उपग्रहों का स्थायी कक्षीय प्रभाव बहिर्मंडल में ही होता है.​
    • जायज उदाहरण के रूप में संचार, नेविगेशन और मौसम उपग्रह बहिर्मंडल में कक्षीय पथ के साथ पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं.​
  • ध्यान दें:
    • यह जानकारी सामान्य विज्ञान के पाठ से संबंधित है
    • भारत में स्कूल/कॉलेज स्तर के पाठ्यक्रम में अक्सर इसी शब्दावली में पढ़ाई जाती है।
    • उपरोक्त संरचना और परतों की क्रमबद्धता, उनके ऊंचाई दायरे और उपग्रहों के संघटक स्थान को स्पष्ट रूप से समझाती है
    • कौन-सी परतें उपग्रह-परिक्रमा के लिए प्रमुख होती हैं.​
  • नीचे एक अंतर्निहित सार:
    • बहिर्मंडल: उपग्रह-परिक्रमा की वास्तविक जगह; वायुमंडल की सबसे ऊपरी परत; बहुत कम घनत्व; पृथ्वी से लगभग 7000–10,000 km तक ऊँचाई पर मिलती है
    • वास्तविक ऊँचाई-सीमा उपग्रह के प्रकार पर निर्भर करती है.​
    • अन्य परतें जैसे क्षोभमण्डल, समतापमण्डल, मध्यमण्डल आदि सामान्य वातावरण और मौसम से जुड़ी गतिविधियों के लिए महत्व रखते हैं
    • उपग्रह संचालन के लिए नहीं.​
  • स्रोत संकेत:
    • बहिर्मंडल में उपग्रहों की परिक्रमा और इसकी भौतिक विशेषताओं के बारे में विवरण.​
    • वायुमंडल की परतों की क्रमवारता और बहिर्मंडल की भूमिका.​

3. मीनल ने शनि के सबसे बड़े चंद्रमा पर एक निबंध लिखा था। यह निम्नलिखित में से कौन-सा चंद्रमा है? [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) टाइटन
Solution:
  • बृहस्पति के चंद्रमा गेनीमीड के बाद यह सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा चंद्रमा है। टाइटन का व्यास 5150 किमी. है।
  • सवाल का सही उत्तर: Titan
    • Titan शनि का सबसे बड़ा चंद्रमा है और गैनीमीड के बाद सौर मंडल के बड़े चंद्रमाओं में प्रमुख स्थान रखता है
    • Titan की व्यास लगभग 5,149.5 किमी है, जो हमें बताता है कि यह शनि के विशाल चंद्रमाओं में अग्रणी है. [Titan, Saturn's largest moon]​
  • Titan के बारे में प्रमुख बिंदु
    • संरचना और सतह: Titan icy-hell (बर्फीला) दुनिया है जिसमें घना वातावरण और मीथेन-समुद्र/झीलें पाई जाती हैं
    • यह ऐसी विशिष्ट चंद्रमाओं में से एक है जिसका वातावरण हमारे ही नहीं, बल्कि अन्य चंद्रमाओं के मुकाबले बहुत घना माना जाता है.​
    • आकार बनाम अन्य चंद्रमा: Titan Solar System में Saturn के सबसे बड़े चंद्रमाओं में से एक है
    • (जेनमीड) के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा चंद्रमा माना जाता है, हालांकि यह विशाल है और पृथ्वी से बड़ा है.​
    • आयाम और तुलना: Titan का व्यास ~5,149.5 km है; इसका आकार इतना विशाल है
    • यह बुध ग्रह से भी बड़ा है, और यह कई अन्य चंद्रमाओं के भीतर एक प्रमुख दायरे के रूप में मान्यता प्राप्त है.​
  • पृष्ठभूमि/नामकरण
    • Titan का नाम पौराणिक कवि-देवी Titania से प्रेरित नहीं, बल्कि टाइटन शब्द से जुड़ा है
    • जो विशाल/महाकाय का प्रतीक बतौर प्रयोग किया गया है; Titan को शनि के चंद्रमाओं में सबसे बड़ा माना जाता है.​
  • अन्य संबंधित चंद्रमाएँ (संदर्भ के लिए)
    • Saturn के अन्य बड़े चंद्रमाओं में Ganymede (जूनो/गैनिमीड) सबसे बड़ा कुल मिलाकर माना जाता है, Titan उसके बाद आता है
    • यह तुलना कहानी में निबंध के लिए उपयुक्त संदर्भ देता है.​
  • अतिरिक्त संदर्भ (भाषा-आधारित स्रोत)
    • Testbook और अन्य शैक्षणिक स्रोतों के अनुसार Titan शनि का सबसे बड़ा चंद्रमा है
    • यह NASA/प्रचलित खगोल विज्ञान सामग्रियों में भी इसी के अनुसार वर्णित है.​

4. निम्नलिखित में से किस तारामंडल को शिकारी भी कहा जाता है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) ओरॉयन
Solution:
  • ओरॉयन एक प्रमुख तारामंडल है जिसे हम सर्दियों में मध्य रात्रि में देख सकते हैं।
  • यह आकाश में सर्वाधिक भव्य तारामंडलों में गिना जाता है। इसे 'शिकारी' कहते हैं।
  • विस्तार में
    • शिकारी के नाम से पहचाना जाने वाला सबसे प्रसिद्ध तारामंडल Orion है।
    • इसका चित्र विश्ववर्ष में शिकारी की भंगिमा बनकर देखा जाता है
    • जिसमें तीन ऊँचे तारों की बेल्ट प्रमुख आकर्षण होती है। यह बेल्ट तारा-समूह Orion’s Belt के नाम से भी जाना जाता है
    •  केंद्रीय भाग विशाल सितारों का समूह बनता है।​
    • Orion तारामंडल अनेक आकाशीय संरचनाओं से घिरा होता है जिसमें Betelgeuse (बेटेलज्यूज़) और Rigel जैसे अत्यंत चमकीले तारे शामिल हैं
    • जिससे यह रात के आकाश में तुरंत पहचान में आता है।​
    • अन्य स्रोत भी यही संकेत करते हैं कि शिकारी या कालपुरुष जैसा आकृतिक संयोजन Orion में ही दिखाई देता है
    • इसे हिंदी शिक्षण सामग्री में अक्सर “शिकारी तारामंडल” के रूप में बताया गया है।​
  • क्यों माना जाता है:
    • Orion के आकाशीय संरचना में Belt (कमरबंद) जैसे ठोस रेखीय चयन उसे एक स्पष्ट चित्र प्रदान करते हैं जो शिकारी की आकृति की याद दिलाती है।
    • यह प्रतीकात्मक रूप से “शिकारी” कहा जाने का कारण बना रहता है।​
    • उपयुक्त संदर्भों में Orion को शिकारी तारामंडल के रूप में उद्धृत किया गया है
    • अन्य उम्मीदवार तारामंडलों के नाम (जैसे Leo Major, Cassiopeia) अक्सर प्रतियोगी सवालों में गलत विकल्प बन जाते हैं
    • जिससे Orion एक प्रमुख सही उत्तर होता है।​
  • कच्चे तथ्य (मुख्य बिंदु)
    • तारामंडल नाम: Orion (ओरियन)
    • लोकप्रिय पहचान: शिकारी के रूप में, Belt (शिकारी बेल्ट) द्वारा चिह्नित
    • प्रमुख तारे: Betelgeuse, Rigel
    • स्थान: आसमान के दक्षिणी-पूर्वी भाग से पूर्व दिशा में आकाश में दिखाई देता है
    • उत्तरी गोलार्ध में भी दृश्य होता है, विशेषकर शरद ऋतु-ठंड के महीनों में।​

5. ग्रेट बीयर (Great Bear) कहा जाने वाला तारामंडल कितने चमकीले तारों से बना है? [CGL (T-I) 24 अगस्त, 2021 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) सात
Solution:
  • ग्रेट बीयर (Great Bear) कहा जाने वाला तारामंडल सात चमकीले तारों से बना है।
  • यह तारामंडल अर्सा मेजर का भाग है। इसे 'सप्तर्षि तारामंडल' भी कहा जाता है।
  • ग्रेट बीयर का परिचय
    • नाम और पंहचान: ग्रेट बीयर का लैटिन नाम Ursa Major है
    • जिसे हिंदी में ग्रेट बीयर या महावर्ण भालू कहा जाता है​
    • स्थिति: यह उत्तरी आकाश का तारामंडल है और विशेषकर उत्तर गोलार्ध में सबसे पहचानने योग्य आकाशीय आकृतियों में से एक है.
    • आकार और सीमा: ग्रेट बीयर उत्तरी आकाश में स्थित है और इसका क्षेत्रफल लगभग 1,280 वर्ग डिग्री है
    • जो इसे आकाश के बड़े तारामंडलों में से एक बनाता है.
  • प्रमुख तारे और संरचना
    • सप्तर्षि (Big Dipper) अष्टक: ग्रेट बीयर में सात प्रमुख तारे मिलकर बिग डिपर के रूप में प्रसिद्ध आकृति बनाते हैं
    • जिसे अक्सर इस तारामंडल के भीतर सबसे पहचान योग्य उप-गठन माना जाता है.cite​
    • मुख्य सितारे: ग्रेट बीयर के मुख्य सितारे कुल मिलाकर लगभग 19-20 के आसपास गिने जाते हैं
    • जिनमें सबसेBrightness Alioth (ε UMa) सबसे प्रमुख है और बाकी तारें मिलकर विशाल रिंग/डिपर-आकृति बनाते हैं.
    • नैविगेशन संदर्भ: इन तारों का उपयोग पारंपरिक celestial navigation में किया गया है
    • ग्रेट बीयर के तारे, विशेषकर बिग डिपर, आकाश में दिशा बताने के लिए एक सामान्य संदर्भ बनते हैं.cite​
  • गहराई से देखें: सप्तर्षि और बड़े समूह
    • सप्तर्षि नामकरण: ग्रेट बीयर के सात सबसे चमकीले तारों के समूह को सप्तर्षि कहा जाता है
    • यह नाम आम तौर पर उसी अंश के लिए प्रयोग होता है; जबकि पूरे तारामंडल में 19-20 प्रमुख तारें शामिल होते हैं.
    • अन्य वस्तुएं: ग्रेट बीयर के आस-पास गहरी-आकाश वस्तुएँ भी मिलती हैं
    • जैसे कुछ Messier क्लस्टर और गैलेक्टिक संरचनाएँ, जो तारामंडल के आस-पास एक विविध दृश्य प्रस्तुत करती हैं.
  • क्या देखें और कैसे पहचानें
    • बिग डिपर के माध्यम से पहचान: आकाश में सबसे पहले बिग डिपर को ढूंढ़ें—यह एक बड़ा बर्तन-सा आकार बनाता है
    • जो ग्रेट बीयर का सबसे प्रसिद्ध हिस्सा है.cite​
    • अक्षांश-उन्नयन: उत्तर गोलार्ध में ग्रेट बीयर लगभग सभी वर्षों में स्पष्ट रूप से दिखता है; दक्षिणी भागों में भी कुछ मौसमों में दिख सकता है.
    • ग्रेट बीयर के बारे में विश्वसनीय संदर्भों में सितारों की गणना और संरचना में स्रोतों के अनुसार छोटे-छोटे अंतर संभव हैं
    • आम तौर पर इसे 19 मुख्य तारों वाला समूह माना जाता है और सप्तर्षि के रूप में 7 चमकीले तारों पर विशेष ध्यान रहता है.

6. निम्नलिखित में से किस ग्रह को पृथ्वी का जुड़वां ग्रह (Earth's twin planet) माना जाता है? [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (I-पाली), MTS (T-I) 02 मई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) शुक्र
Solution:
  • शुक्र ग्रह को पृथ्वी की जुड़वां ग्रह (Earth's twin planet) के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसके अतिरिक्त इस ग्रह को सर्वाधिक चमकीला ग्रह, सुबह का तारा तथा शाम का तारा आदि नामों से भी संबोधित किया जाता है।
  • पृथ्वी का जुड़वां ग्रह शुक्र है।
    • मुख्य बिंदु: शुक्र और पृथ्वी आकार, द्रव्यमान और रचना में बहुत समान हैं
    • इसलिए इसे पृथ्वी का जुड़वां माना जाता है। शुक्र लगभग पृथ्वी के आकार के बराबर है
    • इसका द्रव्यमान भी तुलनात्मक रूप से निकट है, जिससे उनके भौतिक गुण मिलते-जुलते दिखते हैं।
    • यह कारण है कि कई शैक्षणिक स्रोत इसे Earth’s twin or sister planet के रूप में प्रस्तुत करते हैं।​
    • आकार और दूरी: पृथ्वी के आकार के करीब होने के साथ-साथ शुक्र सूर्य से पृथ्वी के थोड़ा करीब स्थित है
    • उनके प्राकृतिक बनावट में भी समानताएं देखी जाती हैं।
    • यह तुलना शिक्षात्मक संदर्भों में बार-बार प्रस्तुत की जाती है ताकि ग्रह विज्ञान के शुरुआती विद्यार्थियों के लिए अवधारणाएं सरल हों।​
    • वैचारिक और तथ्यात्मक विविधताएं: हालांकि शुक्र और पृथ्वी में कई समानताएं हैं
    • उनके वातावरण, सतह के तापमान और चंद्रमाओं जैसी विशेषताएं भिन्न हैं
    • जिनके कारण वे एक दूसरे के समान नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर शुक्र का वातावरण घना और तीक्ष्ण वायुमंडलीय दबाव वाला है
    • जो पृथ्वी से अलग है। फिर भी आकार-गठन के संदर्भ में उन्हें एक दूसरे के पूरक माना जाता है।​

7. दिए गए विकल्पों में से वामन ग्रह की पहचान करें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) प्लूटो
Solution:
  • वामन ग्रह या बौना ग्रह किसी आकाशीय पिंड का चक्कर लगाने वाले उन पिंडों को कहते हैं
  • जो ग्रह तथा उपग्रह से इतर हैं। प्लूटो (यम) एक वामन ग्रह है।
  • परिभाषा और इतिहास
    •  यह वर्गीकरण 2006 में स्थापित हुआ जब प्लूटो को ग्रह-गण से हटाकर बौना ग्रह घोषित किया गया था.​
    • यह अवधारणा “वामन ग्रह”/“ड्वॉर्फ प्लांट” के रूप में उसी समय से व्यापक रूप से मान्य है
    • सूर्य-परिक्रमा में आने वाले उन पिण्डों के लिए जो ग्रहों के समान नहीं बल्कि छोटे, प्राथमिक पदार्थों के समूह होते हैं
    • जिनकी कक्षा कुछ विशेष मानदंडों को पूरा नहीं करती, जैसे कि पृथ्वी के आकार के बराबर या गुरुत्वीय प्रभाव से साफ़ कक्षा का न होना आदि.​
  • प्लूटो और अन्य वामन ग्रह
    • प्लूटो यह सबसे प्रसिद्ध वामन ग्रह है, जो कूपर बेल्ट में स्थित है और सूर्य की परिक्रमा करता है
    • इसे शुरू में नौवां ग्रह माना गया था, पर बाद में 2006 में इसे बौना ग्रह घोषित कर दिया गया.​
    • प्लूटो का आकार पृथ्वी के चंद्रमा से छोटा है, और इसका कक्षा अंडाकार है जिसमें दूरी सूर्य से 29.7 से 49.5 AU के बीच परिवर्तन होती है
    • यह विवरण नियंत्रित तरीके से बताने वाले सामान्य ज्ञान से जुड़ा है.​
  • भिन्नता और ग्रह बनाम बौना ग्रह
    • ग्रह होने के लिए एक पिण्ड को तीन मुख्य मानदंडों से गुजरना पड़ता है: सूर्य के चारों ओर भ्रमण करते हैं
    • पर्याप्त मात्रा में गुरुत्वाकर्षण होने से अपने आकार को लगभग गोलvorm में ढाल लेते हैं
    • अपनी कक्षा से अन्य पिंडों को साफ़ कर देते हैं।
    • वामन ग्रह इस अंतिम मानदंड को पूरा नहीं करता – उसकी कक्षा साफ़ नहीं होती, इसलिए इसे ग्रह नहीं माना गया.​
    • कई अन्य पिंड भी बौना ग्रह की श्रेणी में आते हैं; इनमें से कुछ प्रसिद्ध नामों में शामिल हैं
    • प्लूटो के अलावा Eris, Haumea, Makemake, और Niederheim जैसे पिण्ड भी इस वर्ग के अंतर्गत आते हैं
    • जो सब सूर्य के चारों ओर भ्रमण करते हैं और काफ़ी बड़े लेकिन ग्रह नहीं माने जाते.​
  • क्यों यह पूछना उपयोगी है
    • पौराणिक नाम वामन/varāha—हिंदी में “वामन ग्रह” के रूप में भी ज्ञात—आमतौर पर हिंदू पौराणिक कथा के मूल नाम "वामन avatars" से नहीं जुड़ता; खगोल विज्ञान में यह एक स्पष्ट वर्ग-निर्देशन है
    • जो बिंदुवीय ग्रहों के आधुनिक वर्गीकरण को समझाने में मदद करता है.​
    • नवीनतम सौरमंडलीय मानक के अनुसार, ग्रह, उपग्रह, और वामन ग्रह जैसी श्रेणियाँ विज्ञान के अद्यतन ज्ञान पर निर्भर हैं
    • यह स्थिरता समय के साथ अपडेट होती रहती है.​
  • निष्कर्ष
    • आपके दिए प्रश्न “दिए गए विकल्पों में से वामन ग्रह की पहचान करें” के संदर्भ में उत्तर यह है
    • वामन ग्रह एक बौना ग्रह है—यानी वह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करता है
    • ग्रह-गुणों के सभी मानदंड पूरी तरह नहीं निभाता और अपनी कक्षा को साफ़ नहीं करता।
    • यदि विकल्पों में प्लूटो, Eris आदि शामिल हों, तो ये सभी बौना ग्रह/ग्रह-समूह के भीतर आते हैं
    • प्लूटो सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है जिसे 2006 में वामन ग्रह के रूप में मान्यता मिली।
    • कृपया चयनित विकल्प दिखाएं ताकि सटीक पहचान स्पष्ट रूप से बताई जा सके.​

8. अपनी परिक्रमा के दौरान जब पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होती है तो उसकी स्थिति क्या कहलाती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) अपसौर (Aphelion)
Solution:
  • वह स्थान जहां से ग्रह सूर्य से सबसे नजदीक होता है, उपसौर तथा जब ग्रह सूर्य से सबसे दूर होता है, तो यह अपसौर कहलाता है।
  • परिभाषा और कारण
    • पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है और उसकी कक्षा आकृति एक अंडाकार (दीर्घवृत्त) है।
    • इस कारण सूर्य कभी-कभी पृथ्वी से कक्षा केकेंद्र के पास रहता है और कभी-कभी उससे दूर होता है।
    • अपहेलियन वह बिंदु है जिसमें पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर होती है।
    • यह घटना साल में एक बार घटती है और सामान्यतः जुलाई के आसपास होती है ।​
  • दूरी और पारीख
    • अपहेलियन के समय पृथ्वी सूर्य से लगभग 150 मिलियन किलोमीटर से कुछ ज्यादा दूर रहती है
    • विशिष्ट दूरी लगभग 152 मिलियन किलोमीटर के आसपास बताई जाती है
    • (यह दूरी वास्तविक वर्ष और अक्षीय मुद्राओं के कारण थोड़ा बदल सकती है)।
    • अक्सर 4 जुलाई को इसे पैमाने पर सबसे दूर माना जाता है, हालांकि तिथियाँ वर्ष-दर-वर्ष थोड़ा भिन्न हो सकती हैं।​​
  • तुलनात्मक बिंदु
    • पृथ्वी की सूर्य से निकटतम दूरी को पेरिहेलियन कहा जाता है
    • यह आम तौर पर जनवरी की शुरुआत के आसपास होता है, और दूरी लगभग 147 मिलियन किलोमीटर होती है।
    • अतः वर्ष भर में दूरी के दो प्रमुख बिंदु हैं: पेरिहेलियन (निकटतम) और अपहेलियन (सबसे दूर)।​
  • प्रभाव
    • पृथ्वी की कक्षा अपूर्ण अंडाकार होने से दूरी में छोटे-छोटे बदलाव होते हैं, पर इन परिवर्तनों से मौसम पर बड़े स्तर पर प्रभाव नहीं होता है।
    • अपहेलियन और पेरिहेलियन केवल दूरी में छोटे अंतर बनाते हैं
    • अक्षीय झुकाव और अन्य कारण मौसम पर अधिक प्रभाव डालते हैं।​
  • कैसे समझना आसान हो
    • एक सरल तरीका: अगर कक्षा के केंद्र में सूरज है और पृथ्वी एक अंडाकार मार्ग से गुजरती है
    • तो अंडाकार के चारों ओर के दो विशेष बिंदु सबसे नजदीक और सबसे दूर बताते हैं
    • पेरिहेलियन और अपहेलियन। सूर्य–पृथ्वी दूरी में क्रमशः सबसे कम और सबसे अधिक दूरी इन्हीं बिंदुओं पर होती है।​
  • मुख्य बिंदु
    • अपहेलियन = पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर स्थिति।​
    • सामान्य दूरी लगभग 152 मिलियन किलोमीटर के आस-पास बताई जाती है
    • जो साल-दर-साल थोड़ा भिन्न हो सकती है।​
    • यह घटना वर्ष में एक बार होती है और जुलाई के आसपास आती है।​

9. निम्नलिखित में से कौन-सी परत सजीवों के लिए महत्वपूर्ण है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) क्षोभमंडल
Solution:
  • क्षोभमंडल को वायुमंडल की सबसे महत्वपूर्ण परत कहा जाता है।
  • इसी मंडल में उपस्थित वायु में सांस लेता है। अतः यह परत सजीवों के लिए महत्वपूर्ण है।
  • सजीवों के लिए कौन-सी परत सबसे महत्वपूर्ण
    • ऑक्सीजन-युक्त वायु (वायुमार्ग) सजीवों के लिए श्वसन के लिए अनिवार्य है
    • अधिकांश जीव ऑक्सीजन पर निर्भर रहते हैं। यह जीवन के लिए सबसे केंद्रीय गैस है।
    • [जाँचणीय पंक्ति: जीवन के लिए ऑक्सीजन आवश्यक]
    • कार्बन डाइऑक्साइड भी पौधों के लिए भोजन बनाने के लिए आवश्यक है
    • (फोटोसिंथेसिस के लिए स्रोत), इसलिए वायुमंडलीय गैसों का संतुलन भी महत्वपूर्ण है। [उल्लेख: पौधों के लिए CO2 आवश्यक है]
    • तापमान नियंत्रण भी महत्त्वपूर्ण है
    • जलवायु के स्थिर रेंज में जीवन सुरक्षित रहता है
    • जबकि अत्यधिक तापमान जीवन चक्र और जैविक प्रक्रियाओं को बाधित कर सकता है। [उल्लेख: तापमान का प्रभाव]
  • इन बिंदुओं को समझना मददगार है:
    • पृथ्वी की प्रमुख सतही परतें: वायुमंडल (वायुमंडल की विभिन्न परतें), जल (समुद्र, नदियाँ, झीलें), और भू-पर्पटी (मिट्टी और चट्टानें) मिलकर जीवन के लिए अनुकूल स्थिरता बनाते हैं।
    • परतों के संतुलन में किसी एक का बड़ा परिवर्तन जीवन-प्रणाली पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
    • [उद्धरणात्मक विचार: परतों का संतुलन जीवन के लिए आवश्यक]
  • वायुमंडल की भूमिका
    • श्वसन प्रक्रिया: अधिकांश जीव ऑक्सीजन 받아 जीवन-जीविका चलाते हैं
    • ऑक्सीजन गैस की उपलब्धता सीधे जीवन की निरंतरता से जुड़ी होती है। [उद्धरणात्मक विचार: श्वसन के लिए ऑक्सीजन]
    • पौधों के लिए CO2: प्रकाश-संश्लेषण के लिए CO2 जरूरी है; वातावरण में CO2 का स्तर पौधों की वृद्धि-उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
    • [उद्धरणात्मक विचार: फोटोसिंथेसिस]
    • तापमान नियंत्रण: वातावरणीय तापमान जीवन के विविध यांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है
    • अत्यधिक तापमान से अंडे, लार्वा, प्रजातियों के विकास चक्र प्रभावित होते हैं। [उद्धरणात्मक विचार: तापमान का प्रभाव]
  • जल और मिट्टी की भूमिका
    • जल जीवन की मौलिक आवश्यकता है; जल तापमान और यांत्रिक गुण जीवन के प्रकार और उनके वितरण को प्रभावित करते हैं।
    • जल की अच्छाई और तापमान जीवन-चक्र के लिए निर्णायक हो सकता है। [उद्धरणात्मक विचार: जल का तापमान]
    • मिट्टी में जैविक पदार्थ, खनिज और जल-संरक्षण संतुलन जीवों के पोषण और जीवन-स्थिति को निर्धारित करते हैं
    • मृदा परतें जैविक पदार्थ की मात्रा और अन्य तत्वों के भंडार के कारण महत्त्वपूर्ण हैं। [उद्धरणात्मक विचार: मिट्टी की परतें]
  • निष्कर्ष
    • सजीवों के लिए जीवन-संघटन और विकास के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण सतही परत वायुमंडल है
    • क्योंकि यह श्वसन और तापमान नियंत्रण में केंद्रीय भूमिका निभाती है। [उद्धरणात्मक विचार: श्वसन और तापमान]
    • इसके साथ जल और मिट्टी के बर्ताव भी अत्यंत अहम हैं
    • क्योंकि वे पोषण, जलवायु संतुलन और जैविक विविधता को सीधे प्रभावित करते हैं।
    • [उद्धरणात्मक विचार: जल-तापमान, मिट्टी का जैविक पदार्थ]

10. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प, 0.03 अल्बेडो के साथ सौरमंडल में सबसे काला (dark) या सबसे कम परावर्तक वस्तु है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) 1P/हैली (1P/Halley)
Solution:
  • हैली सौरमंडल में सबसे काला या सबसे कम परावर्तक वस्तुओं में से एक है।
  • इसका अल्बेडो 0.03 है, जिसका अर्थ है कि यह अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश का केवल 3 प्रतिशत ही परावर्तित करता है।
  • अल्बेडो क्या है
    • अल्बेडो वह मापक है कि सतह कितनी मात्रा में सूर्य विकिरण का reflection करती है
    • जहां 0.0 पूरी तरह अवशोषण और 1.0 पूरी तरह परावर्तन दर्शाता है.​
    • मौलिक बात यह है कि सतह कितनी प्रभावी तरह से प्रकाश को वापस छोड़ती है
    • धीमी/गहरे रंग की सतहें कम और रौशन/सफ़ेद सतहें अधिक अल्बेडो दिखाती हैं.​
  • सौरमंडल के भीतर प्रमुख अल्बेडो रेंज
    • ताजा बर्फ: लगभग 0.9 के करीब, सौर विकिरण का अधिकांश वापस परावर्तित होता है; यह मान सबसे ऊँचा माना जाता है.​
    • charcoal/काला पत्थर: लगभग 0.04 के आसपास, अत्यंत कम परावर्तक, अक्सर सबसे गहरे पिंडों में पाया जाता है.​
    • पृथ्वी का औसत अल्बेडो: लगभग 0.3 (लगभग 0.29–0.31 के दायरे में).​
  • सौरमंडल में 0.03 अल्बेडो का अर्थ
    • अल्बेडो सौर मंडल में अत्यंत कम परावर्तक सतह का संकेत देता है
    • ऐसे सतहों में अधिकांश विकिरण अवशोषित होता है और केवल कुछ भाग लौटता है।
    • यही कारण है कि अंधेरे कार्बन-युक्त पिंड (जैसे कुछ कॉस्मिक धूल, सूक्ष्म अवशिष्ट चट्टानें) 0.03 के आसपास के अल्बेडो दिखाते हैं.​
  • किस सतह का अल्बेडो अधिक/कम होता है
    • उच्च अल्बेडो (लगभग 0.9) – ताजा बर्फ/ बर्फ़।
    • निम्न अल्बेडो (लगभग 0.04) – चारकोल/चारकोल-रूपी अंधेरी सतहें; अक्सर सौरमंडल के अंधेरे पिंडों में पाया जाता है.​
    • पृथ्वी के इष्टतम औसत ~0.3 है, जो 0.03 से काफी ऊँचा है
    • सामान्य सतही धातु/पत्थर के लिए भी ऊपरी हिस्से में आता है (परिदृश्य अलग-अलग हो सकता है).​
  • संभावित विकल्पों का सार
    • अगर विकल्प “ताजा बर्फ” हो, तो यह 0.9 के करीब है—सबसे अधिक परावर्तक।
    • अगर विकल्प “चारकोल” या “अंधेरी मिट्टी/कार्बन-युक्त सतह” हो, तो 0.04 के आसपास होता है—सबसे कम परावर्तक में से एक।
    •  अल्बेडो के संदर्भ में, सौर मंडल के भीतर ऐसी अंधेरी सतहें सबसे काली/कम परावर्तक मानी जाती हैं
    •  आसपास के मान संभव हैं (कम से कम 0.04 के आसपास के दायरे के नीचे).​
  • नोट्स
    • अल्बेडो के आयाम सतह की रेजोलिथ/आकृति, प्रकाश के कोण, और अवशोषण-प्रतिबिंब की दिशा-निर्देशन पर निर्भर करते हैं
    • एक ही सतह का अल्बेडो अन्य कोणों पर भिन्न दिख सकता है.​
    • पृथ्वी जैसे बड़े पिंडों के लिए औसत अल्बेडो से तुलना करते समय स्थानीय भू-रचना और वातावरण के प्रभावों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है.​